The Post on 14th November 2025
जनता को शायद सब से बड़ी चिंता केचुआ और ईवीएम है, और सभी एक्सपायर्ड बुद्धिजीवी की भी यही चिंता का विषय है।मगर मेरे नज़र मे यह चिंता असल सच्चाई को छुपाने की कोशिश है।
बिहार चुनाव का रिज़ल्ट यह साबित करता है कि बीजेपी हर क़िमत पर चुनाव जीत कर सरकार बनाना चाहती है।संघ प्रमुख बीजेपी से ख़ुश नहीं हैं और कई विवादों के बावजूद चुप चाप जितने देते हैं, चाहे वह मध्य प्रदेश हो, हरियाणा, महाराष्ट्र हो या बिहार हो।
यह सबको मालूम है कि बीजेपी कोख (संघ) का गोद है।अगर संघ गोद (बीजेपी) को छोड़ती है तो दूसरा विकल्प राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस का गोद है मगर राहुल गांधी, संघ के साथ कोख और गोद के खेल को एलानिया ख़त्म करना चाहते हैं और कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे यह नहीं चाहते हैं।खडगे को पता है कि कोख-गोद के खेल के बिना कभी भी कांग्रेस सत्ता में नहीं आये गी। उत्तर भारत और बिहार में कांग्रेस की हार इस का जिता जागता सबूत है।
बीजेपी के साम-दाम-दंड-भेद के कारण नीतीश कुमार को जब अपनी हार नज़र आने लगी तो वह अपने जाति के लोगों का आह्वान कर एनडीए गठबंधन में अपनी जीत सुनिश्चित करवा कर महागठबंधन में कांग्रेस समेत सब को धुल चटवा दिया।
NOTE: इस साल राष्ट्रपति ट्रम्प ने दूसरे विश्व युद्ध के बाद लंबे समय से चले आ रहे मानदंडों को ध्वस्त कर दिया है और दशकों पुरानी संस्थाओं को बेहद तेज़ी से उलट दिया है।
*पुरानी विश्व व्यवस्था समाप्त हो चुकी है और 2026 में पश्चिमी उदार लोकतंत्रों का भविष्य खतरे में है।विश्व की नई अर्थव्यवस्था और तकनीकों का प्रभाव दुनिया के विकसित देशों पर गहरी चोट देगा।भविष्य में चीन आर्थिक और सैन्य शक्ति बन कर विकसित देशों को टक्कर दे गा।मिडिल ईस्ट और तुर्की सौ साल बाद फिर अंतर्राष्ट्रीय प्रणाली (international system) के लिए एक महत्वपूर्ण राष्ट्र बन कर इस शताब्दी में उभर गये।
*मगर अफ़सोस हमारे संघ प्रमुख और उन के विचारक इस नई बदली दुनिया के वैश्विक सत्ता संरचनाओं के पुनर्निर्माण (reshaping of the global power structure), नई वैश्विक अर्थव्यवस्था और तकनीकों द्वारा हिन्दुस्तान के भविष्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव के बारे में नहीं सोंचते हैं, वह केवल अपने भविष्य की फ़िक्र करते हैं।
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Some comments on the Post
Mohammed Seemab Zaman राहुल गांधी को हमारी सलाह है कि आप देश हित में संघ के साथ “कोख-गोद” का खेल शुरू कर दिजये। राहुल गांधी कृपया ज़िद छोड़िये और देश को बर्बादी से बचाईये, चीन बहुत बड़ा खतरा भारत के लिए हो गया है।
Iftekhar Anjum Brilliant observation
- Mohammed Seemab Zaman सलाम अलैकुम। ख़ानदान मे, आप से ज़्यादा इस चीज़ को कौन जान सकता है? आप तो हिन्दुस्तान का यह “कोख और गोद” की सियासत बहुत क़रीब से देखा है और उस मे बहुत नज़दीक से शामिल भी रहे हैं। आप ही के यार-ग़ार तो आज कई साल से अध्यक्ष हैं। शुक्रिया, आप ने इस पोस्ट पर कामेंट कर “मोहर” लगा दिया।
Reyaz Ahmad Khan एकाध जगहों को छोड़कर महागठबंधन के पक्ष में वोटिंग कहीं भी कम नहीं हुई है, डकैती कर उसी वोट को इधर बढ़ाकर दिखा दिया गया है जनाब! जन सुराज और एआईएमआईएम का फीगर उठाकर देख लें! ढ़ाका में 116 वोट से राजद उम्मीदवार को कड़े संघर्ष से जीत हासिल हुई है, एआईएमआईएम के राणा रंजीत ने 5 हजार से अधिक वोट काटे हैं…
Abdul Raheem राहुल गांधी और खड़गे में किसका approach सही है? राहुल गांधी की सोच कांग्रेस के cadre, नेताओं में कितनी है, आप बेहतर जानते हैं. क्या ‘देश बचाने’ के नाम पर कांग्रेस (चाहे संघ की गोद वाली हो), को सपोर्ट करके उर्दू नाम वाले अपनी क़ब्र खोद लें?!
शिव रतन पारीक पूरी पोस्ट को पढ़ने के बाद यही लगा जो लिखा उसमें कोई तारतम्य नहीं है कांग्रेस संघ का गोद में क्यों बैठेगी सरदार पटेल ने जिस संघ पर प्रतिबंध लगाया वो ही कांग्रेस संघ की गोद में बैठेगी आपकी कल्पना हो सकती है लेकिन सच से कोसों दूर ,इसलिए आपकी पोस्ट के विचार से पूर्ण रूप से असहमत हु. चुनाव के नतीजे वोट चोरी के कारण हुआ है सच भी सामने आएगा
- Mohammed Seemab Zaman देखये यही narrative गढ़ा गया कि सरदार पटेल ने संघ पर प्रतिबंध लगाया। सरदार पटेल के ऐलावा कोई दूसरी गृह मंत्री होता तो वह भी यही काम करता क्योंकि बापू कहे जाने वाले गांधी की हत्या हुआ था। शुक्र मनाये, अबुल कलाम गृह मंत्री नहीं थे वरना उन पर इल्ज़ाम लगता कि संघ को ग़लत प्रतिबंध लगा दिया।
- *बिना RSS support के congress सत्ता में कभी वापिस नहीं आ सकती है, यह बात याद रखिये गा।
Kamil Khan पूरी पोस्ट से सहमत हूँ सिर्फ़ नितीश ने हार देख कर वोट ट्रांसफर किया इस से असहमत हूँ क्योंकि चिराग़ पासवांन को इतनी बड़ी जीत, नितीश क्यों देंगे, असल में नितीश के हाथ में कुछ था ही नहीं, जो किया सब अमित शाह ने किया, चाहे जैसे किया, दूसरी बात राहुल की ज़िद ठीक है, या गलत है इसका फैसला आने वाला वक़्त करेगा, मेरी समझ से देश को बचाने से ज़्यादा ज़रूरी है संघ से देश को बचना,
- Faiz Syed, Kamil Khan भाई मैं आपके comment से सहमत हूँ पर लास्ट वाली लाइन से नहीं.
Salman Siddiqui बिहार का ताज़ा चुनाव वाकई दिखाता है कि बीजेपी सत्ता के लिए किसी भी हद तक जाने की रणनीति पर चल रही है जबकि संघ और कांग्रेस दोनों के अपने अपने हितों का गणित है और उनके बीच कोख गोद की राजनीति किसी सिद्धांत पर नही बल्कि सत्ता की ज़रूरतों पर आधारित है.
वैश्विक परिप्रेक्ष्य में आपने जो बात कही कि पुरानी विश्व व्यवस्था टूट रही है और 2026 के बाद पश्चिमी लोकतांत्रिक देशों का भविष्य अनिश्चित हो सकता है यह बिल्कुल गंभीर और वास्तविक चिंताएँ है. दुनिया में चीन, तुर्की और मिडिल ईस्ट शक्ति के नए केन्द्र बन रहे हैं लेकिन भारत में रणनीतिक सोच की जगह अभी भी घरेलू राजनीति के खेल को प्राथमिकता दी जा रही है.
भारत की राजनीतिक नेतृत्व और विचारधारा मशीनरी विश्व व्यवस्था के बदलते नक्शे को पढ़ने में असफल है और यही आने वाले दशकों में सबसे बड़ा नुकसान पहुँचा सकती है
- Mohammed Seemab Zaman यह जो हम ने नीचे नोट में लिखा है यह हम ने The Economist, London और यूके के MI6 के रिटायर्ड चीफ़ Richard Moore के लिखे और कहे शब्द को कोट किया है। दुनिया इस serious matters पर बहस कर रही है मगर हम लोग हर क़िमत पर चुनाव को जीत कर सरकार बनाने की बहस मे लगे हैं।
Shekh Shakil Alam सर कांग्रेस का इतना हालात खस्ता कैसे हो गया आज पूरे भारत में उजड़ा चमन है
- Mohammed Seemab Zaman कांग्रेस का गोद उजड़ गया।