Post on 23 August 2025
कल Faisal Mohammad Ali साहेब ने “हिंदुस्तान में मुस्लिम सियासत की बदहाली की तस्वीर” के हेडलाइन से इस बदली दुनिया मे सही वक्त पर सही पोस्ट किया है।
फैसल साहेब ने लिखा कि “भारत की पॉलिटिक्स में बदलाव लाने का दावा करने वाले राहुल गांधी को ये मुस्लिम #सिंबलिज़्म का सिलसिला तोड़ देना चाहिए. मुस्लिम नौजवान छटपटा रहा है, नई राह और रौशनी अपने लिए तलाश करना चाहता है, इसलिए बख़ुदा पुराने बरगदों को पानी न दें.”
यह वही राहुल गांधी हैं जो पिछले दस साल में कभी भी इस तरह का #सिंबलिज़्म नही देखाया (नीचे तस्वीर देखें) बल्कि इन के कांग्रेस पार्टी के कोख और गोद वाले नेताओं ने इन को भी संघ के पार्टी के तरह हिन्दू-सिंबलिज़्म देखाने को कहा और यह कलावा पहने लगे, संसद में अपने को शिव भक्त बताने लगे और मंदिर में दर्शन करने लगे आदि इत्यादि।
राहुल गांधी के हिन्दू-सिंबलिज़्म के बाद भी कांग्रेस की सरकार नहीं बनी।बिहार चुनाव में SIR से पता चला कि ईवीएम नही बल्कि वोट-चोरी से छू-मंतर कर चुनाव जिता जाता है।यह भारत में नई बात नहीं है, यह बात सब राजनीतिक पार्टी को मालूम था और है मगर वह नहीं बोलते थे क्योंकि संघ की सरकार को अमेरिका का आशीर्वाद (ओबामा-ट्रम्प-बाईडेन) प्राप्त था।
अब चूकिं सौ साल बाद, दुनिया का geopolitics और geoeconomics बदल गया। रूस-यूक्रेन और इसराइल-प्रतिरोधी ताक़तों के जंग ने अमेरिका और यूरोप की क़लई खोल दिया, और पश्चिमी ताक़तों का आशीर्वाद भारत पर ख़त्म हो गया तो राहुल गांधी ने कांग्रेस का वही पुराना खेल #मुस्लिम-सिंबलिज़्म शुरू कर दिया।
राहुल गांधी या दूसरे क्षेत्रीय पार्टी के नेताओं को मेरा यह सुझाव है कि #सिंबलिज़्म का सिलसिला ख़त्म करें और अब पुराने बर्गदों को पानी न दें क्योंकि दुनिया बदल गई है।नये नस्ल के खांदानी-पढ़े लिखे-बाशऊर मुस्लिम लोगों को राहुल गाँधी अपने नाना पंडित नेहरू की तरह सियासत में जगह दें, वरना कांग्रेस की सराकर बन्ने के बाद भी दुनिया का “geoeconomics” जिन के मुठ्ठी में है वह एक पैसा भारत में निवेश नहीं करें गें और 140 करोड़ की आबादी दुनिया में मज़दूरी कर भटकती रहे गी।
#NOTE: मेरा 1 जनवरी 2024 का एक पोस्ट “थूक के चाटते हैं, चाट के थूकते है” पेंटागन किशोर (Pk) के इसी मुस्लिम सिंबलिज़्म पर था।अफ़सोस की बात है कि इस बदली दुनिया मे आज संध की सरकार विस्तारवादी चीन के साथ वही पुरान सिंबलिज़्म, “अब की बार जिनपिंग की सरकार” फिर शुरू कर दिया।
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