2014 में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भारत में संघ की सरकार बनवाई। उस समय दिल्ली में मौजूद अमेरिकन राजदूत ने शपथ समारोह में भाग नहीं लिया क्योंकि वह ओबामा के संघ की सरकार बनाने की योजना के खिलाफ थीं।
2014 से संघ की सरकार ने मुस्लिम समाज के प्रति Lynching, NRC, 370, Teen Talaq, Waqf Board, SIR कर मुद्दा बना और उठा कर ख़ौफ़, नफ़रत, घृणा समाज में फैलाती रही और ध्रुवीकरण कर देश को तबाही के मुहाने पर ला खड़ा किया। भारत के इस खौफ, नफ़रत और घृणा की राजनीति को देख कर एशिया के देशों ने ध्रुवीकरण कर चीन को दुनिया का सैन्य और आर्थिक महाशक्ति बना दिया।
*2015 जनवरी में प्रिंस सलमान बिन अब्दुल अज़ीज़ सऊदी अरब के बादशाह बने और ओबामा चार दिन के दौरा पर 24 जनवरी 2015 को भारत आये। ओबामा भारत के गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि थे। उस दौरा में भारत में हर्षोल्लास के साथ जो ड्रामा हुआ उस को पुरी दुनिया ने देखा और नोट किया, ख़ास कर एशिया के मुल्कों ने।
ओबामा भी ड्रामा देख कर डर गये क्योकि मुस्लिम मुल्क तो उन के “अरब स्प्रिंग” से अमेरिका का साथ छोड़ ही चूका था, कहीं सऊदी अरब न अमेरिका का साथ छोड़ दे, जिस के Petro-Dollar से अमेरिका सुपर पावर बना बैठा है। इस डर से वह भारत की अपनी एक दिन की यात्रा कम कर 28 जनवरी को किंग अब्दुल्लाह के पोरसा मे रेयाद पहुँच गये। जहॉ उन को शाह सलमान बिन अब्दुल अज़ीज़ ने रेयाद एयरपोर्ट पर स्वागत किया और कुछ देर बाद ओबामा को उनके पत्नी समेत छोड़ कर एयरपोर्ट पर मौजूद एक छोटे से मस्जिद में असर की नमाज़ पढ़ने चले गये। बाद में अमेरिकी राजदूत की गाड़ी आई और ओबामा पत्नी के साथ अमेरिकी दूतावास चले गये। इस का विडियो अभी भी पब्लिक डोमेन में मौजूद है।
यह बात बहुत लोगों को बुरी लगी होगी कि शाह सलमान अमेरिका जो दुनिया का सुपर पावर है, उस के राष्ट्रपति बराक ओबामा जो अब्दुल्लाह के मौत के पोरसा में रेयाद आये थे उन को क्यों इस तरह ज़लील कर दिया। मगर लोगों को याद नहीं होगा कि बराक अपने 2007 के राष्ट्रपति चुनाव के दौरान सऊदी अरब के बारे में एक बहुत “ग़लत” बात कह दी थीं जिस का विडियो बराक के 2008 मे राष्ट्रपति बन्ने के बाद पूरी दुनिया से हटा दिया गया।शाह सलमान ने बराक को उसी का जवाब एयरपोर्ट पर नमाज़ से दिया था। इस वाक़्या को ट्रम्प ने 2017 के बाद एक दो जगह कहा भी है, “ओबामा ने अमेरिका को बेइज्जत करा दिया।”
26 जनवरी 2015 को ओबामा की चार दिवसीय भारत यात्रा मे एशियाई देशों, ख़ास कर मिडिल ईस्ट के राष्ट्राध्यक्षों ने “ओबामा के चाल-चरित्र” को पढ़ लिया।ओबामा के भारत दौरा के बाद शाह सलमान ने अगस्त 2015 में पुतिन को सीरियाई युद्ध में प्रवेश करने के लिए कहा और सऊदी अरब और यूएई ने सीरिया से अपने को निकाल लिया। उस समय से लेकर 8 दिसंबर 2024 तक रूस सीरिया में क्लिंटन और ओबामा के पैदा किये दाईश (ISIS) को ख़त्म कर राष्ट्रपति बशार अल असद को सत्ता में बनाये रखा।
*मेरा मानना है कि सीरिया में पुटिन को आमंत्रित करने के शाह सलमान के फ़ैसला ने द्वितीय विश्व युद्ध (WWII) के बाद दुनिया मे चल रहे सत्तर साल के सत्ता समीकरण को बदल दिया।
*पश्चिमी देशों के सत्ता समीकरण को बदलता देख राष्ट्रपति ओबामा ने जुलाई 2016 में तुर्की में राष्ट्रपति अरदोगान के खिलाफ आर्मी विद्रोह (coup) करा दिया जिस मे सैकड़ों लोग मरे मगर राष्ट्रपति अरदोगान ने उस को नाकाम कर दिया। ओबामा को अरब स्प्रिंग के असफलता के बाद, तुर्की का असफल सैनिक विद्रोह अमेरिका को ले डूबा और मिडिल ईस्ट की geo-politics और geo-economics तेज़ी से बदलने लगा।
*शाह सलमान ने 2016 में रूस को ओपेक (OPEC+) का मेम्बर बनवा दिया और तेल के दाम को स्थिर कर दिया। पुटिन ने कुछ साल बाद कहा कि OPEC+ के मेम्बर बन्ने के पहले रूस $20 billion का तेल दुनिया को बेचता था मगर ओपेक (+) का सदस्य बन्ने के बाद $100 billion का तोल बेचने लगा, इस से रूस की Economy बहुत मज़बूत हो गई।
*रूस का मिडिल ईस्ट के क़रीब होने का सब से बड़ा फ़ायदा अगस्त 2019 मे सेंट्रल एशिया के मूलकों को Caspian Sea जो 370,000 sq.km मे हैं जहॉ तेल और गैस पाया जाता है और जो 1920 से सोवियत संघ के क़ब्ज़ा में था, उस को पुटीन ने रूस, ईरान, अज़रबाईजान, कज़ाखस्तान और तुर्कमेनिस्तान के बीच बाँट कर कज़ाखस्तान के शहर Aktau में कैस्पियन समुंदर के लीगल स्टेटस के कन्वेंशन पर दस्तख़त किया।पुटिन का यह समझौता दुनिया के सबसे बड़े अंदरूनी पानी के इलाके पर यह डील कई वजहों से मायने रखती थी, जिस का अंजाम बाद में दुनिया ने फ़रवरी 2022 में रूस-यूक्रेन जंग के रूप मे देखा।
*ओबामा के आठ साल (2008-2016) का कार्यकाल ख़त्म हुआ तो ट्रम्प अमेरिका के प्रेसिडेंट जनवरी 2017 में बने।प्रेसिडेंट ट्रम्प ने अपनी पहली विदेश यात्रा 8-10 मई 2017 को सऊदी अरब से शुरू किया जहॉ उन का शांदार इस्तक़बाल शाह सलमान ने किया।
ट्रम्प के प्रेसिडेंट बन्ने के बाद भारत ने अमेरिका में लौबिइंग करा कर भारतीय प्रधानमंत्री ट्रम्प से मिलने 26 June 2017 को अमेरिका गये।उस के बाद सितंबर 2019 में अमेरिका के यूसटन (Houston) मे “हाऊडी मोदी” हुआ जिस मे भारतीय प्रवासियों के मोदी, मोदी के नारा से लगा की अब अमेरिका भारत को चीन की तरह “विश्वगुरु” बना देगा।
फिर, अहमदाबाद मे फ़रवरी 2020 मे “नमस्ते टर्मप” हुआ तो फिर आशा जगी की अमेरिका हिन्दुस्तान को निश्चित “विश्वगुरु” बना देगा। उसी समय पुरी दुनिया मे Corona Pandemic फैल गया और दुनिया Quarantine के बूरे दौर से एक साल तबाह रही मगर उसी साल मई 2020 में चीन गलवान और अरूनाचल मे विस्तारवादी हो गया और ट्रम्प या अमेरिका के प्रवासी भारतीयों ने भारत के लिए चीन के खिलाफ कुछ नहीं किया। ट्रम्प ने भारत-चीन के Border Dispute को ख़त्म करने के लिए Mediator बनने की बात कही।
*कोरोना वायरस से तो पुरी दुनिया तबाह हुई। कम-व-बेश सभी मूलकों की जानी और माली तबाही हुई, मगर सब से ज़्यादा बर्बादी अमेरिका, भारत और इंग्लैंड का हुआ।अमेरिका मे 10 लाख से ज़्यादा लोग मर गये, भारत मे तो लाश नदी में बहती देखी गई।भारत की अर्थव्यवस्था बर्बाद होगई और शेयर बाज़ार बुरी तरह गिरा, जिस का नतीजा हुआ कि 80 करोड़ भारतीय ग़रीब को 2029 तक 5 किलो अनाज सहायता के रूप मे प्रति वर्ष $27 billion के योजना से देना शुरू हुआ।
*इस कोरोना युग की एक बड़ी उपलब्धि यह है कि इस महामारी (2020) के दौरान अज़रबाईजान ने रूस-आर्मीनिया के नगोरनो-कराबाख के 30 साल पुराने क़ब्ज़े को तुर्की के ड्रोन के मद्द से पूरा जीत लिया, जिस को सोवियत संघ ने 1920 मे कब्ज़ा कर लिया था।यह जंग दुनिया की पहली ड्रोन जंग थी जिस को तुर्की ने जीत कर दुनिया और रूस को चौंका दिया। इस तरह नगोरनो काराबाख पर Azerbaijan की Sovereignty तीस साल बाद क़ायम हो गई।इस साल 2025 के अंत में आर्मीनिया अज़रबाईजान को एक रास्ता Nakhchivan जाने के लिए दे गा।नखचिवान इतिहास में अपने geographical status के वजह East & West का contact point रहा है जिस पर सदियों Seljuks, Khwarazmshahs, Timurs, Ottomans, Safavids वग़ैरह ने हुकूमत किया।
*ट्रम्प ने अपने चार साल (2017-2020) में सब से यादगार काम अफ़ग़ानिस्तान में 40 साल से चल रहे मार-काट को तालिबान से समझौता कर ख़त्म किया।अफ़ग़ानिस्तानी प्रेसिडेंट अशरफ़ ग़नी से 30 अगस्त 2021 को अमेरिकन फ़ौज की वापसी का एग्रीमेंट किया। मगर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने एसी चाल चली के 15 अगस्त 2021 को “Fall of Kabul” हो गया, प्रेसिडेंट अशरफ़ ग़नी मुल्क छोड़ कर यूएई भाग गये और अमेरिकन तथा NATO की फ़ौज बेइज्जत हो कर 15 दिन पहले 15 अगस्त को रात में चली गई, और तालिबान बीस साल बाद फिर काबुल मे सत्ता हासिल कर लिया।
*अफ़ग़ानिस्तान में नेटो की फ़ौज की हार 1990 में सोवियत संघ की फ़ौज के हार से ज़्यादा शर्मनाक साबित हुआ।मेरा मान्ना है कि “फ़ॉल आफ़ काबुल” ने तेज़ी से “New World Order” के स्थापित करने में अहम रोल (घटना) अदा करना शुरू किया, जिस का नतीजा हुआ रूस ने 1945 के 77 साल बाद 24 फ़रवरी 2022 को यूक्रेन (यूरोप) पर जंग थोप दिया। तु्र्की ने अप्रैल 2022 को रूस-यूक्रेन से वार्ता कर जंग बंदी पर दोनों पक्षों राज़ी करवा दिया मगर कहा जाता है कि इंग्लैंड के प्रधानमंत्री बोरिस जॉन्सन ने यूक्रेन को सपोर्ट कर जंग जारी रखने को तैयार करवा लिया।यूरोप के अलावा अमेरिकी प्रेसिडेंट बाईडेन ने यूक्रेन को पैसा और लड़ाई का सामान देकर जंग जारी रखा।
2022 मे, इंग्लैंड के पत्रिका The New Statesman, London में जेरेमी क्लिफ ने लेख “Putin’s War Without End” में दस पॉइंट के साथ यह तर्क दिया था कि पिछले “छ: महीना मे दुनिया बदल गई।” क्लिफ ने लिखा कि चीनी बूद्धिजीवी कहते है “यूरोप और अमेरिका को इस बात का अहसास नहीं है कि हाल के दशकों में दुनिया मे कई नए और शक्तिशाली केंद्र बने हैं, जो अपनी राजनीतिक संस्थान तथा विकास की योजना बना कर तरक्की कर काम रहे हैं।”
रूस-यूक्रेन की लड़ाई (फ़रवरी 2022) के बाद दो साल में पुटिन ने चीन, आर्मेनिया, बेलारूस तथा 8 मुस्लिम देशों की यात्रा किया जिस में सेंट्रल एशिया के पॉच और ईरान, यूएई तथा सऊदी अरब भी थे।बराक ओबामा के 26 जनवरी 2015 में भारत दौरा के समय दुनिया में किसी ने नही सोंचा होगा कि 6 दिसंबर 2023 में पुटिन अपने लड़ाकू ज़हाज़ के साया में सऊदी अरब और यूएई का दौरा करे गें।उसी वक़्त The Financial Times, London ने खबर छापी के इंग्लैंड के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक व्यक्तिगत रूप से रेयाद जा कर सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान को इंग्लैंड आने का निमंत्रण दिया था और प्रिंस मोहम्मद 6 दिसंबर को लंदन आने वाले थे मगर अचानक प्रिंस मोहम्मद ने 3 दिसम्बर 2023 की अपने लंदन यात्रा को स्थगित कर दिया क्योंकि 6 दिसम्बर को पुतिन जिन पर अंतरराष्ट्रीय क्रिमनल कोर्ट (ICC) का ऐरेस्ट वारंट है वह रेयाद आ रहे थे।इस दौरा से पहले, पुटिन 14-15 अक्टूबर 2019 को सऊदी अरब का दौरा कर चुके थे।
कहा जा रहा है कि रूस-यूक्रेन जंग मे 32 लाख (1.7 million रूसी और 1.5 million यूक्रेनियन) लोग मर गये और 70 लाख यूक्रेनी यूरोप, अमेरिका मे शरणार्थी बन गये मगर किसी मुस्लिम मुल्कों ने रूस के ख़िलाफ़ न बोला, न अफ़ग़ानिस्तान की तरह पश्चिमी ताक़तों का साथ दिया। सिर्फ़ सऊदी अरब ने $500 million यूक्रेन को दिया। 10 June 2026 को रूस यूक्रेन की लड़ाई WWII से ज़्यादा दिन की हो जाये गी जिस मे अब तक बीस साल चले Vietnam War से ज़्यादा लोग मर गये हैं।
*रूस की जंग में यूरोप और अमेरिका को फँसा देख हमास ने 7 अक्टूबर 2023 को इसराइल में मार-काट शुरू कर दिया। ग़ाज़ा में 70,000 आम लोगों की हत्या अमेरिका और यूरोप के दिये हथियार से हो गई मगर दुनिया तमाशा देखते रही। सितंबर 2025 में अमेरिका ने ईरान और अपने दोस्त क़तर पर इसराइल से बमबारी करवा दिया ताकि अरब मुल्क सब कूदें और सब को 50 साल के लिए इराक़ के तरह तबाह कर दें।अरब मुल्कों ने यह सब बर्दाश्त किया और इस #फितना को फैलने से रोक दिया क्योंकि वह जान रहे हैं कि अमेरिका अब दुनिया का सुपर पावर नहीं रहा।
*इसराइल-प्रतिरोधी ताक़तों के मार काट में सत्तर हज़ार बेगुनाह की मौत हुई मगर इस मार-काट की सब से बड़ी उपलब्धि सीरिया में 8 दिसंबर 2024 को “Fall of Assad” के रूप मे हुआ। बशार अल असद के फॉल की बड़ी उपलब्धि 60 साल से चले आ रहे तुर्की में कुर्दिश बग़ावत का अंत है। 2025 मे कुर्दिश PKK आतंकी ने इराक़, सीरिया और तु्र्की में अपने आतंकवाद को ख़त्म करने का एलान कर दिया। साठ साल मे कुर्दिश आतंकवादीयों ने तु्र्की के 40,000 से ज़्यादा लोगों का क़त्ल किया।
*ट्रम्प 2025 में दूसरी बार प्रेसिडेंट बने मगर फलस्तीन में मार-काट जारी रखा। “Make America Great Again” का नारा लगा कर अप्रैल 2025 में दुनिया के सभी देशों पर “tariffs” लगा कर पुरे दुनिया के geo-economics को बदल दिया। यूरोप और कई देशों ने ट्रम्प से बात कर समझौता कर लिया मगर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ट्रम्प से नवंबर 2025 तक कोई समझौता नहीं किया है। कहा जा रहा है कि ट्रम्प अमेरिका के Economy को डूबने से बचाने के लिए अगले साल झुक कर चीन से समझौता करें गें।
*क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान के 19 नवंबर 2025 के हालिया अमरीका दौरा ने सऊदी अरब के 1945 के “सिक्योरिटी के बदले तेल” के फ़ॉर्मूला को ख़त्म कर दिया। इस की वजह चीन और सऊदी अरब के बढ़ते मज़बूत तअल्लुक़ात बताया जा रहा है।चीन की वजह कर मिडिल ईस्ट मे अमरीका की Foreign policy बदलती नज़र आ रही है।
*अरब देशों के पास अभी $2.5 trillion से ज़्यादा पैसा इंवेस्टमेंट के लिए है जो यह लोग South East Asia के देश चीन, सिंगापुर, हांगकांग, मेलेशिया, इंडोनेशिया में बड़े पैमाने पर निवेश कर रहे हैं।रूस-यूक्रेन जंग के कारण कोई अरब मुल्क यूरोप में इंवेस्टमेंट नहीं कर रहे हैं। सऊदी अरब, यूएई, ओमान, इराक़ अपने मुल्कों मे Infrastructure, Roads, Highway, Hi-speed rail (HSR), Artificial Intelligence (AI) वग़ैरह पर खर्च कर रहे हैं।
*यूऐई चीन से AI में साझेदारी कर रहा है जबकि सऊदी अरब एक नई कम्पनी HUMAIN बना कर AI में बड़े पैमाने पर Nvidia, AMD, Cisco, Tesla, GE Vernova, Adobe से साझेदारी कर रहा है।कहा जा रहा है कि सऊदी अरब अगले चार सालों में $200 billion से ज़्यादा AI में इंवेस्टमेंट करने जा रहा है जो 2030-35 मे सऊदी अरब को AI में दुनिया का केन्द्र बना देगा।
*पिछले 10-12 साल मे प्रेसिडेंट शी जिनपिंग के नेतृत्व में चीन दुनिया का सब से बड़ा military & economic power बन गया है। आज दुनिया का सब से बड़ा बंदरगाह चीन के शंघाई शहर में है और चीन मे Hi- speed rail नेटवर्क पूरी दुनिया के हाई-स्पीड ट्रेन नेटवर्क से ज़्यादा है।
NOTE: मेरा मान्ना है कि यह यूक्रेन-रूस जंग नहीं, जिसने दुनिया को बदल दिया है, बल्कि ओबामा के “अरब सप्रिंग” ने 21वीं सदी में दुनिया को बदला है।मेरा यह निष्कर्ष है कि ओबामा का 2011 मे अरब सप्रिंग कर मुस्लिम मुल्कों को unstable कर बरबाद करना और 2014 में भारत में संघ की सरकार की स्थापना, अमेरिका और पश्चिमी देशों की दो बडी बेवक़ूफ़ी ने 1878 के बाद एशिया और मिडिल ईस्ट के geo-politics और geo-economics को तेज़ी से बदल दिया।
अब तो इसराइल के अख़बार भी लिखने लगे हैं कि “ट्रम्प के लिए खाड़ी एक सोने की खान है और इज़राइल मुकाबला नहीं कर सकता है”