The Post of 13 December 2025

21वीं सदी का एक चौथाई हिस्सा ख़त्म हो गया और हम लोग एक नये दुनिया को देखें गें जैसे 20वी सदी मे हमारे आबा व अजदाद ने 1923 के बाद एक नई दुनिया देखी थी।

पिछले सदी के एशिया के कुछ लीडर्स इस नई दुनिया में याद रखे जायें गें जिन की वजह कर 21वी सदी की नई दुनिया हुई। उस लिस्ट में सब से पहला नाम तुर्की के मुस्तफ़ा कमाल अतातुर्क का होगा, दूसरा पंडित नेहरू और अबुल कलाम आज़ाद, तीसरा सऊदी अरब के शाह फ़ैसल, मलेशिया के महाथिर मोहम्मद, चौथा चीन के डेंग शियाओपिंग होंगें।

*अतातुर्क ने 1923 में तुर्की को उस्मानिया सल्तनत के ज़वाल के बाद अपने दूरंदेशी से अपने मुल्क को बचा लिया।अतातुर्क ने सल्तनत उस्मानिया का सब मुल्क छोड़ दिया मगर इस्तांबुल नहीं छोड़ा क्योंकि वह Black Sea का Gateway था और है, जो एशिया और यूरोप के नेटवर्क का अहम पिलर है।आज सौ साल बाद इस्तांबुल का फ़ायदा तु्र्की को रूस-यूक्रेन लड़ाई में मिल रहा है।

दूसरा जब तुर्की का वफ़द सोवियत संघ से अज़रबाईजान और Nakhchivan (नक्खचिवान) के बारे मे बात करने जा रहा था तो अता तुर्क ने वफ़द को कहा था कि नक्खचिवान सोवियत को नहीं देना क्योंकि वह East and West का गेटवे है।प्रेसिडेंट स्टालिन को कहना कि तुर्की उस के क़ब्ज़ा नहीं करे गा और न किसी दूसरे को क़ब्ज़ा करने देगा।आज अज़रबाईजान सौ साल बाद अपनी सारी ज़मीन हासिल कर आर्मेनिया को झुका दिया और आज नक्खचिवान से रेल नेटवर्क से सेंट्रल एशिया के मुल्कों को तुर्की और यूरोप से जोड़ रहा है।

तीसरी सब से बड़ी बात, जब ब्रिटिश साम्राज्य के 1917 Balfour Declaration जिसमें फ़िलिस्तीन में “यहूदी लोगों के लिए एक नेशन” बनाने के लिए कहा, तो अतातुर्क ने अपने लोगों से कहा चुप रहो यही मसला बाद में मुसलमानों के बक़ा की वजह का एक मुद्दा बने गा।सौ साल बाद, इन्हीं मुद्दों से तु्र्की ने फिर अपनी बक़ा को दोबारा क़ायम कर दिया।

*पंडित नेहरू और अबुल कलाम आज़ाद ने 1947 मे आज़ादी के बाद भारत के विकास की नींव रखी। अगर नेहरू और आज़ाद नही होते तो आज भारत बर्मा के तरह ही बर्बाद रहता। पढ़ा है कि चीन के विदेश मंत्री चाओ एन लाई 1955 में इंडोनेशिया कांफ्रेंस में भाग लेने नहीं जा रहे थे क्योंकि चीन के पास विमान नहीं था। जब नेहरू को पता चला तो उन्होने भारतीय जहाज़ भेजा और चाओ एनलाई इंडोनेशिया गये।

दिसम्बर 1992 में बाबरी मस्जिद के शहादत के पहले भारत हर क्षेत्र मे चीन से आगे था मगर 21वी सदी के 25 साल में भारत चीन से हर क्षेत्र 5-6 गुणा पिछे हो गया है। पिछले 25 साल मे भारतीय समाज में ज़हर घोल कर दंगा फसाद कर पंडित नेहरू और आज़ाद के बनाये भारत को बर्बाद कर दिया गया। अब तो 20-30 साल लगे गा दुनिया को समझाने में कि हम समाज मे दंगा-फसाद कर और ज़हर घोल कर GDP नहीं जलायें गें।

*पिछली सदी में सऊदी अरब के बादशाह फ़ैसल बिन अब्दुल अज़ीज़ के वक़्त मे तेल का दाम इसराइल-अरब जंग से 350 गुणा बढा और तेल एक हथियार बन गया। तेल के बढ़े दाम से, पूरे मिडिल इस्ट का revivalism शुरू हुआ। सऊदी अरब, इराक़, कुवैत वगैरह ने बहुत तरक़्क़ी किया।

तेल के बढ़े दाम से, साउथ इस्ट एशिया में मलेशिया के महाथिर मोहम्मद ने मलेशिया को तरक़्क़ी करा कर विकसित देश के क़तार में लड़ा खड़ा किया।

*पिछले सदी में चीन के डेंग शियाओपिंग को चीन और दुनिया कई शताब्दीयो तक याद रखे गी। 1978-1990 मे डेंग ने चीन के तरक़्क़ी की नींव रखी। आज जो चीन दुनिया का सुपर पावर बन कर दुनिया में उभरा है, उस का सारा सेहरा डेंग शियाओपिंग को जाता है।

2026 के आखिर में, शी जिनपिंग दुनिया की इकॉनमी के 60% नेताओं का एशिया पैसिफिक इकोनॉमिक कोऑपरेशन (APEC) समिट में एक बड़ा डिनर दें गें जिस में दुनिया चीन को 21वी सदी का नया पावर और भरोसेमंद इकोनॉमिक पार्टनर मान ले गी, और 200-300 साल के लिए दुनिया मे एशियाई मुल्कों का उरूज होगा।

NOTE: साल 2026 इस शताब्दी का बहुत महत्वपूर्ण वर्ष होगा क्योकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) दुनिया के चौथी इंडस्ट्रियल रेवोल्यूशन का मुख्य ड्राइविंग फोर्स होगा। इस सदी का अगला 25 साल AI का होगा, Chips का होगा, Energy का होगा, चीन का होगा, तुर्की और मिडिल ईस्ट का होगा।

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