The Post of 10th September 2025
मिडिल ईस्ट मे इसराइल और ट्रम्प आरपार की लड़ाई चाहते हैं मगर GCC कंट्री सीधी लड़ाई नहीं चाहते, क्योंकि सीधी लड़ाई में अमेरिका के सामने टिक नहीं पाएंगे, इसलिए उनका सारा ज़ोर अपने को लड़ाई से दूर रखने पर है, चाहे वह मिस्र ही क्यों न हो।
यह जो 9 सितम्बर (9/9) को क़तर में बमबारी हुई है, यह डोनाल्ड ट्रम्प के approval के बाद हुआ है क्योंकि GCC मुल्क रूस के खिलाफ यूक्रेन जंग में अमेरिका या यूरोप का साथ नहीं दे रहे हैं और न पिछले 9 महीना मे GCC मुल्कों ने यूरोप या अमेरिका में कोई बड़ा investment किया है।
इस वजह कर ट्रम्प और यूरोप चाहता है कि इसराइल के जंग से GCC को लपेट कर इराक़ की तरह अगले 25 साल के लिए बर्बाद कर दिया जाये।मगर GCC इस जंग मे शामिल नहीं होगा और न ही रूस-यूक्रेन जंग मे अमेरिका और यूरोप का साथ देगें चाहे 20-25 हज़ार औरत, बच्चे, मर्द और मर जायें।
नीचे फ्रांस और जर्मनी की अर्थव्यवस्था का ग्राफ़ देखये, जो फ्रांस में एक साल में तीन प्रधानमंत्री को हटाये जाने की वजह बना है।
अमेरिका के तरह फ्रांस का क़र्ज़ भी उस के अर्थव्यवस्था से 114% ज़्यादा हो गया है।जर्मनी जो यूरोप के अर्थव्यवस्था का नाक है उस का क़र्ज़ भी जीडीपी का 62.3% है यानि 50% से ज़्यादा।ऐसे बर्बाद अर्थव्यवस्था से यूरोप और अमेरिका दो जंग एक-दो साल और नहीं लड़ सकता है।
#Note_1: ट्रम्प ने इंटरनेशल सियासत में जो double messages देने की रिवायत क़ायम किया है, उस के नतीजा मे ट्रम्प ने 9/9 का approval देकर blunder कर दिया।
#Note_2: अब GCC के मुल्क चीन और तुर्की से Arms ख़रीदना शुरू करें गें जो US arms industries के ज़वाल की वजह बने गा।
#Note_3: ट्रम्प ने इसराइल को क़तर पर बमबारी की एजाज़त देकर सोवियत संघ के बर्बादी के तरह संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) के बर्बादी का आग़ाज़ किया है। इसराइल भी यही चाहता है, हम नहीं तो, तू भी नही।
اے موجِ دجلہ تو بھی پہجانتی ہے ہم کو
اب تک ہے تیرا دریا افسانہ خواں ہمارا
(اقبال کی نظم “ ترانہ ملَی” کا ایک بند)
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Some comments on the Post
Mohammed Seemab Zaman आज दुनिया के सभी अख़बार ने ट्रम्प के 9/9 approval को blunder कहा है।कल रात से ट्रम्प अपने double messages पर शर्मिंदा हैं और क़तर को यक़ीन दिला रहे हैं कि 9/9 अब दोबारा नहीं होगा।
1973 जंग के बाद GCC मुल्कों को तेल एक हथियार मिल गया था और GCC मुल्क अमेरिका से हथियार ख़रीदने लगे थे।अब GCC मुल्क चीन और तुर्की से Arms & Fighter Jets ख़रीदना शुरू करें गें जिस से ट्रम्प के US Arms Industries को बहुत बड़ा धक्का पहुँचे गा।
तुर्की के Arms Industry पर दो दिन बाद हम अलग से एक पोस्ट करें गें।चीन का तो सब को “आपरेशन सिंदूर” से मालूम ही हो गया है।
Abdul Raheem ट्रम्प ख़ुदको ज़रुरत से ज़्यादा होशियार समझ रहे हैं, डबल मैसेज देकर. बहुत हुआ इनका भी.लेकिन कुछ कर लें, दुनिया आगे बढ़ चुकी है.हमें तो वो visits, deals, gifts याद आ रहे. (though those too, were part of checks and balancing) लेकिन ये फिर से विजिट कराकर, डील ना करने लगें.
- Mohammed Seemab Zaman यह double messages देकर दुनिय को बेवक़ूफ़ समझते हैं। इस ने दो चीज़ इंटरनेशनल सियासत में किया है:
- *double messaging
- *negotiating in front of Press in White House.
Faysal Khan क़तर अपने को डेढ़ शांड़ां समझकर जिन गंदे हाथों में खेल रहा था उसको इसकी सज़ा मिलनी ही थी जो मिल गई, 2011 अरब फसादिया के बाद इन इख़वानी संगठनों को कौन कैसे कहां इस्तेमाल कर रहा है ये किसी से छुपा नहीं था, मगर क़तर और तुर्की अपने नापाक अज़ायम की ख़ातिर इस गंदे खेल मे हैंडलर बने रहे, ये उसी का नतीजा है, ये तो होना ही था।
BM Prasad आज ही तो खबर पढ़ी कि मिडिल ईस्ट के कई धनी मुल्क कई ट्रिलियन डॉलर अमेरिका में इन्वेस्ट को commit किया है!
- Mohammed Seemab Zaman, आप ने कहॉ पढ़ा है? कल Bloomberg में खबर था कि सऊदी अरब अपने $1.2 trillion Sovereign Fund का 80% सऊदी अरब मे invest करे गा और 20% विदेश मे।
- जानते हैं दुनिया का कोई मुल्क यहॉ तक की अमेरिका और चीन भी 1-2 साल मे $1-2 trillion investment नही कर सकता है, economy crash कर जाये गा। सऊदी भी $800 billion 3-4 साल मे invest करे गा।

- Mohammed Seemab Zaman यह बहुत सफ़ाई से narrative परोस देता है। ऐसे इस में इस ने मेरे हिसाब से सही लिखा है।
Shahnawaz Siddiqui जब तक खाड़ी देशों में राजशाही बनी रहेगी, तक तक ये देश अमेरिकी गुलाम बने रहेंगे। एक बार राजशाही खत्म तो अवाम को जवाब देही शुरू। फिर अगर इलेक्शन जीतना होगा तो काम करना होगा, लफ़्फ़ाज़ी नहीं।
Mohammed Seemab Zaman, BM Prasad साहेब, this is today Graphic presentation on France 24 TV


