Post of 13 October 2025
1990 मे सोवियत संध के टूटने के बाद, कई अमेरिकी प्रेसिडेंटस ने इसराइल और फ़लस्तीनयों के बीच मार-काट को रोकने की कोशिश किया, जिस मे 1993 और 1995 का Oslo Accords था।
मगर आज का यह समझौता ओस्लो समझौता से अलग एक नया समझौता है क्योंकि इस में फ़लस्तीन राज्य क़ायम करने का समझौता भी शामिल है।प्रेसिडेंट ट्रम्प के 20-सूत्रीय योजना के तहत, अगले चरण में एक तकनीकी सरकार का गठन होगा और ट्रम्प उस के अध्यक्ष होंगें।यह सरकार ग़ज़ा का पुनर्निर्माण करेगी, हमास को निरस्त्र करे गी।5000 फ़लस्तीनी और तुर्की, यूएई, मिस्र की अंतरराष्ट्रीय फ़ौज ग़ज़ा को सुरक्षा प्रदान करे गी, वगैरह वगैरह।
#यह 2025 है, 1973 के बाद की “The New Economic Geography” की बदली दुनिया है, जिस ने अरब मुल्कों के धमकी की वजह कर, अमेरिका (ट्रम्प) और यूरोप के Foreign Affairs Policy को दूसरे जंग अज़ीम (WWII) के बाद बदलने पर मजबूर कर दिया है।
#अरब दुनिया ने 1945 से सस्ता तेल डॉलर ($) में बेच कर अमेरिकी डॉलर को वैश्विक मुद्रा बनाया और अमेरिकी पूंजी बाजारों को वैश्विक वित्त का केंद्र बना दिया।यह दोनों के लिए फायदेमंद समझौता था, मगर पिछले दो साल मे ग़ज़ा में जो “नस्ल-कुशी” (genocide) हुआ वह दुनिया सदियों नहीं भूले गी जिस का ज़िम्मेदार ट्रम्प का अमेरिका है।
#फ़लस्तीन और ग़ज़ा के लोगों ने पिछले 80 साल मे मार-काट और संघर्ष के अलावा और कुछ नहीं देखा है मगर यह समझौता मुस्तक़बिल के अमन के लिए छोटी शुरूआत है, जो पहले कभी नहीं हुआ। किसी को भी यह नहीं सोचना चाहिए कि यह सब आसान होगा क्योंकि दुनिया भर के फ़िलिस्तीनी और मुस्लिम यह देखना चाहेंगे कि क्या ट्रम्प, अमेरिका और इसराइल मिडिल ईस्ट में Permanent Peace चाहते हैं या वह नस्ल-कुशी ही इसराइल के सुरक्षा की गारंटी समझते हैं।
#NOTE: *तारीख़ मे रूस तो यूरोप के लिए हमेशा परेशानी की वजह रहा है।मगर चीन अपनी 1.4 billion आबादी, बुद्धिजीवियों, BRI तथा आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (AI) से पश्चिमी देशों ख़ास कर अमेरिका के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती सैकड़ों साल के लिए बन गया है।
*सनद रहे, अब अरब मुल्कों में चाइनीज़ ज़बान मैंडरिन (Mandarin) स्कूलों में पढ़ाया जा रहा है।सऊदी अरब के रेयाद अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर अरबी, अंग्रेज़ी के एलावा मैंडरिन में भी सूचनायें लिखी देखी जा रही हैं।
https://www.youtube.com/watch?v=aS0tr39Xpus
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Comments on the Post
Mohammed Seemab Zaman आज मिस्र के शहर शरम अल शेख में मिडिल ईस्ट, इंग्लैंड, फ्रांस, कैनेडा और अमेरिका के राष्ट्राध्यक्षो की मौजूदगी में “20 points Peace Agenda” पर दस्तख़त होगा। तारीख़ में यह एक यादगार दिन होगा जो इस बदली दुनिया में अमेरिका और अमेरिका के 51st State के मुस्तक़बिल (future) का फ़ैसला करेगा।
बाक़ी तो वक़्त बताये गा यह कब और कैसे होगा?
Abdul Bari यह पहली बार हो रहा है जब फिलिस्तीन मुद्दा एक international मुद्दा बन गया जिसमें इजरायल के साथ साथ दुनिया के बहुत सारे देश टेबल पर होंगे जब कि इससे पहले जो भी डील हुई वोह अमेरिका में एक बंद कमरे के अंदर बैठाकर पेपर पढ़ दिया गया जिसे इजरायल ने कभी भी नहीं माना ।
सवाल बहुत कुछ है लेकिन ………PresidentTrump ने इशारा किया है वो अब इजरायल का ऐड बंद करने वाले है जो एक बहुत बड़ा कदम होगा मिडिल ईस्ट में शांति के लिए दूसरी वहां पे जो पीस कीपर होगे उनमें तुर्की की फौज यह एक तरह से टर्की और एरडोगन डिप्लोमेसी की बहुत बड़ी जीत है । मैं हमेशा लिखता था दुनिया की नई geopolitics वोह गाजा से निकलेगी आज लोगो को दिखना शुरू हो गया
- Mohammed Seemab Zaman, Abdul Bari साहेब, अभी चंद मिनट पहले टीवी पर live नहीं देखा जब ट्रम्प इसराइल एयरपोर्ट पर उतरे तो नेतनयाहू से हाथ नहीं मिलाया, सिर्फ़ इसराइल के प्रेसिडेंट और उस के बीवी से हाथ मिलाया।
Kamil Khan ये पीस डील अरबों ने भविष्य को ध्यान में रख कर बनाई है, और आप की पोस्ट भी कुछ ऐसा ही इशारा कर रही है वरना फिलास्तीन इजराइल ट्रम्प अमेरिका अरब तुर्क के बीच के समझौते में आप चीन का ज़िक्र क्यों करते, मतलब साफ़ है जो कमज़ोर होगा वो धीरे धीरे दबाया जायेगा,
- Mohammed Seemab Zaman, Kamil Khan साहेब, आप ने इस पोस्ट की बारीकी को समझ लिया, शुक्रिया। हम उस वक्त चीन पर पोस्ट लिखते थे जब लोग चीन को पहचानता नहीं था। जब लोग पहचान गया तो लिखना छोड़ दिया। पिछले 20-25 साल मे चीन और अरब ने बहुत Patience के साथ धीरे धीरे दुनिया बदल दिया, जिस का ट्रम्प और यूरोप को एहसास हो गया।
- आज शरम अल शेख में शाम में बदली दुनिया का तमाशा देखये गा।
