Post on 27th JUne 2025
*1973 तेल संकट द्वितीय विश्वयुद्ध (WWII) के बाद पश्चिमी देशों द्वारा बनाये World Order के ताबूत में पहली कील (Nail) ठोकी।
*पश्चिमी वर्ल्ड ऑर्डर के ताबूत में दूसरी सब से “घातक कील” 9/11 की घटना ने ठोकी मगर पश्चिमी देश अपने नशे में चूर आतंक, मार-काट, मानवाधिकार, एलजीबीटी, जलवायु प्रदूषण का ढोंग रच कर मिडिल ईस्ट को घेरने की कोशिश करते रहे।
*9/11 के बाद, राष्ट्रपति बुश ने ईरान को 28 जनवरी 2002 को Nuclear Power की अनुमति दिया और 2003 में गल्फ-वार कर ईराक़ पर बमबारी कर इराक़ को पचास (50) साल पीछे कर दिया। सद्दाम को हटा कर पूरे ईराक़ को बर्बाद कर दिया और 2004 मे PLO के यासीर अराफ़ात को भी मार दिया।
*सद्दाम के कत्ल से ईरान के शुभचिंतक बहुत ख़ुश हुऐ।ईरान के आलोचकों को बड़ी राहत मिली के ईरान तो 1979 बर्बाद था ही, अब इराक़ भी बर्बाद हो गया।
इराक़ के बर्बादी के बाद अमेरिका के गर्लफ़्रेंड ने 2003 के बाद “New Middle East” का नारा लगा दिया।मगर सद्दाम और अराफ़ात के क़त्ल ने मिडिल ईस्ट में क्षेत्रीय उथल-पुथल को ख़त्म नहीं किया।
ईरान ने अमेरिका के शह पर पूरे मुस्लिम दुनिया मे आतंकी प्रोक्सी को मज़बूत किया। 2006 मे इज़राइल-हिज़्बुल्लाह युद्ध हुआ जिस में हिज़्बुल्लाह पिट गया और हमास पैदा हो गया मगर अरब देश चुप रहे और शांति के साथ तरक़्क़ी करते रहे।
अमेरिका के 2008 के “आर्थिक संकट” के बाद आशिक-गर्लफ़्रेंड ने “अरब स्प्रिंग” कर मिडिल ईस्ट मे शांति नही होने दिया। मगर अरब जगत भी अपनी Geopolitical game को नया जामा पहना दिया (मुखतसर मे मेरा 13 October 2019 का पोस्ट नीचे पढ़ें।)
#NOTE: तीसरी कील 2021 मे फॉल ऑफ काबुल के रूप मे हुआ। चौथा और सब से ख़तरनाक कील 2022 में रूस-यूक्रेन जंग रहा। पाँचवाँ 2023 को इसराइल-प्रतिरोधी ताक़तों का मार काट रहा और अब तक 55,000 लोगों को मार दिया गया।
अंततोगत्वा 10 June 2025 को अमेरिका-ईरान का मिसाइल्स-ड्रोन जंग शुरू हुआ और आशिक-गर्लफ़्रेंड ने ईरान के न्यूक्लियर प्लांट पर बमबारी कर World Order के ताबूत में आखरी कील ठोक दिया। जिस का नतीजा है कि “Trump the confused.com“ हर घंटे घंटा confuse होकर नया नया statement देकर अपनी को ताबूत से निकालना चाहते हैं जो असम्भव है।
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PRESIDENT PUTIN ON STATE VISIT TO SAUDI ARABIA ON MONDAY (Post of 13 October 2019)
1938 मे स्टैलिन द्वारा सऊदी अरब मे रूस के राजदूत करीम खाकीमोव को फॉसी देने के बाद सऊदी अरब ने रूस का दूतावास बन्द कर दिया, जो 1992 मे फिर खुला और राष्ट्रपति पुटीन ने 2007 मे पहली बार सऊदी अरब का दौरा किया। और फिर शाह सलमान 2017 मे मॉस्को गये और सम्बन्ध सुधरने लगा।