Post of 26 September 2025
कज़ाखस्तान के आरक्लोजिस्ट (Archaeologists) ने शक (Saka) जो सेंट्रल एशिया के ख़ानाबदोश लोग थे उन की सभ्यता का 2,800 साल पुराना सोने का ख़ज़ाना खोज निकाला है। शक लोग Samaritans के समय के आस पास के थे और महात्मा बुद्ध और चीन के कन्फ़्यूशियस के पहले 600-700 BC के प्राचीन सभ्यता में से एक थे।
इस ख़ज़ाना मे 3,000 से ज़्यादा चीज़ें हैं, जिनमें सोने की गाय के बछड़े, घंटियाँ, धागों से जड़े सोने के हार, बर्तन, जंजीरें, कीमती पत्थरों से जड़े हार, सोने की सजावट और कपड़ों से जुड़े मोती।यह खज़ाना शक जाति के Elites (कुलीन वर्ग) के दफ़न किये हुऐ लोगो का बताया जाता है।
शोधकर्ताओं के अनुसार, शक लोग ख़ानाबदोश के साथ साथ बहुत अच्छे युद्धा (Warriors) भी थे और बहुत सुंदर सभ्यता थी। बाद में यह लोग कैस्पियन समुद्र (Caspian Sea) के किनारे बस गये जो आज के कज़ाखस्तान देश से सटा है।
इस तरह के प्राचीन सुंदर आभूषण अब तक प्राचीन मिस्री सभ्यता तथा सूडान के एलाक़े में बहुतायत पाये गये हैं।सोना अफ्रिका के देश सूडान से ही निकला है, जिस को बाद में मिस्री सभ्यता के कुलीन वर्ग ने अपना लिया।
#NOTE: प्राचीन भारत के सभ्यता का इस तरह का कोई ख़ज़ाना नहीं मिलता है।सिंधु घाटी सभ्यता का मिट्टी और लकड़ी का सामान मिला है या सम्राट अशोक के समय का वैशाली, बिहार में कुछ पुरानी चीज़ें मिली हैं जो पटना और बोद्ध गया के संग्रहालय में रखी नज़र आतीं हैं मगर इस तरह का सुंदर आभूषण कभी नहीं मिला।
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Some comments on the Post
Shalini Rai Rajput शकों के भारत आगमन की दो खेप में आने का जिक्र मिलता है। हिमालय क्षेत्र में खस जाति निवास करती है जिसे शकों से ही जोड़कर देखा जाता है । पहली खेप जब भारत के हिमालई क्षेत्र में आई वही खस जाति है जिन्होंने यहां के हरे भरे क्षेत्र का उपयोग अपने पशुओं के लिए उपयुक्त समझा। मेरा अपना मत है बुद्ध भी खस या शक जाति से ही आते थे। ये निश्चित ही आर्य जाति से भिन्न थे। इनमें वर्ण व्यवस्था नहीं थी। इन्हें शुद्र की श्रेणी में कहा गया । बाद में शक आए पहली शताब्दी के बाद दूसरी खेप ।
- Mohammed Seemab Zaman कहा तो जाता है कि शक आर्य थे मगर हम को भी doubt है, इस वजह कर हम ने नहीं लिखा। यह जान कर ताज्जुब हुआ कि बुद्ध खस या शक जाति से थे। हम तो जानते थे कि यह “सिंधु घाटी” से पलायन कर जो लोग नोर्थ में गये, उसी से बुद्ध थे।नोर्थ में चूँकि हिमालय के वजह कर नदियाँ बहुत थी इस वजह कर लोग बसते गये। हम तो यह जानते थे कि बुद्ध क्षत्रिय थे और राजा ख़ानदान से थे मगर आप कह रही हैं कि शुद्र थे, ताज्जुब है।
- Shalini Rai Rajput, Mohammed Seemab Zaman साहेब, पहले शाक्य वंश को शुद्र कहा जाता था। संभवतः उनके शक मूल का होने के कारण ही । दरअसल जो भी आर्यों की वर्ण व्यवस्था से बाहर थे उन्हें सम्मिलित करते समय शूद्र की श्रेणी में ही रखा गया। मगर बाद में बुद्ध को भी विष्णु का अवतार घोषित किया गया तब उन्हें क्षत्रिय कहा गया।
Hisamuddin Khan शानदार धरोहर। इतना बढिया लोहा ढालना उसको नुकीला करना उस पर टेम्पर रखना या फिर सोने की गाय की इतनी उम्दा ढलाई बडी हुनरमंदी का काम है। मै इस लिये कह सकता हूं कि यह सारे काम मुस्लिम हुनरमंदी की कभी जीनत रहे हैं और मैने करीब से देखा है। जबरदस्त है जनाब, 2800 बरस पहले के हुनरमंद भी गजब के थे। अफसोस आहिस्ता आहिस्ता यह सब हम ने खो दिया।
Bheem Singh Gill गाय का बछड़ा ही बहुत है इनके लिए, आप देख लेना इस पोस्ट से चोरी करके वाट्स ऐप पर चला देंगे, सनातन कितना विशाल और पुराना है वहां भी गाय माता को पूजा जाता था गाय माता की सोने की मूर्त मिली है,
- Mohammed Seemab Zaman, Bheem Singh Gill साहेब, आप ने सही लिखा यह फिर वाट्स ऐप पर चला दें गी हम कज़ाखस्तान तक फैले थे मगर यह कभी नहीं कहें गें कि बछड़ा की पूजा इसराइलीयों ने शुरू किया और हम वहॉ से लेकर आये।
Syed Imran Balkhi Very informative more such exposure is required. The world existed much beyond the imagination and claim of sangheetkari propagators. The world needs the higher study of Egyptology.
Tanvir Khan भारत में खोजकर्ता पुरानी सभ्यता नहीं बल्कि गुजरात मे डूबी हुई द्वारका नगरी और उत्तर भारत मे मस्जिदों के नीचे मंदिर खोजते हैं.
- Mohammed Seemab Zaman यह मस्जिद के निचे मंदिर ही खोजते रह गये मगर भारत में जो मंदिर नज़र आता है वह सब इस्लाम आने के बाद 700 AD के बाद बना है। उस के पहले बोद्ध विहार था या स्तूपा था


