4th December 2025
प्रेसिडेंट शी जिनपिंग के मुताबिक, चीन अच्छी तरह जानता है कि technology ही साम्राज्यों के उत्थान और पतन को तय करती रही हैं। शी जिनपिंग ने कहा है कि 19वीं सदी में चीन opium wars (1839-42 & 1856-1860) के कारण इंडस्ट्रियल रेवोल्यूशन के टेक्नोलॉजिकल बदलावों से पीछे रह गया मगर आज artificial intelligence (AI) में चीन बहुत आगे की सोंच रहा है।
अगले साल 2026 मे चीन अपने Five-year plan मे AI को स्ट्रेटेजिक डॉक्यूमेंट मे शामिल करे गा, जिस को वह अगले दस साल मे तीन स्टेज में लागू करे गा:
*पहला, 2027 तक AI का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर research, industrial processes, consumer products, healthcare and education वगैरह मे करे गा,
*दूसरा, 2030 तक, AI चीन में बिजली या इंटरनेट तरह आम हो जाएगा, और इकोनॉमिक ग्रोथ का एक बड़ा ड्राइवर बन जाएगा,
*आखिर में, चीन 2035 तक एक “intelligent society” (इंटेलिजेंट सोसाइटी) बन जाएगा, जब AI culture और इंसानों के बीच बातचीत को बदल देगा, ठीक वैसे ही जैसे इंटरनेट ने किया था।
20वीं सदी में सऊदी अरब natural resources से भरपूर था और 21वीं सदी में भी सऊदी अरब प्राकृतिक संसाधनों से भरा पड़ा है।
सऊदी अरब के पास दुनिया का सभी प्राकृतिक उर्जा स्रोत मौजूद है, चाहे वह तेल हो, गैस हो या सूरज की रौशनी हो, या यूरेनियम हो। आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस रेवोल्यूशन के लिए ऊर्जा सब से महत्वपूर्ण है जो दुनिया में किसी भी देश के पास अतिरिक्त ऊर्जा मौजूद नहीं है चाहे वह अमेरिका हो या जापान या यूरोप।
यही कारण है कि ट्रम्प कहते हैं कि सऊदी अरब भविष्य का AI का Capital होगा।कहा जा रहा है कि अमेरिका और यूरोप की कम्पनीयॉ अपना AI data servers सऊदी अरब में बनाये गें और अपने यहॉ इस्तेमाल करें गें।
सऊदी अरब ने अपनी AI कम्पनी HUMAIN बना लिया है जो अरबी ज़बान में अपना AI Model बना चूका है।अमेरिकी कम्पनी Nvidia के चिप्स से सऊदी अपना AI data server बन रहा है। 2030 तक सऊदी अरब अपने तेल की कम्पनी Aramco को AI technology से जोड़ कर जियो-इकोनॉमिक ग्रोथ को एक नई दिशा दे देगा।2035 तक AI के वजह कर सऊदी अरब की पूरी अर्थव्यवस्था बदल जाये गी।
NOTE: China and Saudi Arabia will be two Kings of Artificial Intelligence Geo-economy by 2035.