Post on 30th July 2025

*1990 के दशक से, पिछले 30 साल मे चीन ने infrastructure (रोड-रेल-हाईवे-बंदरगाह) का अपने मुल्क मे दुनिया का बेहतरीन जाल बिछा कर दुनिया के इतिहास का सब से बड़ा manufacturing hub बना दिया; सस्ता खिलौना से लेकर चप्पल-जुता, कपड़ा से लेकर लेदर जैकेट, मोबाईल फ़ोन से लेकर स्मार्ट फ़ोन, कार से लेकर electric vehicles, सोलर ऊर्जा से लेकर लिथियम बैट्री, हवाईजहाज़ से लेकर समुद्री जहाज़ आदि इत्यादि हर तरह की चीज़ बना कर आर्थिक विश्वगुरु बन गया।

*2013 के बाद, राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बेल्ट और रोड इनिशिएटिव (BRI) की योजना शुरू कर एशिया और अफ्रिका के 150 मुल्कों के साथ गहरा रिश्ता बना लिया। अब तक चीन ने BRI के तहत $1.3 trillion का निवेश इन मुल्कों में किया जिसमें infrastructure में लगभग $775 billion और गैर-वित्तीय क्षेत्र मे $533 billion शामिल है।

*चीन ने इस साल के पहले छह महीनों में BRI सदस्यों के बीच 176 सौदों के माध्यम से infrastructure में $124 billion के निवेश के स्कीम पर हस्ताक्षर किया है।

*तीस साल बाद, अब चीन दुनिया को अब दूसरा Shock देने जा रहा है। अगले दस साल में चीन आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस, कम्प्यूटर, एलेक्ट्रीक वाहन, सोलर सेल, बैट्री, रोबोट, हवाई जहाज़, न्यूक्लियर एनर्जी तथा सैन्य उपकरण और हथियारों में अमेरिका और यूरोप को बहुत बड़ा शौक दे गा।

*अगले दस वर्षों में, अमेरिका economically & militarily चीन से छोटा हो जाएगा। चीन की बदलती geoeconomic dynamics में टिके रहने के लिए अमेरिका को मिडिल ईस्ट और सेंट्रल एशिया के मुल्कों के साथ मिलकर रहना होगा और काम करना होगा।

#NOTE: हम पिछले दस साल से लिख रहे हैं कि भारत को दुनिया अब दूसरा चीन नहीं बन्ने देगा क्योंकि हमारे बुद्धिजीवियों की आँखें नही “दिल-अंधा” हो गया है।

मेरी ही बात को पिछले हफ़्ता रघुराम राजन ने एक इंटरव्यू में कह दिया कि अब भारत दूसरा चीन नहीं बन सकता है क्योंकि geoeconomic dynamics दुनिया का बदल गया है।

राजन मैनुफैक्चरिंग सेक्टर से नाउमीद हो गये हैं और अब वह low-grade-skills (बढ़ई, पलमर, एलेकट्रीशियन, पंचर बनाने की तकनीक आदि) develop करने की बात कह रहे हैं ताकि लोगों को रोज़गार मिले।
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Some comments on the Post
Mohammed Seemab Zaman सब कुछ पिछले बारह साल मे हमारे बुद्धिजीवियों के “अंधे दिल” के वजह कर लुट गया।हमारे शर्मा जी, प्रोफेसर स्वामी जी, प्रोफेसर अभय दुबे जी, भारत रत्न मुखर्जी जी वगैरह के “अंधे दिल” ने भारत माता को 21वी शताब्दी में अंधकार में घसीट कर ले गये। लेकिन जो हुआ वह अच्छा हुआ वरना बहुत अफ़सोस होता की संघ की सरकार नहीं बनी वरना हम लोग विश्वगुरु हो जाते।एक चीज़ याद रखिये गा दुनिया का जो geopolitical और geoeconomic dynamics बदला है उस मे हमारे यहॉ की “अंधे दिल” वाले का बहुत बड़ा योगदान है।

Kamil Khan मुझे सगीना फिल्म का गाना याद आ रहा, जहाँ एक शराबी दिलीप कुमार गा रहा था , आग लगी हमरी झुपड़या मे, हम गायें मलाहर, देख भय्या कितने तमाशे की जिंदगानी हमार

कबीर विद्रोही इस देश के संघी और सवर्ण हर बात पर आरक्षण को दोष देते है और हर इंस्टीट्यूट पर कम अक्ल मोटी खाल वाले अक्षम और नकारा सवर्ण कब्जा जमा लेते है। फिर शुरू होती है इंस्टीट्यूशनल गुंडई, भाई भतीजा वाद। जिसके द्वारा शिक्षा, स्वास्थ्य, तकनीकी, वैज्ञानिक शोध सबका कबाड़ा करके मंत्रों की शक्तियों का आडंबर फैलाया जाता है। तो फिलहाल तो ये देश विश्वगुरु ही बनेगा

Vinod Sardana बात तो सही है, भले ही बुरी लग रही है.. अंधे दिल वालों ने दिमाग को तिलांजलि दी , उसी दिन यह भविष्य होना तय हो गया था

Salman Siddiqui बिलकुल दुरुस्त तजज़िया! चीन ने जिस तरह से ‘state-led capitalism’ और ‘strategic planning’ को combine किया है, वो सिर्फ़ इंफ्रास्ट्रक्चर या मैन्युफैक्चरिंग नहीं, बल्कि एक long-term geopolitical chessboard पर चाल चलने जैसा है। AI, green energy, और advanced robotics में जो टेक्नोलॉजिकल leap वो लेने जा रहा है, वो सिर्फ़ ‘प्रोडक्ट’ नहीं, बल्कि ‘सिस्टम’ एक्सपोर्ट करने की तैयारी है। भारत को अब सिर्फ़ ‘जुगाड़ू स्किल्स’ नहीं, बल्कि एक ठोस इंडस्ट्रियल और साइंटिफिक विज़न चाहिए, वरना हम सिर्फ़ वैश्विक सप्लाई चेन के उपभोक्ता बनकर रह जाएंगे।

Gurpreet Singh पिछले सात आठ सालों से आपको पढ़ रहा हूं और आपकी कही बातें आज सही साबित होती दिख रही हैं। जिओपॉलिटिक्स में जैसे बदलाव आज होते दिख रहे हैं, कुछ साल पहले तक उनकी कल्पना भी कोई नहीं कर सकता था।

Bibhas Kumar Srivastav बिलकुल सही