The Post of 18 February 2026
दो दिन पहले हम ने लिखा था कि दिल्ली में जो चार दिन का AI Summit हो रहा है वह “भारतीयों के ऑंख मे संघ की सरकार धूल झोंक रही है”
आज सुबह लंदन का पत्रिका The Economist ने एक लम्बा चौड़ा लेख छापा है जिस में लिखा है कि भारत तो AI ग्लोबल समिट होस्ट कर रहा है मगर “भारत AI मॉडल डेवलप करने की दौड़ में एक रोड पर खड़ा तमाशाई (दर्शक) है।”
उस ने WEF (Davos) मे बुद्धिजीवियों के एक पैनल पर IMF की MD Kristalina Georgieva द्वारा भारत को “second-rate AI power” कहे जाने के तज़कीरा से लेख शुरू किया है।
एकोनोमिस्ट पत्रिका ने यह भी लिखा है कि जो मुल्क एक कम्प्यूटर नहीं बनाता है वह AI चिप्स बनाने का ख़्वाब देख रहा है। उस ने लिखा है कि विदेश से लोग आये मगर भारत मंडपम मे WiFi नहीं था, लोगों का सामान चोरी हो गया, लम्बी क़तार थी, अफ़रा-तफ़री का माहौल था।
#NOTE: हम हमेशा लिखते हैं कि भगवान की अल्पसंख्यक समाज पर बहुत कृपा है कि “संघ की सरकार” बन गई वरना बहुसंख्यक समाज को बहुत अफ़सोस रह जाता कि संघ की सरकार नहीं बनी या वल्लभभाई पटेल भारत के प्रथम प्रधानमंत्री नही बने वरना हम लोग #विश्वगुरु हो जाते।
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Some comments on the Post
Mohammed Seemab Zaman हम हमेशा लिखते है कि 12 साल में संघ की सरकार ने 140 करोड जनता के लिए एक computer नही बनाया या एक Mobile Made in India नही बनाया वह हम लोगो को विश्वगुरु बन्ने का ख्वाब देख और देखा रहा है। मेरी ही बात The Economist ने आज लिख दिया कि जो मूल्क एक computer नही बनाता है वह AI या chips बनाने का ख्वाब लोगो को देखा रहा है। यह लेख इस सप्ताह के issue मे छपे गा और पूरी दुनिया पढ ले गी।
- Sajid Aftab, Mohammed Seemab Zaman आपकी तहरीर अक्सर हक़ीक़त पर मबनी होती हैं।
- Mohammed Seemab Zama, Sajid Aftab साहेब, हम social media पर दूसरों के तरह कोई narrative नही बनाते हैं बल्कि जो सच खबर होती है वही लिखते हैं। यह जो सम्मेलन हुआ है वह बहुसंख्यक समाज के ऑंख मे धूल झोंका जा रहा है। जिस मूल्क की राजधानी दिल्ली मे लोगो को 24 घंटा बिजली नही मिलती है, जो 140 करोड के लिए एक Mobile या computer नही बना सका, वहॉ के लोगो को AI Server लगाने का ख़्वाब देखाया जा रहा है।जनाब फ्रांस के पास AI के लिए बिजली नही है, भारत तो अभी बहुत पिछे है। Note: आप #अक्सर लिखा है, आप भी मेरे पोस्ट को तफरीहन पढ़ते हैं क्या?
Abdul Raheem Energy security के बिना AI, या data centres की बात कैसे हो सकती है?! इसके अलावा, The Economist के article में लिखा है कि, “Delegates complained about three-hour queues, heavy-handed security and no Wi-Fi. Every founder who attended left embarrassed.” और ‘Impact’ की जगह ‘Safety’ होना था. बाक़ी, AI generated call से scam भी शुरु हो गये. कल ही हमारे पास ऐसी एक कॉल आयी थी.
Faisal Mohammad Ali یوں ہوتا تو کیا ہوتا لیکر لکیر پیٹتے رہ گۓ اور کارواں گزر گیا
- Mohammed Seemab Zaman کارواں تو ایسا گزرا کے اگلے پچاس سال تک بھٹکتے رہیں گے۔
Abdul Bari हमने कल जो चाइना के कुत्ते के गले में अपना पट्टा पहनाया था वोह एक शर्मिंदगी का बायस बन चुका है अब तो कोई AI SUMMIT का अगर नाम भी ले रहा है तो वह चाइना वाला कुत्ता सामने आकर खड़ा हो जा रहा है । पिछले कुछ सालों में तो हमारे यहां बिल्कुल से वैज्ञानिक सोच ही खत्म कर दी गई है ऐसा लगता है जैसे यह जान बूझ कर किया गया है । चलो कम से कम यह तो है कि हम इसी बहाने कट्टर तो बन गए ।
Kamal Siddiqui आपकी कही बात सच हो रही हैं, थोड़ा समय लग रहा है। जो भी हो रहा है सही हो रहा है। भगवान् से प्रार्थना है मोदी जी को लंबी आयु दे।
- Mohammed Seemab Zaman, Kamal Siddiqui साहेब मेरी कही बात सच हो रही है, शुक्रिया। हॉ वक्त तो लगे गा ही, क्योकि बहुत सारा unseen factors सामने आ जाता है, जो देर कर देता है।
Aquil Ahmed ऊपर से chinese रोबोट का प्रदर्सन अपने लेबल के साथ
,पता नही global exibition में ऐसा करने की हिमाकत करने का आईडिया किसका था …सायद भुल गए होंगे वहां काल्पनिक विश्वगुरु के दर्शक ही नही आने वाले , पूरा globe की नजर है.

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