Post on 16 August 2025

Islam Hussain साहेब ने कल “मुस्लिम शासकों की शानदार इमारतें और भक्तों की अनलिमिटेड बेवकूफियां!” पर एक पोस्ट अफ़ग़ानिस्तान के मज़ार ए शरीफ की मस्जिद और मक़बरा की तस्वीर के साथ पोस्ट किया था।

इस्लाम साहेब ने लिखा कि “अक्सर शाखा ज्ञानी यह कहते रहते हैं कि मुस्लिम शासकों ने यहां कैसे ताजमहल वगैरह बनाई है, भारत के बाहर कोई इमारत नहीं बनाई। तो यह पोस्ट उनके लिए और उनके समर्थकों के लिए है।”

*यह कोई नई बात नहीं है, मेरे बड़े भाई को 45 साल पहले बिहार के दलित नेता राम विलास पासवान ने कहा था कि मुग़ल सल्तनत रही मगर तुम मुसलमानों ने पढ़ा-लिखा क्यों नही? मेरे बड़े भाई ने उन को उसी वक्त जवाब दिया था कि “ताजमहल क्या बेगै़र पढ़ें लिखा बन गया, आप बहुत पढ़े लिखे हैं तो दूसरा ताजमहल सौ साल में बना कर देखा दिजये”

*अक्सर शाखा ज्ञानी यह कहते और लिखते आये हैं कि मुस्लिम शासकों ने हमारे हिन्दु प्राचीन इतिहास को जला कर बर्बाद कर दिया।बिहार के नालंदा विश्वविद्यालय के बारे में भी यही बात बोलते हैं मगर संघी लोगों को पता नहीं है कि नालंदा के पहले तक्षशिला विश्वविद्यालय बना जो आज पाकिस्तान में है जिस को वह बचा कर रखे हैं।अफ़ग़ान के “बामयान” की पहाड़ियों पर तो बुद्ध की पचासों मूर्ती और स्तूपा को चंगेज़ ख़ान ने 1221 में काबूल पर हमला कर तबाह कर दिया।चंगेज़ ख़ान ने लाखों मुस्लिम को मारा और हज़रत बाबा फरीद गंज शकर जिन के 112 अश्लोक (शेर) गुरु ग्रंथ साहेब में हैं उन के परदादा और पूर्वजों को भी शहीद कर दिया था, मगर कोई संघ के लोग यह नहीं बोलते या लिखते हैं।

*संघ के इतिहासकार मिस्र जा कर देखें कैसे अपनी 7000 साल पुरानी सभ्यता को मिस्री संजोगे हैं और गर्व के साथ इस्लाम के 1400 साल बाद भी अगले हज़ारों साल के लिए बचा कर रखने के लिए 20 साल मे $1 billion का Grand Egyptian Museum बनाया है जिस मे 400 Architects ने 2002 से काम किया है।

*शाखा धारी लोगों से मेरी प्रार्थना है कि वह मिस्र जा कर मंदिर और प्राचीन भगवान, देवी, देवताओं पर शोध करें और सच्चाई भारतीय नवजवानों को बतायें।मिस्र में इस्लाम आने के 1400 बाद आज भी शिव जी और उन की पत्नी की मूर्ती और मंदिर मुस्लिम शासकों ने बचा (preserve) कर रखा है।

दुनिया का सब से पुराना सूर्य मंदिर आज भी मिस्र में मौजूद है जबकि भारत में कोनार्क मंदिर 1200AD के बाद बना।भारत में मंदिर 716AD के बाद बन्ना शुरू हुआ।बौद्ध गया में महाबोधि मंदिर जो आज नज़र आता है वह भी 700 AD में बना।

#NOTE: नीचे कुछ तस्वीर हम ने “Grand Egyptian Museum की दिया है जो दुनिया का Largest Archeological Museum (500,000 sq meters) है, जहॉ मिस्री सभ्यता का 7000 साल प्राचीन एक लाख से ज़्यादा पुरावशेष और कलाकृतियॉ (artefacts) रखा गया है। यह तस्वीर हम ने France 24 TV के बनाये documentary से लिया है।
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Some comments on the Post
Mohammed Seemab Zaman कल हम ने Islam Hussain साहेब के पोस्ट पर यह कौमेंट लिखा था “बुखारा, समरकंद और दूसरे शहरों में आज भी बहुत सारी ऐसी ऊँची ऊँची इमारतें हैं कि चंगेज़ खान देखकर खुद हैरत में पड़ गया था और आपने लोगों को उस को बर्बाद करने से रोक दिया।
इतिहास में लिखा है चंगेज़ खान ने कहा कि यह अद्भुत है नहीं तोड़ो। हम सब देख कर आये हैं। सोवियत संघ ने भी नहीं तोड़ा मगर maintain नहीं किया। आज सौ साल बाद फिर सब को renovate कर original शक्ल दे दिया गया है। मेरा बहुत सारा पोस्ट 2018-19 मे उज़बेकिस्तान पर है।
अभी संघ के बुद्धिजीवी सऊदी अरब, दुबई और क़तर जा कर वहॉ बने विश्वविद्यालय, रोड, हाईवे, म्यूज़ियम या शोध संस्थाओं में हो रहे शोध को जाकर देख लें।
ट्रम्प अभी दो महिना पहले जब मिडिल ईस्ट गया था तो हैरान हो गया वहॉ की तरक़्क़ी देख कर।मुस्लिम के 1400 साल पुराने इतिहास का फिर Golden Time 1886 के बाद आ गया है।

  • Javid Ikbal, sir hamne kuch din pahale hi Uzbekistan par taswiro ke saath ek post ki thi waha ki purana masjid madrasa makbare dikhaye ke liye. Aaj kal to china bhi bahot post karwa raha hai waha ki purana badi badi khubsurat masjido aur muslim Gao ki
  • Azaz Siddiqui “बुखारा, समरकंद और दूसरे शहरों में आज भी बहुत सारी ऐसी ऊँची ऊँची इमारतें हैं कि चंगेज़ खान देखकर खुद हैरत में पड़ गया था और आपने लोगों को उस को बर्बाद करने से रोक दिया। इतिहास में लिखा है चंगेज़ खान ने कहा कि यह अद्भुत है नहीं तोड़ो। हम सब देख कर आये हैं। सोवियत संघ ने भी नहीं तोड़ा मगर maintain नहीं किया।विस्तार से लिखिए sir
  • Nadeem Khan Sir यही जज़्बा मायूस नहीं होने देता था ख़ैर अब तो गोल्डन टाइम दस्तक दे ही रहा है बस अंधे हो चुके दिलों में जल्द रौशनी आजाये तो अपना भारत में सुंदर बने यही इक तमन्ना।
  • Imran Khan sir kuch log yaha mandir 700 ad se pehle ka bhi batate hai, ye kaha tak sahi kya koi or evidence hai kisi or souces se ki pehle bhi koi mandir bana ho?

Salman Siddiqui समरक़ंद, बुख़ारा, इस्तांबुल, काहिरा, फ़ेज़, दमिश्क़ ये सिर्फ़ शहर नहीं बल्कि पूरी इंसानी तहज़ीब के जिंदा म्यूज़ियम हैं. चंगेज़ ख़ान जैसा दरिंदा तक जब इन इमारतों को देखकर रुक गया, तो सोचिए इनकी हैरतअंगेज़ इंजीनियरिंग और आर्किटेक्चर का क्या दर्ज़ा होगा और यह भी सच है कि सोवियत दौर ने इनको संभाला नहीं मगर मिटाया भी नहीं। आज मुस्लिम दुनिया इन्हें renovate करके फिर से असल शक्ल में ला रही है यही असली ‘heritage preservation’ है.जहां तक अरब की बात है, सऊदी अरब, दुबई, क़तर आज की दुनिया के Innovation Hub हैं। वहां की universities, research centres, metro systems, airports, highways देखकर कोई भी ईमानदारी से कहेगा कि मुसलमानों का ‘Golden Time’ फिर लौट रहा है.यही वजह है कि ट्रम्प जैसे वर्ल्ड लीडर तक दंग रह गए मिडिल ईस्ट की तरक़्क़ी देखकर. 1400 साल पुराना इतिहास और आज का नया दौर दोनों गवाही देते हैं कि मुस्लिम उम्मत ने जब चाहा, पूरी दुनिया को साइंस, आर्ट, आर्किटेक्चर और कल्चर का लीडर बना कर दिखाया है.

Sanjay Nagtilak सर, मुस्लिम शासकों ने ब्राह्मण और मुस्लिम को शिक्षा दिई उन्होंने दुसरा ताजमहाल क्यों नहीं बनावाया? खैर छोडिए आप जिसे गले लगाया, दरबार में उंचे आसन पर बिठाया, रामायण, महाभारत फारसी में अनुवाद किया आज वो सभी मुस्लिम शासकों को दिन रात गाली दे रहे हैं, दलितों को जितना हिंदू शासकों ने सताया उतना मुस्लिम शासकों ने फिर भी किसी के खिलाफ खुल कर बोलते नहीं, और एक बात चंगेज खान ने किसी बुद्ध मूर्ति को उद्ध्वस्त करने का जिक्र नहीं हैं, हा तालिबान ने भगवान बुद्ध की मूर्तियों पर बॉम्ब बरसाए उसकी सजा उन्हें मिली.
जो भी कौम अपने पूर्वजों की निशाणी मिटाता हैं उसे कोई ना कोई सजा मिलती हैं, भारत, पाकिस्तान, अफगाणिस्तान और बांगलादेश ने अपने पूर्वजों की निशाणी मिटाई हैं उसकी सजा उन्हें हजारों साल से मिल रही है और आगे भी मिलती रहेगी. #इंडोनेशिया को देख लीजिएगा मुस्लिम बहुल देश होने के बाद भी वो अपने पूर्वजों की निशाणी नहीं मिटाता.

  • Mohammed Seemab Zaman, आप ने सही कहा कि जिस ने सब से ज़्यादा मुस्लिम के साथ एक ही थाली में खाना खाया -, वही आज मुस्लिम का सब से बड़ा दुश्मन है। उत्तर प्रदेश मे शहजादा सलीम को देखये। लेकिन जानते हैं सब का दिल मे रौशनी ख्तम थी। सोचये राम विलास पासवान ने 1980 में मेरी भाई को करपूरी ठाकुर के घर पर यह बात कही और 42 साल बाद शाखा में लाठी पटकते मरे।दूसरी बात सही इतिहास पढ़िये, संघी इतिहास नही पढ़िये और धान्यों की चेंगेज़ खांन ने बुद्ध की मूर्ती को तोड़ा। हम जो लिखते हैं उस को ग़लत नहीं जानये।

Abdul Raheem यहाँ की तीन हज़ार साल की तारीख़ से कुछ pattern मिलते हैं. एक तो ये कि, यहाँ civilisation तभी आगे बढ़ी, urbanisation तभी हुआ जब बौद्ध, यूनानी, फिर इस्लाम का असर रहा. बौद्ध फलसफा का असर शहरों, और व्यापार में रहा, दोनों ने एक दूसरे को फरोग दिया. हिंद-यूनानियों ने जो सिक्के चलाए, उनसे पहले या contemporary में बर्र ए सगीर में वैसे सिक्के नहीं चले.
बाद में गुप्त दौर में, जब यूनानियों का असर कम हो चुका था, तो पटना जैसे पुराने शहरों तक का पतन हो गया (दोबारा मुगलों ने बसाया शायद). (यहाँ 1000 AD में कोई शहर, बगदाद या कुस्तुनतुनिया के मुक़ाबले का था?? इतनी आबादी होने के बाद भी.)
फिर 1720 के बाद, दोबारा शहरों की बर्बादी हुई. अंग्रेजों ने किसी हद तक मेन्टेन किया, लेकिन colonial loot हुई.. फिर मुस्लिम और अंग्रेज culture पढ़े लिखे नेहरू ने थोड़ा काम किया, लेकिन 1990 के बाद फिर वही हालत.. 2014 के बाद से तो बर्बादी, और deindustrialisation शुरू हो गया. वर्ग विशेष की सोच शहरी सभ्यता को अपना नहीं पाई है अभी तक.

Salman Siddiqui बहुत शानदार और आंखें खोल देने वाला पोस्ट. आज की सबसे बड़ी ज़रूरत यही है कि इतिहास को अधूरा और तोड़-मरोड़ कर नहीं बल्कि हक़ीक़त और गवाही के साथ देखा जाए. मुस्लिम शासकों की इमारतें सिर्फ़ पत्थर के ढेर नहीं हैं, बल्कि उस दौर की इंजीनियरिंग, आर्किटेक्चर, साइंस और आर्ट का जीता-जागता सबूत हैं और यह सच है कि अगर ताजमहल, कुतुब मीनार, लाल क़िला, अलहमरा (स्पेन), इस्तांबुल की मस्जिदें, मक्का-मदीना का हरेम और मिस्र का Grand Egyptian Museum आज खड़ा है, तो यह उन हक़ीक़तों का जवाब है जो झूठा नैरेटिव फैलाने वाले कभी मानना ही नहीं चाहते. नालंदा का जिक्र करके आपने बिल्कुल सही याद दिलाया कि सिर्फ़ मुसलमानों पर इल्ज़ाम लगाना बौद्धिक बेईमानी है. चंगेज़ ख़ान, हलाकू और अंग्रेज़ों ने जो तबाहियां कीं, उसकी तरफ़ आंखें मूँद लेना और सिर्फ़ मुसलमानों पर ठीकरा फोड़ना असल में सियासी खेल है. मिस्र की सभ्यता इसका सबसे बड़ा सबूत है कि इस्लाम ने आने के बाद वहां के प्राचीन इतिहास और विरासत को मिटाया नहीं बल्कि संरक्षित किया। यही वजह है कि आज भी Pyramid से लेकर Pharaonic temples दुनिया के सामने हैं. यह पोस्ट उन शाखा ज्ञानियों के लिए एक आईना है जो सिर्फ़ नफ़रत से भरे हुए हैं. इतिहास गवाही देता है कि मुसलमानों ने जहां भी शासन किया, वहां सभ्यता, वास्तुकला और तहज़ीब को नया