The Post of 13 October 2025

کیا سناتا ہے مجھے ترک و عرب کی داستاں
مجھ سے کچھ پنہاں نہیں اسلامیوں کا سوز و ساز

13 October 2025 (10/13) को मिस्र के शहर शरम अल शेख में दुनिया के 40 से ज़्यादा लीडरों की मौजूदगी में अमेरिका के प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रम्प ने मिस्र, क़तर और तुर्की के साथ 777 दिन के नस्ल-कुशी के ख़ात्मे के समझौता पर दस्तख़त किया।

हम हमेशा कहते आये हैं कि इसराइल यूनाईटेड स्टेटस ऑफ अमेरिका (USA) का 51वा स्टेट है।वह आज दुनिया ने देख लिया, जंग बंदी समझौता पर ट्रम्प ने मिडिल ईस्ट के लिडरो के साथ दस्तख़त किया।इसराइल की मौजूदगी ज़रूरी नहीं थी क्योंकि वह मिडिल ईस्ट में अमेरिका का प्रोक्सी है।

शरम अल शेख में यूरोपियन देश के सभी अहम लिडरान के एलावा इंग्लैंड, कैनेडा, पाकिस्तान, आर्मेनिया, आइज़रबान, इंडोनेशिया के लीडर भी मौजूद थे।

नेतनयाहु शरम अल शेख समिट में आना चाहते थे मगर तुर्की के अरदोगान के एलावा कई दूसरे लीडर ने इस तक़रीब को बॉयकॉट करने की धमकी दिया जिस के वजह कर नेतनयाहु को आने से मना कर दिया गया।

इस समिट में सऊदी अरब और यूएई के हुक्मरान नहीं शामिल हुऐ जिस का अफ़सोस ट्रम्प को था। ट्रम्प ने अपने स्पीच में सऊदी प्रिंस मोहम्मद की तारीफ़ किया मगर जब अबू धाबी के अमीर का नाम लिया और देखा वह मौजूद नही हैं तो ट्रम्प चौंक गये।

“क्या सूनाता है मुझे तुर्क व अरब की दास्ताँ
मुझ से पिंहा नही इस्लामियों का सोज़ व साज़” (इक़बाल)

#NOTE: This is the “last chance” for peace and MAGA (Make America Great Again).
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Comments On The Post

Mohammed Seemab Zaman हम ने अपने पिछले पोस्ट में लिखा था कि शरम अल शेख का समिट एक तारीख़ी समिट होगा। दुनिया के जिनते लीडर वहॉ मौजूद थे वह बताता है कि दुनिया की “The New Economic Geography” अब यही है। इसलामियों का सोज़ व साज़ ही यूरोप और अमेरिका का Future है।

Arshad Rashid यक़ीनन ये एक तारीखी समिट होगा कुछ सालों बाद किताबों में गाजा नरसंहार और उसके बाद बदली geopolitics को किताबों में पढ़ाया जाएगा इन सब में सबसे उभरता चेहरा एर्दोगान के नेतृत्व में तुर्की रहा.

Hamid Khan Assalamualaikum sir, Apne Wale yahan kahi nahi dikhate dete ab. Yeh kaise vishguru h. Aur udher saudi arabia ne ea sport main bhi apni taraf kerli

  • Mohammed Seemab Zaman, Hamid Khan साहेब, हिन्दुस्तान को 2014 मे एक बहुत strong leader मिला था जो आज़ादी के बाद पहली बार मिला था। मगर इस आदमी ने अपने strong will को सिर्फ़ मुस्लिम दुश्मनी और मुस्लिम तिरस्कार में अपने को झोंक कर खुद को बर्बाद कर दिया और हिन्दुस्तान के दो नस्ल को बर्बाद किया। यह आदमी मुस्लिम दुश्मनी में अपने दिल को अंधा नहीं करता तो यह भारत को सच मे विश्वगुरु बना देता जितना support इस आदमी को मूल्क और दुनिया में मिला था।
  • ग़ौर से मेरी बात सोंचये गा, इस आदमी ने भारत के सब Pseudo-secular leaders को चुन चुन कर ख़त्म किया चाहे वह समाजवादी हों या कांग्रेसी या संघी। जयप्रकाश आंदोलन के बाद के पैदा सभी कचरा नेताओं जिस में संघी नेता भी शामिल थे सब को श्मशान घाट पहुँचा दिया।
  • भारत के सभी institutions जिस मे ज़ंग लग चूका था, सब को घुटना पर लाकर ख़त्म कर दिया जिस में Press & judiciary एक मिसाल बन गया। आदरणीय मोहन जी को उन के ज़िंदगी में ही उन को दफ़्न कर दिया, आज हाल यह है कि हर हफ़्ता धाराप्रवाह बोलते हैं मगर कोई उन को seriously नहीं लेता है।
  • मगर अफ़सोस इतना ताक़तवर होने के बावजूद यह आदमी देश और दुनिया को कुछ यादगार नही दे सका। बहुत कम लिखा है, इस पर तो हम दो पोस्ट लिख दें।

ER Noor Kabir अफसोस कि बात है कि एक अब्राहमिक फेथ के जिस शाखा यहूदी (बाकी दो ईसाई,मुस्लिम) आज ,जिस जमीन के टुकड़े/विरासत के लिए कसाई बन रहे,वो खुद ईसापूर्व से हित्ती , रोमन ,यूरोपियन(क्रुसेड) से लेकर जर्मनी( हिटलर) तक बुरी तरह पिटे,हज ईसा को सूली पर बाईबल (न्यू testament)के अनुसार यहूदियों ने ही चढ़वाया, उन्हें फिलिस्तीनियों ने शरण दी(जमीन सस्ते में दी बसने के लिए)।
बाईबल (तोरा(यहूदी बाईबल)/ओल्ड testament) अनुसार,फिलिस्तीन अब्राहम से पहले से है ,अब्राहम के इराक से जाकर फिलिस्तीन में एक हित्ती से जमीन खरीद कर बसे और उसमें दफ्न हुए अपने दोनों बेटों द्वारा(इस्माइल(मुहम्मद pbuh के पितामह)और इशाक (यहूदियों के पितामह))।