The Post of 18 December 2025
मिस्री सभ्यता 5000-7000 साल पूरानी है और वहॉ पूरानी चीज़ें आज भी सही सलामत या खंडहर के शक्ल मे मौजूद है, जबकि हिन्दुस्तान में कोई प्राचीन मंदिर या खंडहर नहीं है।
मिस्र का प्राचीन कार्नक मंदिर, त्रिमूर्ति भगवान अमुन-रा, उन की पत्नी मुत और बेटे खोंसु को समर्पित है।यह ऐतिहासिक कार्नक मंदिर आज हजारो साल बाद भी “सूरज भगवान” के एक शानदार प्राकृतिक घटना का गवाह है।
मिस्र के प्राचीन सूर्य भगवान, हर साल एक विशेष दिन 21 दिसम्बर को सुबह ठीक 6:31 बजे मंदिर पर लंबवत (perpendicular) रूप से उगते है, जिस की किरणें पूर्वी द्वार से परम पावन (Holy of the Holies) से होते हुए मुख्य द्वार तक जाती है।
अफ़सोस की बात है कि हज़ारों साल पहले मिस्र से खदेड़े गये घुसपैठिए आज भी हिन्दुस्तान में अपने “मिस्री घर्म” का प्रचार गोरखपुर के हिंदु सम्मेलन में करते हुऐ, भविष्य के आदरणीय राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के दत्तात्रेय होसबाले ने लोगों से कहा कि दुनिया के किसी भी देश के लोग अपने-अपने पंथ की दृष्टि से नदी की पुजा, सूर्य नमस्कार, प्राणायाम करते आ रहे हैं तो मुस्लिम भी करें तो कोई गलत है क्या? नहीं है।
भविष्य के आदरणीय दत्तात्रेय जी अभी भी दिसम्बर मे फ़ेरऔन के “सूर्य भगवान” की पूजा भारतीय मुस्लिम को करने को कह रहे हैं जबकि पूरा मिस्र आज मुसलमान हो गया है।
NOTE: दत्तात्रय जी, मिस्र ने एक नया म्यूज़ियम $1.2 billion मे बनाया है और अब समय आ गया है, आप भारतीय तबलीग़ी जमात के चालिस दिन के चिल्ला मे मिस्र जा कर अपने पूर्वजों को देख लिजये और भारत वापिस आ कर संघ के लोगो को प्राचीन मिस्री धर्म छोड़ कर इस्लाम धर्म क़बूल करने का आह्वान किजये।
नीचे मिस्र के सूर्य भगवान के 5000 साल पुराने कार्नक मंदिर की तस्वीर है।और मिस्र के नील नदी में उगते और डूबते सूर्य को प्राणायाम करते प्राचीन मिस्री सभ्यता की तस्वीर है।




