The Post of 10th January 2026

2013 से #चुनाव भारत में एक नया धर्म पैदा हुआ है। साल के 365 दिन में 300 दिन चुनाव धर्म का ही प्रचार और प्रसार होता है।

पिछले 12 साल में हर महीना में 28 राज्य और 8 यूनियन टेरेटोरी तथा हज़ारों म्युनिसिपैलिटी में कहीं न कहीं चुनाव होता है और हर चुनाव धार्मिक चुनाव बन जाता है।

चुनाव में मुस्लिम धर्म तख़्त-ए-मशक़ रहता है। उस के इर्द-गिर्द 88% हिन्दु को कहा जाता है कि 12% के कारण हिन्दु खतरे में है।

हिन्दु खतरे में है, नारा लगते #चुनाव_धर्म active हो जाता है और तीन महीना दंगा-फसाद, जलसा-जलूस, ढ़ोल-नगाड़ों का जश्न शुरू हो जाता है।रिज़ल्ट आता है, #छू_मंतर

#Note: हम सब को अमृत काल का नया धर्म #चुनाव_धर्म मुबारक हो।
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Some comments on the Post

Mohammed Seemab Zaman लगता है इन नेताओं, पत्रकारों, बुद्धिजीवियों को देश के विकास, सीमा सुरक्षा या दूसरा कोई काम नज़र ही नही आता है। धिक्कार है ऐसे “चुनावी धर्म” वालों पर।

  • Syed Shaad, Mohammed Seemab Zaman वाह बहुत खूब कहा सर… मैं भी यही बात अक्सर लोगों से कहता रहता हूं। चुनाव भी यहां का एक major religion बन चुका है। मुसलमान और चुनाव यही 365 दिन यहां दिल ओ दिमाग में चलता है। दूसरा कोई काम बचा ही नहीं है। सुबह उठते ही वही मुसलमान और वही चुनाव, रात सोते वक्त भी वही मुसलमान और वही चुनाव। इन्होंने अपनी ही एक नई दुनिया बना ली है…

Salim Khan हमारे यहां बंग्लादेश में मारे गए लोगों का बहुत अफसोस मनाया जा रहा है और यहां के अल्पसंख्यकों को डराने की हर कोशिश की जाती है,जबकि इंदौर में पानी पीने से हुई मौतों पर मौन धारण कर लेते हैं और उत्तराखंड में एक लड़की अंकिता भण्डारी के मामले में चुप्पी साधे हुए हैं और तो और उनके लिए आवाज उठाने वाली महिला को भी गिरफ्तार करने की ख़बरें आ रही हैं। बेहद घटिया राजनीति के दौर से देश/समाज का गुज़र हो रहा है। अल्लाह जाने देश/समाज कितने गहरे दबने वाले हैं।

Swaleen Gehlot अभी बहुत सारी मेडिकल कॉलेज व अन्य कई कॉलेजों की मान्यता रद्द होनी बाकि है क्योंकि अब मुस्लिम बच्चे चाय पान की दुकानें और छुटभैया नेताओ के आगे पीछे घूमना बन्द कर तालीम पर ध्यान दे रहे है, थैंक्स आरएसएस बीजेपी