Post of 16th July 2025
बिहार में वोटर लिस्ट का Special Intensive Revision (SIR) 2003 में वाजपेयी के प्रधानमंत्री कार्यकाल में हुआ। भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने वोटर लिस्ट जनवरी 2025 में update कर छापा मगर फिर 2025 जुलाई में चुनाव आयोग का SIR करवाना भारतीय प्रजातंत्र को ख़त्म करने की एक साज़िश है।
जानते हैं यह साज़िश बिहार में क्यों इस समय किया जा रहा है? यह सब बिहार मे “जातिगत जनगणना” कराने की सज़ा बिहारीयों को दिया जा रहा है क्योंकि 30-40 प्रतिशत बिहारी राज्य से बाहर जाकर “मज़दूरी” करता है और उस का नाम हटा कर उस को बिहार से हमेशा के लिए भगाने की चाल है ताकि वह गुजरात, केरल, पंजाब आदि में पूरी ज़िंदगी “बँधुआ-मज़दूर” बना रहे।
*जो राजनीतिज्ञ चाहे वह मांझी हो या चिराग़ हों या, दूसरे आरक्षण प्राप्त जाति वाले हों वह सब चुप हैं क्योंकि वह सब वाशिंग मशीन में धुल कर अपने को देशभक्ति का पर्याय समझ रहे हैं, यह सब नेता सब कुर्सी मिलने पर अपनी जाति का दुश्मन है।
*बिहार के पत्रकार अजीत अंजुम ने बीएलओ द्वारा SIR का बिना फ़ार्म दिये उस के फ़र्ज़ी फ़ार्म को सिस्टम में अपलोड करने की गंदी राजनीति का पर्दाफाश किया जिस के कारण उन पर FIR दर्ज हो गया। जब अजीत अंजुम ने किसान आंदोलन में सही रिपोर्टिंग किया तो FIR दर्ज नहीं हुआ मगर जब खुद अपने राज्य में गंदी राजनीति का पर्दाफ़ाश किया तो उन पर FIR कर उन को चुप कराने की आखरी कोशिश कर दिया गया।
*हर वयस्क या वोटर अपना सारा क़ाग़जात तो 2019 के NRC के आंदोलन से ही खोज या जमा कर रहा था मगर जो लोग ठिले हो गये थे वह सारा क़ागज एकठ्टा कर लें क्योंकि कभी NRC का हंगामा होगा, तो कभी आधार कार्ड बनवा कर भारतीय होने का सबूत देना होगा, तो कभी पैन को आधार से जोड़ने का अभियान चला KYC कर ब्लैक-मनी को निकालने का नारा लगा कर यह सब ग़रीब नागरिक और मज़दूर को “शाल-उढा” कर उन को ख़त्म करने की घोर साज़िश है।
*बारह साल में 85 करोड़ ग़रीब जो 5 किलो अनाज और 400 रूपया बीड़ी-खैनी पर जिवन गुज़ार रहा है उस के देश में कोई नया उद्योग नहीं लगा है, कोई विदेशी निवेश नहीं आया है, जब कि चीन विस्तारवादी होकर हमारे राज्य-शहर का नाम पता बदल रहा है। यह सब बात न कांग्रेसी नेता बोलते हैं, न ममता बनर्जी बोलती है, न पवार बोलते हैं, न चिराग या मायावती या अखिलेश बोलते हैं क्योंकि यह सब लोग पैदा ही सत्ता में हुऐ।
#NOTE: बड़े-बड़े स्वनामधन्य, अपने-आपको समाजवाद, बहुजनवाद, स्वच्छतावाद और सेक्युलरवाद का झंडाबरदार बताने वाले नेता और दल आज अपने को सर्वसत्तावाद के समक्ष समर्पण कर चुके हैं। कुछ ने तो अपने आपको उनकी बी-टीम या सी-टीम में ढाल लिया है। इतनी उपेक्षा और दमन-चक्र के बावजूद बिहार अपनी जमीन पर कायम है। क्या यह मामूली बात है?”
अब बिहार को देख कर सब लोग जुट जाइये और SIR के खिलाफ पार्ट-3 आंदोलन किजये जैसे NRC का किया था और जैसे किसान आंदोलन किया था।बिहार और बिहारी ज़िंदाबाद।
