इसराइली अख़बार Haaretz अपने हेडलाइन न्यूज़ में ट्रम्प द्वारा सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान को रात के खाने की दावत की तस्वीर देकर लिखता है कि “ट्रम्प के लिए खाड़ी एक सोने की खान है और इज़राइल मुकाबला नहीं कर सकता है”

यही बात हम पिछले दस साल से लिखते आ रहे हैं तो हमारे हिन्दुस्तान के कुऑ के मेंढक यक़ीन नहीं करते थे और फ़लस्तीन पर हम को ट्रोल करते थे, जबकि फ़लस्तीन और सीरिया की तारीख़ से सब अच्छी तरह वाक़िफ़ हैं।

प्रिंस मोहम्मद के दो दिन के अमेरिकी दौरा पर $270 billion के AI, Arms, Technologies, Gas turbines वगैरह पर समझौता हुआ। अमेरिका के सब बड़ी कम्पनी Nvidia, AMD, Cisco, Tesla, GE Vernova, Adobe वगैरह के मालिक और CEO रात के खाने पर मौजूद थे। GE Vernova के CEO ने कहा कि हम लोगों ने $600 million का छोटा Gas Turbine प्रिंस मोहम्मद आप के लिए बनाया है ताकि आप को AI के लिए उर्जा पैदा करने में आसानी हो।

उसी लेख में इसराइली लिखते हैं कि यह तो होना था। अब ट्रम्प को इसराइल की कोई प्रवाह नहीं है क्योंकि इसराइल एक तरह का फ्रेंकस्टीन बन गया है जो US और EU द्वारा बनावटी तौर पर बनया देश कंट्रोल से बाहर हो गया।अमेरिका द्वार इसराइल का बेहिसाब घमंड और अकड़ पैदा करने की वजह अमेरिका और इसराइल द्वारा UN रेज़ोल्यूशन (UN Resolution), जेनेवा कन्वेंशन (Geneva Convention), अंतरराष्ट्रीय क़ानून (International law), जेनोसाइड कन्वेंशन (Genocide Convention), ICC, ICJ को नहीं मान्ना है।

कहा जा रहा है कि रूस-यूक्रेन जंग मे 32 लाख (1.7 million रूसी और 1.5 million यूक्रेनियन) लोग मर गये और 70 लाख यूक्रेनी यूरोप, अमेरिका मे शरणार्थी बन गये मगर किसी मुस्लिम देश ने रूस के ख़िलाफ़ न बोला न अफ़ग़ानिस्तान की तरह पश्चिमी ताक़तों का साथ दिया। सिर्फ़ सऊदी अरब ने $500 million यूक्रेन को दिया। 10 June 2026 को रूस यूक्रेन की लड़ाई WWII से ज़्यादा दिन की हो जाये गी जबकि बीस साल चले Vietnam War से ज़्यादा लोग मर गये हैं।

ग़ाज़ा में 70,000 आम लोगों की हत्या अमेरिका और यूरोप के दिये हथियार से हो गई मगर दुनिया तमाशा देखते रही।यहॉ तक की अमेरिका ने अपने दोस्त क़तर तक पर इसराइल से बमबारी करवा दिया ताकि अरब देश सब कूदें और सब को 50 साल के लिए इराक़ के तरह तबाह कर दें, मगर अरब देशों ने सब बर्दाश्त किया और इस #फितना को फैलने से रोक दिया क्योंकि चीन अब दुनिया का सुपर पावर हो गया है।

अब अमेरिका की मजबूरी है कि वह गल्फ देशों को साथ रखे और फ़लस्तीन मसला हल करे वरना चीन इन का साथ दे गा और चीन के साथ यह सब खड़े हो जाये गा।यह बात अमेरिका और ट्रम्प को समझ में आ गई है क्योंकि सऊदी अरब के हवाई अड्डों पर अब अंग्रेज़ी और अरबी के अलावा चीनी ज़बान में भी संकेत लिखे देखे जा रहे हैं और स्कूल मे बच्चों को मैंड्रीन पढ़ाईं जा रही है।

Note: नीचे ट्रम्प द्वारा प्रिंस के रात्रि भोज की तस्वीर है जिस को Haaretz अख़बार ने छापा है। इस दावत में अमेरिका के बड़े बड़े कम्पनी के मालिक और CEO मौजूद थे, यह दुनिया में पहली बार किसी देश के प्रिंस के साथ हुआ है जो बादशाह नहीं है।

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