Post on 9 Nov 2025
“मोएज्ज़ा अहल फ़िक्र, फ़लसफ़ा पेंच पेंच
मोएज्ज़ा अहल ज़िक्र, मुसा व फिरओन व एहल तुर”
नीचे मेरा 8 Nov 2024 का एक साल पुराना पोस्ट है जिस में हम ने लिखा था कि “ट्रम्प के आने से विजयी पुटिन और शी जिनपिंग हैं, अब यह दोनों बहुत आसानी से ट्रम्प २.० को नचायें गें।दुनिया अब बग़ैर चीन के नहीं रह सकती है।”
हम ने यह भी लिखा था “Hindu First” के चक्कर में भारत “विश्व गुरू” नहीं बन सका उसी तरह “अमेरिका फ़र्स्ट” के नारा से “America Great Again” नहीं बना पाये गें।आज एक साल बाद चीन ट्रम्प का वही हशर करता नज़र आ रहा है जो हमारे आदरणीय विश्व प्रख्यात दार्शनिक डाक्टर मोहन जी के सरकार का हुआ।
मेरा कहना है कि ट्रम्प भारत-पाकिस्तान का लड़ाई रोकवा कर अपने चरम को पहुँच गये, मगर दो साल के इसराइल-प्रतिरोधी ताक़तों के मार काट ने ट्रम्प के राजनीतिक पतन का रास्ता निश्चित रूप से प्रशस्त हो गया।अमेरिका का पतन “मोएज्ज़ा अहल ज़िक्र, मुसा व फिरओन व एहल तुर” है।
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THE RETURN OF “AMERICA FIRST” SIGNALS END OF THE WESTERN-LED ORDER: WELCOME TO THE NEW WORLD (POST ON 08-11-24)
A senior EU official said after Trump’s election victory “Welcome to the brave new world. It is very, very bad for everyone, not just in Europe but in Asia, Africa, the Middle East and South America. Nobody is a winner, except, perhaps, Putin.”
यूरोपियन यूनियन (EU) के एक अधिकारी ने “अमेरिका फ़र्स्ट” के चुनाव जितने पर कहा, यह सभी के लिए बहुत-बहुत बुरा है, यह न केवल यूरोप के लिए बुरा है, बलकेह एशिया, अफ्रीका, मिडिल ईस्ट और दक्षिण अमेरिका के लिए बुरा है। कोई भी विजेता नहीं है, सिवाय, शायद पुटिन के।”
मेरा कहना है कि “America First 2.0” कार्यकाल केवल पश्चिमी देशों, ख़ास कर यूरोप के लिए बुरा है, और दुनिया के लिए “New World” है, क्योंकि “अमेरिका फ़र्स्ट” ने दुनिया बदल दिया। दक्षिण अमेरिका में ब्राज़ील और एशिया में मिडिल ईस्ट, सेंट्रल एशिया, इंडोनेशिया और अफ़्रीका मे मिस्र, अल्जीरिया, साउथ अफ़्रीका “Middle Powers” बन कर उभरे गें।
हम लोग ख़ुशक़िस्मत हैं जो 1876 के 150 साल बाद बदली दुनिया देख रहे हैं जिस का बीज बोया 1973 के अरब-इसराइल जंग से तेल-गैस का एक हथियार पैदा होना; 1979 में राष्ट्रपति बरेज़नेव द्वारा अफ़ग़ानिस्तान पर क़ब्ज़ा; प्रधानमंत्री इमरान खॉ का 2022 का फ़ॉल ऑफ काबूल। यह तीन महत्वपूर्ण वर्ष, दुनिया बदलने में सफल हुआ।
मेरा भी यही कहना है कि ट्रम्प के आने से विजयी पुटिन और शी जिनपिंग हैं, अब यह दोनों बहुत आसानी से ट्रम्प २.० को नचायें गें। दुनिया अब बग़ैर चीन के नहीं रह सकती है।
ट्रम्प के यूरोप, रूस-चीन के सामान पर 10-80% टैरिफ़ (tariffs) लगाने से अमेरिका को घाटा होगा क्योंकि रूस और चीन की आबादी लगभग 1.7 billion है और यूरोप की आबादी लगभग 0.7 billion है जो अमेरिका से बहुत ज़्यादा है। यह लोग अपना सामान खुद खप्त कर ले गें और अफ़्रीका, मिडिल ईस्ट, सेंट्रल एशिया में निर्यात कर विकास करे गें।
अब रूस-चीन या मुस्लिम देशों को अमेरिका की ज़रूरत नहीं है बलकेह अमेरिका को इन मुल्कों की ज़रूरत है।अब कोई ट्रम्प की धमकी से डरने वाला नहीं है क्योंकि सब लोग इन का 2017-20 का कार्यकाल देख चूका है।ट्रम्प को चार साल लगा तालेबान से समझौता करने मे। अब ट्रम्प से अगले चार साल मे यूक्रेन तथा इसराइल से समझौता नामुमकिन है क्योंकि बेग़ैर रूस-ईरान-चीन को साथ लिए यह समझौता हो ही नहीं सकता है।
NOTE: जिस तरह से संघ की सरकार पिछले दस साल मे “Hindu First” के चक्कर में भारत को “विश्व गुरू” नहीं बना सकी, उसी तरह से ट्रम्प अगले चार साल मे “अमेरिका फ़र्स्ट” के नारा से “America Great Again” नहीं बना पाये गें।
معجزہ اہلِ فکر، فلسفۂ پیچ پیچ
معجزہ اہلِ ذکر، موسیٰ و فرعون و طور
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Some comment on the Post
Mohammed Seemab Zaman ग्लोबल वर्ल्ड आर्डर 9/11 के पहले धीरे-धीरे बदल रहा था मगर 2011 के बाद तेज़ी से ढहने लगा था जब बराक ओबामा ने अरब स्प्रिंग और क्लिंटन का पैदा ISIS को दोबारा पैदा किया।ओबामा के जनवरी 2015 भारत दौरा के बाद WWII के बाद का वर्ल्ड आर्डर मुस्लिम दुनिया को बनाया रखना मुश्किल हो गया और मिडिल ईस्ट ने तेज़ी से ग्लोबल आर्डर चीन को background में रख कर बदल दिया, जिस का एहसास अमेरिका को हो गया और ट्रम्प को 2017 में ले कर आये, मगर रूस 2022 में यूरोप में फिर जंग छेड़ दिया।
आख़िर में थक हार कर अमेरिका के बुद्धिजीवियों ट्रम्प को दोबारा 2025 में लेकर आये तब तक बहुत देर हो चूका था और मिडिल ईस्ट और चीन सब eventualities से निपटने के लिए अपने को तैयार कर चूका था।
जब इतिहासकार इस सदी के शुरू के 25 साल का इतिहास लिखें गें तो ओबामा और संघ की सरकार के अंधे दिल का दुनिया का तेज़ी बदलने में एक “अहम कड़ी” लिखें गें।