Post of 4 October 2025
विनायक दामोदर सावरकर के “हिन्दुत्व” पर, The Wire की वरिष्ठ संपादक आरफा ख़ानम शेरवानी ने इतिहासकार मृदुला मुखर्जी का साक्षात्कार कर एक बहुत ही informative विडियो हम सब को दिया है।
मेरा कहना है कि जो लोग सावरकर के हिन्दुत्वा या आरएसएस के ideology को नहीं समझ पाए या पाते हैं वह पूरा विडियो सूने।हम ने यहॉ छोटा Trimmed Video दिया है।
मृदुला मुखर्जी कहती हैं कि सावरकर ने 1923 मे एक बहुत छोटी किताब “हिंदुत्व” लिखी, जिस में उन्होंने साफ़ कर दिया की हिन्दुस्तान मे सिर्फ़ हिन्दुओं के लिए जगह है, जिस की ownership हिन्दुओं की है और कोई दूसरे मज़हब के लोगों का यहॉ कोई हक़ नही है।
मृदुला कहती हैं कि “सावरकर ने दो concepts दिया और कहा यह जो ज़मीन है हिन्दुस्तान की, अगर आप के ancestor यहॉ से नही आये हों या आप के religious places यहॉ न हों तो आप का इस ज़मीन पर कोई हक़ नही है।”
उन का कहना है कि यह बहुत interesting and powerful definition सावरकर ने दिया क्योंकि किसी ने इस clarity से कभी नहीं कहा था।इस में वह हिन्दु, बुद्धिस्ट, जैन, सीख इन सब को तो हिन्दुओं में गिन सकते हैं क्योंकि इन सब के घर्म इसी धरती से पैदा हुऐ हैं और उन की religious places यहॉ ही है, बाहर नहीं है…….
#दुनिया का 20वी शताब्दी और मिस्री सभ्यता का शोध बताता है कि भारत में जो लोग पश्चिम में आये वह सब अफ्रिका से पलायन कर आये और वहॉ के भगवान, देवी, देवता और पूजा पद्धति को भारत लाये।मिस्री सभ्यता में ही केवल शिव और सूर्य को भगवान माना जाता था और मंदिरों में पूजा की जाती थीं।आज तक वहॉ शिव और उन की पत्नी की तस्वीर भव्य मंदिरों में मौजूद है, सूर्य मंदिर मौजूद है।भारत में कोई प्राचीन मंदिर नहीं है, सभी मंदिर 700 AD और उस के बाद का है।
#Note: जब सावरकर ने किताब “हिन्दुत्व” लिखी तो उस के तीन साल पहले 1920 में इंग्लैंड के Carter ने मिस्र के 120 बड़े पिरामिड में से पहला पिरामिड को खोला था।उस के बाद तो पिछले सौ साल में 20 पिरामिड खुला है और अद्भुत जानकारी मिस्र से आ रही है, जो भारत के हिन्दुत्ववादीयों के लिए शोध का विषय होना चाहिए।
#शायद सावरकर को अरब का मुहावरा पता नहीं था कि “Man fears time, but time fears pyramid”, उन को पिरामिड के खुलने की जानकारी नहीं थीं, मगर अब तो संघ को मिस्री सभ्यता का सत्य पता चल रहा है, फिर यह क्यों नहीं वहॉ जा कर शोध करते हैं कि “कौन कहॉ से आया और क्या क्या लाया?”
संघ शोध करे और उत्तर भारत के प्राचीन सिंधु-सरस्वती सभ्यता के भारत को बर्बाद नहीं करे जिस ने बुद्ध, महावीर, गुरु नानक जैसा महापुरुष और क्रमशः धर्म दिया।
https://www.facebook.com/reel/2344580179301730
#Please keep comments respectful.
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Some comments on the Post
Mohammed Seemab Zaman इस विडियो में मृदुला मुखर्जी साहिबा ने Facism और Nazi में बहुत अच्छा फ़र्क़ बताया है। वह कहती हैं, जर्मनी के फ़ासिस्ट नेता हिटलर जो वोट के द्वारा सत्ता में आये थे वह उस से ऊपर जा कर दूसरे धर्म को बर्बाद करने को चूना जिस का नाम Nazi है।
Sushila Sushila अब हम क्या पश्चिम से आए हैं? अगर हम मिस्र से आए हैं और वो वहां शिव और सूर्य को पूजते हैं तो वो वहां के हिंदू है क्या? और हम उनके वंशज ![]()
और अगर वो मुस्लिम है तो शिव और सूर्य को क्यूं पूजते है। सर आप क्लियर कीजिए। नहीं तो मुझे हिस्ट्री में ग्रेजुएट करना पड़ जायेगा। सर प्लीज़ अन्यथा ना ले। बहुत पहले कभी मिस्र की सभ्यता के बारे मे पढ़ा था। अभी तो किताबें ही बदल दी गई है।
- Mohammed Seemab Zaman आप हिस्ट्री में नहीं Ancient History मे शोध किजये। यहॉ जो रोज़ मस्जिद के नीचे मन्दिर खोजा जाता है, उस को बताने के लिए हम यह लिखते हैं कि वहॉ के शिव और सूर्य मंदिर आज भी मुस्लिम शासक बचा कर रखें हैं फिर भारत में मुस्लिम शासक क्यों तोड़ते। यहॉ कोई मंदिर हम को शिव या सूर्य का देखा दिजये जो 700 AD के पहले का बना हो। जाकर आज के इराक़ के बग़दाद के म्यूजियम में इस्लाम के पहले अरब की पूजनीय औरतों के मूर्तियों को देखये जो शेर पर खड़ी हैं और उल्लू की मूर्ती नीचे बनी है।हम तो कह ही रहे हैं शोध किजये कौन कहॉ से आया? केवल मुस्लिम को #आक्रंता कह कर लोगों को भटकाये नही।
Faiq Ateeq Kidwai मिस्र के कौन से देवता शिव है? Ptah या Anubis, शिव से क्या समानता है? सांप मिस्र में भी पूजनीय था शिव के गले मे भी है, लेकिन ठोस सिमिलैरिटी ज़रूरी है, अगर ब्राह्मण लोग मिस्र या सीरिया से आए है तो ऋग्वेद में तो उन्होंने शिव की आलोचना की है उल्टा उन्हें अनार्यो का देवता बताया है, लिंग के उपासकों को बुरा भला कहा है ऐसे में कोई अपने ही देवता की आलोचना क्यो करेगा। क्योंकि ऋग्वेद में सभी उन देवताओं की महिमा है जो निराकार है जैसे इंद्र वरुण आकाश आदि मूर्तिपूजा की मनाही थी, जबकि मिस्र में मूर्तियों का चलन था तो इस तरह का विरोधाभास क्यो है
- Mohammed Seemab Zaman बहुत अच्छा सवाल पूछा है मगर मुस्लिम होने के नाते बहुत ज़्यादा सवाल कर दिया। हम ने तो ऋग्वेद नहीं पढ़ा है और न आप ने पढ़ा होगा वरना द्विवेदी, त्रिवेदी, चतुर्वेदी न होते।
*यह सही है कि निरंकार ईश्वर का concept यहॉ भी है।आप को पता है ईश्वर, भगवान, देवी, देवताओं मे वैसा ही फ़र्क़ है जैसे ऋग्वेद, गीता, महाभारत, रामायण में है। ईश्वर का concept नानक घर्म मे भी है मगर बुद्ध के यहॉ नही है। जैन का हम को पता नही है।
*मिस्र सभ्यता से ही समुंदर मंथन का concept जन्म लिया है। मिस्र में भी इंद्र, वरूण, आकाश पूजनीय थे। आज भी 5000-7000 साल के बाद भी वहॉ भव्य मंदिर मौजूद हैं जहॉ यह नज़र आता है।
*कोई विरोधाभास नहीं है, ज़रूरत है शोध का। Please remember “history never repeats itself.” वहॉ शिव पूजनीय भगवान थे, मेरा विडियो temple of Edfu का है देख लिजये और आप Ptah, Anubis से confuse नही किजये।
* उम्मीद है, इतना जवाब काफ़ी होगा।मेरा बहुत सारा पोस्ट है, please पढ़ लिजये मगर सब से पहले 4 famous ancient Civilisations of the world: Egyptian, Mesopotamia, Indus Valley and Ho Huang पढ़ये गा।
Faiq Ateeq Kidwai सर मैं आपको पढ़ता हूँ इजिप्ट से रिलेटेड कई पोस्ट आपके पढ़े भी है हालांकि वेद मैंने पढ़े है, चूंकि इजिप्ट की थोड़ी बहुत जानकारी है बस मेरी दिलचस्पी ये जानने की थी वहाँ शिव किस नाम से पूजे जाते थे, असल में आपने समुद्र मंथन वाली बात कही, या फिर हम सब जानते है मोज़ेज़ को नाइल में डलिया में रखकर बहा देने वाली बात, या ग्रेट फ्लड वगैरह ऐसी तमाम घटनाओं को यहाँ लोगो ने कॉपी किया है, बल्कि मेसोपोटामिया और सीरिया से भी, लिहाज़ा मुझे ये जानना था कि वहाँ शिव कौन है.
Mohummed Umer Multani सर,इस इंटरव्यू के साथ आपकी तमाम मिस्त्र से सम्बंधित पोस्ट्स को जोङकर देखा जाए तो आपने तथाकथित हिंदुत्व वादियों को अपने गिरेबान में झांकने को मजबूर कर दिया है.
