The Post of 12th January 2026

एक मशहूर कहावत है कि “इतिहास बहुत कम मार्गदर्शन देता है.” यह कहावत हम भारतीयों पर सौ फिसद (100%) खरा उतरता है।

डोभाल जी का कहना है कि जब सोमनाथ पर आक्रमण हुआ तब हम “असहाय” थे, बताता है कि डोभाल राष्ट्रपिता गांधी के आज़ादी के “non-violent” आंदोलन को मार्गदर्शन नहीं मानते हैं और बदला लेने को कहते हैं।

आज हम बहुत बड़ी बात राष्ट्रपिता गांधी के बारे में लिख रहे हैं जिस को डोभाल और बहुसंख्यक समाज विचार करे और हिंसा की बात न करे;

गांधी जी इंग्लैंड से बैरिस्टरी पास कर भारत नही आये और साऊथ अफ्रिका में प्रैक्टिस करने लगे।मगर जिन्नाह बैरिस्टरी कर बम्बई में प्रैक्टिस करते थे और एक कोर्ट पेशी का 1500 रूपया लेते थे जो भारत का कोई बैरिस्टर उस समय इतनी बड़ी रक़म सोंच नही सकता था।

हम सब जानते हैं कि गांधी जी अफ्रिका में ट्रेन में फर्स्ट क्लास में चलते थे मगर एक दिन एक गोरा ने इन को और इन के सामान को फर्स्ट क्लास डब्बा से बाहर फेंकवा दिया तो गांधी जी ने कोई “बदला गोरे से नहीं लिया” वह चुप चाप प्लेटफार्म पर खड़े रह गये, यहॉ तक की कोई केस गोरे पर भी नहीं किया। वापिस भारत 1911 में आ गये, क्योंकि गांधी को अपने शरीर मे हज़ारों साल का “असहाय” होने का DNA पता था।

गांधी जी वापिस भारत आकर पूरा भारत घूमे और एक आदमी भी उन को नही मिला जो अंग्रेज़ों से लड़ कर भारत को आज़ाद कराने को तैयार हों। अंततोगत्वा गांधी जी समझ गये कि मेरे ही DNA में “असहाय ख़ून” नहीं है बल्कि पूरे भारत के बहुसंख्यक समाज का DNA यही है।

गांधी जी ने फिर अंग्रेजों के खिलाफ “non-violent” आंदोलन का अहवान किया और कहा अगर कोई तुम्हारे एक गाल पर थप्पड़ मारता है तो दूसरा गाल भी दे दो ताकि वह दूसरा थप्पड़ मारे मगर “हिंसा” न करो।

यह तो बात आज़ादी के पहले की है मगर 1992 में भारत रत्न नरसिम्हा राव ने हिम्मत देखा कर बाबरी बम से उड़ा दिया। भारत रत्न राव, 8 महीना बाद अपने “असहाय” DNA का सबूत दिया और 1993 मे चीन जा कर LOC को LAC बना कर भारत का नक़्शा बदल दिया मगर उस वक़्त डोभाल साहेब ने चीन से बदला लेने की बात नही कही।

अब चीन हम से मुग़ल के नाम-पता बदलने की कला सिख कर अरूणाचल और उस के ज़िला, नदी, नाला, पहाड़ का नाम बदल दिया और तवांग में जन्मभूमि विवाद खडा कर दिया।

अफ़सोस की बात यह है कि अब डोभाल साहेब चीन से बदला लेने की बात न कर वर्तमान भूल कर इतिहास मे “असहाय” होने को याद कर रहे हैं।

#NOTE: डोभाल साहेब सही इतिहास पढ़िये और अपने बच्चों को पढ़ायें. इतिहास से सबक सीखिए और “अहिंसा” का नारा लगाइये, गांधी जी और भारत रत्न नरसिम्हा राव से सबक़ सिखाये. जय हिन्द.
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Some comments on the Post

Mohammed Seemab Zaman गांधी जी जब पूरा भारत घूमे ख़ास कर बिहार के मोतिहारी में इन को ज्ञान हुआ कि हम लोग हज़ारों हज़ार साल से “असहाय” DNA लेकर अफ्रिका से खदेड़े गये हैं। यही कारण है कि अंग्रेज़ ने East India Company बना कर Business कर बहुसंख्यक समाज को ग़ुलाम बेग़ैर लड़ाई लड़े कलकत्ता में बना लिया, और बाद में पूरे भारत को ग़ुलाम बना लिया।

  • Tanveer Hkm, Mohammed Seemab Zaman पटना आते ही जब उनके साथ ही #छुआ_छूत हो गया तो, #असहाय महसूस करने लगे ; वो तो भला हो मरहूम मौलाना मज़हरुल हक़ साहेब का के घर ले गए और खूब आओ_भगत की ! (अभी उसी गली के मुहाने पर द बिरयानी मॉल है)

Mozaffar Haque जय शंकर साहब डोभाल साहब से कुच्छ ज़्यादा अपने DNA से वाक़िफ़ हैं: उदाहरण के लिए:

• जयशंकर ने कहा कि भारत और चीन के बीच “issues (मतभेद)” आगे भी रह सकते हैं, लेकिन उन्हें संघर्ष/लड़ाई में बदलने की बजाय शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने के तरीके मौजूद हैं।” 

• उन्होंने यह भी कहा कि भारत को चीन से डरना नहीं चाहिए और एक प्रतिस्पर्धी वैश्विक परिदृश्य में खुद को बेहतर तरीके से प्रस्तुत करना चाहिए, न कि लड़ने-डरने की सोच रखना चाहिए।

  • Mohammed Seemab Zaman सर से पानी बहुत ऊपर बह चूका है, अब समय 10-15 साल के लिए ख़त्म हो गया कि खुद को वैश्विक परिदृश्य में प्रस्तुत करने का। हम 2015 से डराते आ रहे थे मगर यहॉ लोग “मुस्लिम की चूड़ी टाइट” करने में लगे थे। मेरी बात याद रखिये गा अभी बहुत कुछ होना बाक़ी है फिर अंधे दिल में रौशनी आये गा और सुंदर भारत बने गा।

Aquil Ahmed इनकीं हालत बद से बदतर हो गई है ,अब तक इनकीं नाकामयाबी मीडिया छुपा पाता था क्योंकि पश्चिमम इन्हें समर्थन करते थे लेकिन OPERATION सिंदूर में पश्चिम तटस्थत हो गया और इन्हें अपनी कमजोरियां छुपाए नही छुपी बल्कि इस फिराक में मीडिया पूरी तरह EXPOSE हो गई क्योंकि उन्हें अंदाजा ही नही था पश्चिम तटस्थ होग्या जो कि china के करण इन्हें एक्सपोज़ होने नही देना चाहता था इस बीच।पकिसितांन एक क्षेत्रीय power house बन के निकल चुका जो कि 75 billion defence बजट विरुद्ध 7 billion ने पूरे दुनिय्या का ध्यान आकर्षित कर इंनक़े लिए कोइ जगह नही छोड़ा …..अपनी असफलता अपने ही देशवासियोसे छिपाने का बस यही एक रास्ता है इंनक़े पास.

Faysal Khan और बदला भी किस बात का, सोमनाथ के मंदिर में क्या क्या होता था क्या ये इतिहास में नहीं दर्ज है असहाय भारतीयों की हज़ारों बहू बेटियों विधवाओं को धार्मिक आडम्बर के नाम पर देवदासी बनाकर रखा हुआ था क्या ये इतिहास में नहीं दर्ज है.? क्या संघ फिर से सोमनाथ मंदिर उस इतिहास को लौटाना चाहता है