Post of 7th August 2025
Ambuj Gupta Bhartiya साहेब ने डोनाल्ड ट्रम्प के भारत पर 50% लगायें टैरिफ़ पर प्रधानमंत्री के जवाब पर अपने पोस्ट पर लिखा कि “खर्रे तो गोधरा से लेकर लिंचिंग तक खुलेंगे, एक ओवर लोड देश को बर्बाद करने की कीमत बहुत बड़ी है”
गुप्ता साहेब का बहुत सही विश्लेषण है।ट्रम्प द्वारा भारत ऐसे बड़े देश का अपमान RSS के सौ साल के सोंच का अपमान है।अब संघ कई दशकों तक अपने ही फैलाये नफ़रत मे भटकता रहे गा।
*तुर्की $23 billion का तेल रूस से ख़रीद रहा है, जबकि चीन $240 billion का ख़रीदता है मगर जब भारत ने रूस से अपनी ज़रूरत का 30% तेल $119 billion में ख़रीदा तो ट्रम्प ने 25% टैरिफ़ सिर्फ़ भारत पर लगाया, चीन और तुर्की पर नहीं लगाया।
*अफसोस इस बात का है कि संघ और उन के बुद्धिजीवी भारत का इतिहास-भूगोल भूल गये थे और मुस्लिम तिरस्कार से नया इतिहास गढना चाहते हैं जिस को पूरी दुनिया ने ग़ौर से पढ़-समझ लिया।
*संघीतकार मुगल के बनाये शहर और गाँव का नाम-पता बदलने से गौरवमयी और आनंदित होते रहे, मगर चीन ने यह हुनर हम से सीख कर हमारे राज्य-ज़िला का नाम-पता बदलना शुरू कर दिया मगर फिर भी हम लोग चीन के बनाये संस्था SCO के सम्मेलन में जाने की इच्छा रखते हैं। इस SCO में भारत-रूस-चीन को छोड़कर सात (7) मुस्लिम मुल्क है, जिस के पास यूरेनियम से लेकर गैस-तेल का बहुत बड़ा भंडार है।
*ट्रम्प जो दस(10) महीना पहले मेरा घनिष्ठ मित्र था वह अब दुनिया में खुले-आम हम से दुश्मनी कर रहा है मगर चीन का नाम नहीं लेता है क्योंकि चीन अमेरिका से बड़ा आर्थिक और सैन्य शक्ति बन कर उभर गया है और SCO में सात मुस्लिम देशों का दोस्त हो गया है। रेशम मार्ग (BIR) में एशिया और अफ्रिका के तक़रीबन सभी मुस्लिम देश चीन से जुट गये हैं।
*रूस जो तीस (30) साल पहले तक अमेरिका का competitor था, मगर उस के राष्ट्रपति पुटिन से ट्रम्प यूरोप के क़िमत पर मिलने और दोस्ती करने के बहुत ख़्वाहिशमंद हैं। खबर है कि अगले हफ़्ता ट्रम्प पुटिन से तुर्कि के राजधानी अंकरा में मिलना चाहते हैं जबकि पुटिन ने कल कहा है कि वह ट्रम्प से दुबई (UAE) में मिलना चाहते हैं क्योंकि यूएई से रूस के व्यापारिक संबंध बहुत अच्छे हैं।
*आज की खबर है कि साउथ अफ़्रीका ट्रम्प के टैरिफ़ मार के वजह कर अपनी बहुत बड़ी team मिडिल ईस्ट भेज रहा है और सऊदी अरब से trade पर open बात करने को तैयार है जबकि वह अभी चीन का सब से बड़ा व्यापारिक पार्टनर है।
*भारत के वर्तमान या भावी प्रधानमंत्री और बुद्धिजीवियों को #आज़ान देन के सवाये अब कोई दूसरा चारा नहीं बचा है क्योंकि कोरोना के बाद अभी तक भारत की अर्थव्यवस्था ख़राब है।
#NOTE: अंत मे संघ के सरकार के 12 साल के उपलब्धियों का जवाब यह शेर है:
“चंद तस्वीर-ए-बुतॉं चंद हसीनों के ख़तुत
बाद मरने के मेरे घर से ये सामॉं निकला”
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Some comments on the Post
Mohammed Seemab Zaman हम ने ट्रम्प के Tariff पर एक पोस्ट के अलावा कोई पोस्ट नहीं लिखा है। मेरा मान्ना है कि यह टैरिफ-युद्ध ट्रम्प चीन के वजह कर हारें गें।
चीन अब अमेरिका से बड़ा आर्थिक और सैन्य शक्ति हो गया है। चीन ट्रम्प से नहीं डरे गा। वह इस का जवाब अपने बेल्ट और रोड योजना से पैदा दोस्त और allies के व्यापारीक संबंधों से देगा। ट्रम्प पुरी दुनिया में टैरिफ वार और इसराइल की दोस्ती से अपने allies को खो दिया है।