Post on 20 August 2025

25 साल पहले, संघ के प्रचारक रहे प्रधानमंत्री वाजपेयी और राष्ट्रपति क्लिंटन के समय 2000 में भारत-अमेरिका का रिलेशनशिप शुरू हुआ।

*फिर बुश राष्ट्रपति बने, 9/11 हो गया और रिलेशनशिप परवान चढ़ने लगा क्योंकि उस समय “इस्लामोफोबिया” ज़ोरों पर था।बुश ने इराक़ और अफ़ग़ानिस्तान पर बमबारी कर लाखों लोगों को मारा और अफ़ग़ानिस्तान में तालीबान की हुकूमत ख़त्म हो गई मगर आठ देशों ने वहॉ तालीबान बना लिया जो 15 अगस्त 2021 (फॉल आफ़ काबुल)) तक कत्ल और ग़ारतगीरी करते रहे।

*9/11 के बाद, राष्ट्रपति बुश के कार्यकाल मे अमेरिका के मल्टीनेशनल कम्पनियों में भारतीय प्रवासियों को महत्व दिया जाने लगा।बुश ने 2007 में चीन के खिलाफ Quad (भारत-ओसट्रेलिया-जापान-अमेरिका) बनाया।भारत-अमेरिका रिलेशनशिप को हार पहनाया जाने लगा।

*2007-08 मंदी मे, बराक ओबामा राष्ट्रपति (2008-16) बने और कहा जाता है कि उस मंदी मे चीन से पैसा आता था तो व्हाइट हाउस में ओबामा और उन के स्टाफ़ को वेतन मिलता था। मगर 2012 तक मंदी का असर कम हुआ तो ओबामा ने अपने दूसरे कार्यकाल मे अरब स्प्रिंग करा दिया। इसराइल को 2029 तक हर साल $3 billion आर्थिक मद्द का क़ानून बना दिया जब कि कार्टर के समय से इसराइल को $3 billion सैन्य सहायता मिलता था और आज भी मिलता है।

ओबामा ने यूक्रेन को सैन्य साज़-सामान देना शुरू किया तो पुटिन ने उस के जवाब मे 2014 में यूक्रेन का Crimea क़ब्ज़ा कर लिया।ओबामा कुछ नहीं कर सके।

*2014 मे ओबामा ने भारत में संघ की सरकार बनवा दिया और भारत-अमेरिका का रिलेशनशिप उरूज पर आ गया।भारत में अमेरिका का फ़ाईटर जेट बनाने से मोबाइल बनाने तक का ख़्वाब देखा दिया गया।अमेरिका के 30 से अधिक कम्पनी के सीईओ और चेयरमैन भारतीय लोग बन गये।

*फिर आया डोनाल्ड ट्रम्प का कार्यकाल (2017-20) और भारत-अमेरिका रिलेशनशिप अपने उस मुक़ाम को पहुँच गया जहॉ से वापसी का कोई संघी या हिन्दी नाम वाले कभी सोंच नहीं सकते थे।यह रिलेशनशिप बाईडेन के समय भी क़ायम रहा।

#NOTE: मगर ट्रम्प २.० के छह महीना में ही भारत-अमेरिका का 25 साल के रिलेशनशिप का तलाक़ हो गया और मांग से सिंदूर उजड़ गया।संघीतकारों को बहुत ग़ुस्सा आया और चीन के साथ फ़ौरन “हलालह” कर लिया।मेरा मान्ना है कि यह हलालह भी बहुत दिन तक नहीं रहे गा और फिर आख़िर मे आज़ान के साथ निकाह होगा। (निचे 25 साल के रिलेशनशिप की कुछ यादगार तस्वीर है)
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Some comments on the Post
Mohammed Seemab Zaman यह हलालह जो चीन के साथ हुआ है वह जल्दबाज़ी में उठाया गया ग़लत क़दम है, क्योंकि चीन के साथ भी रिलेशनशिप पाँच साल से ज़्यादा नहीं रह पाये गा। दुनिया बदल गई है और अभी रूस-यूक्रेन तथा इसराइल-प्रतिरोधी ताक़तों का मार काट ख़त्म होता नज़र नहीं आता है।बेहतर था कि कुछ दिन तलाकशुदा ज़िंदगी गुज़ारनी चाहिए थी। यह दोनों जंग ख़त्म होने के बाद फिर निकाह करने से सुंदर ज़िंदगी गुज़रने की उम्मीद थी।

Arvind Srivastva बिल्कुल आपने मेरे मन की बात कह दिया जमान भाई।

Sanjeev Dutt Sharma, Mohammed Seemab Zaman जी तलाकशुदा जिंदगी तब गुजरते जब जेब में कुछ होता।फक्कड़ तो ऐसे ही जिंदगी गुजरने के लिए किसी को भी पकड़ता फिरता है।

Shalini Rai Rajput ब्रिटेन की सहायता से चलने वाले संगठन ने पूरी वफादारी निभाईं ईमानदारी के साथ

  • Mohammed Seemab Zaman आप दूसरे को क्यों blame करती हैं। अपने बुद्धिजीवियों, पत्रकारों और अंधे दिल वालो को क्यों नहीं क़सूरवार ठहराती हैं। ब्रिटेन ने तो एक भारतीय (हिन्दु) को प्रधानमंत्री बना दिया, इस से बड़ा honour नहीं हो सकता था।

Bibhas Kumar Srivastav बहुत सुंदर। हक़ीक़त है यह।

कुलदीप सिंह बुल्लों का कोई स्थाई स्टैंड नहीं रहा सर
बुल्ले चिचा की तरफ से लात खाए
अब इधर से भी खायेंगे अंत में
अज़ान देंगे ।

Raju Mastana चीन भारत का इस्तेमाल ही करेगा।

Salman Siddiqui आपने बिलकुल सही कहा कि अमेरिका का रिलेशनशिप हमेशा अपने फ़ायदे और एजेंडे के हिसाब से रहा है कभी इस्लामोफ़ोबिया, कभी चीन कंट्रोल, कभी रूस बैलेंस लेकिन अब जब अमेरिका ने इंडिया को यूज़ करके छोड़ दिया तो यह तलाक़ साफ़ नज़र आ रहा है. चीन के साथ जो हलालह हुआ है, वह भी मजबूरी का है, मोहब्बत का नहीं. Mohammed Seemab Zaman भाई मुझे भी यही लगता है कि आने वाले वक्त में इंडिया न अमेरिका पर पूरा भरोसा कर पाएगा और न ही चीन पर दोनों अपने-अपने मतलब के लिए हैं

  • Ambika Singh, Salman Siddiqui international riste mein dosti dushmani permanent nahin hoti bhai , sirf mufaad par Nikki rehti hai.American is mein jiada mahir hain. Ghantu ne foreign policy ka band bahut pehle baja diya tha, ab jis ke chahe angan mein nachte rahein