The Post of 4th February 2026

आज तीन दिन बाद ब्लूमबर्ग टीवी ने यह खबर उछाला है कि भारत ने ट्रम्प से ‘ट्रेड डील’ पक्की करने के लिए पर्दे के पीछे लंबा प्रयास किया।

*समझ में नहीं आया कि पर्दे के पिछे प्रयास कर अमेरिका से ऐसा ट्रेड डील करने की क्या ज़रूरत थी जिस में भारतीय कृषि को नुक़सान हो।पहले से भारत अमेरिका से $180 billion का ट्रेड करता था जिस में भारत $136 billion का 2025 मे सामान और सर्विस (services like TCS, Infosys) अमेरिका को बेचा (नीचे FT, London का दस दिन पुराना चार्ट देखें)

*हॉ, इस डील से भारत माता की दूध इंडस्ट्री को बहुत फ़ायदा होगा क्योंकि अब अमेरिका से दुग्ध और दुग्ध पदार्थ भारत में बिना टैरिफ़ के आये गा और भारत के बच्चे-बूढ़े स्वास्थ्य रहे गें। दुग्ध और दुग्ध पाउडर 1970-80 के दशक मे अमेरिका से Operation Flood I & II के नाम में “Free” आया था जिस के कारण Mother Dairy बना और आज पूरे भारत में नज़र आ रहा है।Mother Dairies भारत माता को अमेरिका के खैराती दूध का देन है।

*दो दशक से WTO के कारण भारत अमेरिका और यूरोप से ट्रेड 2025 मे $136 और $132 billion (नीचे ग्राफ़ देखें) करने लगा तो यूरोप और अमेरिका ने भारत पर दबाव बना कर “New Trade Deal” किया जिस में भारत को घाटा ही घाटा है।

*घाटा इस तरह से है कि पिछले 12-13 साल में किसी भी क्षेत्र मे “industrial capacity expansion” नही हुआ है।चुनाव लड़ कर 27 सरकारी बैंक डूबा कर अब 11 बैंक बचे हैं जिन में अब यह क्षमता नही है कि वह industrial loan दे कर क्षमता बढा सकें।

*अमेरिका से कोई पैसा या इंडस्ट्री भारत नहीं आये गा क्योंकि जिन लोगों ने ट्रम्प की $5-7 trillion में बोली लगाई है वह अपने यहॉ अमेरिकी कम्पनी लगाने को कहें गें, वरना वह अमेरिका को पैसा नहीं दें गें, वह चीन, जापान में पैसा लगा दें गें।

*अंततोगत्वा, संघ की सरकार को सरकारी बैंक को 49-60% विदेशियों को बेचना होगा और यह विदेशी यूएई, क़तर या सऊदी अरब होगा।

#NOTE: इस पोस्ट का सारांश यह है कि 9/11 के बाद से बदली दुनिया में भारत में संघ की सरकार 16 साल रही जिस ने domestic politics मे मुस्लिम तिरस्कार को मूल मंत्र बना कर बदले geo-economics और geopolitics को समझ ही नहीं पाया, जिस का नतीजा है कि यह घाटे का यूरोप और अमेरिका ट्रेड डील हुआ।
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Some comments on the Post

Mohammed Seemab Zaman यह अमेरिका या यूरोप “ट्रेड डील” भारत के लिए मजबूरी हो गई थी क्योंकि अर्थव्यवस्था ख़राब है, बैंक चुनाव लड-लडा कर डूबा दिया गया है। Infrastructure expansion (रोड-हाई-वे) विदेशी लोन से बना है जिस का पेमेंट अगले साल से शुरू होगा।

  • Arshad Rashid, Mohammed Seemab Zaman साहब ये बजट भी फॉरेन इन्वेस्टर को ध्यान में रख कर बनवाया हैं अब तो डर हैं कि कही यहां की कार इंडस्ट्री तबाह न हो जाए क्योंकि सबसे ज्यादा टैक्स टेररिज्म तो इसी इंडस्ट्री पर लगता हैं.

Abdul Raheem जब यही करना था तो RCEP में क्या ग़लत था?! GCC, OTS, ASEAN, AU से इससे कहीं बेहतर डील कर सकते थे, 10 साल पहले ही.

  • Mohammed Seemab Zaman सौ साल की सोंच लेकेर आये थे तो हिन्दु-मुसलमान ही करते रह गये तो कैसे GCC, OTS या ASEAN जाते। भारत के साथ जो हुआ वह सही हुआ वरना बहुत अफ़सोस रहा जाता कि संघ की सरकार नही बनी वरना विश्वगुरु हो जाते।

Abdul Raheem यहाँ के नेता और corporates की फाइल, और रिकॉर्ड पहले ही वहाँ होगा. बिना Epstein फाइल के भी ऐसी डील करा लेते, लेकिन लिस्ट आने के बाद से तो blank cheque समझा जाये.

Kadar Khan हज़रत हमें लगता है कि चीन के पास भी एप्सटीन फाइल जैसी कोई चीज़ है अपना गोलू उससे भी बहुत डरता है।

Salman Arshad जो बात आप जैसे दानिशवर समझते और कहते हैं, ये सब संध के लोगों को भी समझ में तो आता होगा, या कम से कम नौकरशाह तो ज़रूर समझाते होंगे। इसके बावजूद मुल्क़ के भीतर नफरत की सियासत को लगातार फरोग देते रहने के पीछे क्या वजह हो सकती है?

Dilawar Khan जी बिल्कुल,,, बहुत सही कहा आपने. सर, मनमोहन सिंह के दौर मे बडी अकड़ और घमंड के साथ दावा किया गया था कि भारत बहुत बड़ा बाज़ार है. आज हमारी समझ में आ रहा है ये बड़ा बाज़ार.

Zuber Mansuri अमेरिका से कृषि प्रोडक्ट (कपास, दूध, मिल्क प्रोडक्ट्स, दालें, सोयाबीन, मक्का, नट्स – बादाम, अखरोट, पिस्ता। सेब, फल) आयेंगे तो क्या भारत के किसान आत्महत्या को मजबूर नहीं होंगे ?

Kamil Khan कहते हैं जब तालाब में जाल डाला जाता है तो मछली इधर उधर भाग कर अपनी जान बचा सकती है, पर जब तालाब को ही सुखा दिया जाए तो मछली बेचारी कहाँ जाए, डील तो होनी ही थी,

Abdul Bari सर जब भारत को यही ट्रेड डील साइन करना था तो इतना देर क्यों लगाया पहले ही यह डील साइन कर लेना चाहिए था ।
यह पर्दे के पीछे जो कहानी है कई इसी की परदेदारी तो नहीं🤔🤔