Post on 8th October 2025

जानते हैं, हमारे आदरणीय, विश्व प्रख्यात दार्शनिक, धाराप्रवाह हिन्दी वाचक, इतिहासवेत्ता, संघ प्रमुख, डाक्टर, मोहन जी के द्वारा कहना की राम मंदिर बन गया, अब काशी-मथुरा बाक़ी है और संघ इस में भाग नहीं लेगा मगर संघीतकार इस मे भाग ले सकते हैं, ही कारण है कि भारतीय उच्चतम न्यायालय में जूता उछाला गया।

संघीतकार हर मस्जिद के निचे मंदिर का झूठा इल्ज़ाम लगा कर कोर्ट मे एफेडेविट के बाद भी बाबरी को शहीद कर दिया और इसी उच्चतम न्यायालय के जस्टिस गवई तथा दूसरे न्यायाधीशों द्वारा 2019 मे बिना सबूत के Divine Judgment दे कर राममंदिर बनवा दिया।जस्टिस गवई से वकील राकेश किशोर (तिवारी) बुद्ध की मूर्ती को विष्णु की मूर्ती का फ़ैसला की उम्मीद लगा रखा था।मगर गवई साहेब बुद्ध धर्मावलम्बी होने के कारण बाबरी मस्जिद के तरह divine judgment देने से इंकार कर दिया।

दुनिया के इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि किसी चीफ जस्टिस पर जूता उछाल कर अमानवीय घटना किया गया हो।यह घृणित काम दक्षिण अमेरिका के देश कोलम्बिया के ड्रग माफिया ने भी वहॉ के उच्चतम न्यायालय में कभी नहीं किया।हॉ, फ़िलीपीन्स में जज की हत्या किया गया क्योंकि वह ड्रग माफिया के हक़ में जजमेंट देते थे।

चार हज़ार साल पहले भारत की सिंधु-सरस्वती घाटी सभ्यता में मूर्ती कला नहीं था।भारत में मूर्ती कला मिस्र के रास्ते आये सिकंदर के नस्ल द्वारा बुद्ध की मूर्ती बनाई गई जो मिस्री कला की प्रतीक रही और फिर बाद में दूसरी धार्मिक मूर्तियां बनी।आवश्यकता शोध करने की है:

*नीचे पहली तस्वीर आँध्रा प्रदेश मे विष्णु जी की मूर्ती जिसे बुद्धिस्ट बुद्ध की मूर्ति कहते हैं के नाभि के नीचे मिस्री पिरामिड बना है।

*दूसरी तस्वीर Meshram साहेब के विवादित दो मूर्ती की है जिस के कारण जूता उछाला गया।

*तीसरी तस्वीर मिस्र के 5000-4000 साल प्राचीन मंदिर के बाहर की मूर्ति।

*चौथी मिस्र के आदमी की मूर्ती जो अध्यात्मिक मुद्रा में बैठा है, जैसे बुद्ध की मूर्तियां प्रचलित हैं।

#NOTE: हमारे आदरणीय मोहन जी मस्जिद विवाद कर भारत विश्वगुरु बने गा, हम लोगों को सपना देखाते थे।उर्दु नाम वालो के सब्र का फल मिल गया, छ: साल पहले जिस न्यायालय में बाबरी जजमेंट के बाद मिठाई बटी था वहॉ पिछले मंगलवार को राकेश तिवारी ने जूता उछाल कर विश्वगुरु बना दिया।
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Post of 5th October 2025

“भारतीय उच्चतम न्यायालय के चीफ जस्टिस गवई पर वकील ने जूता फेंका”: शाकाहारी समाज

“सारे शहर को आग लगाकर, खुश तो बहुत आते हो नज़र
सोचा भी है खुद अपने घर, किस रस्ते से जाओ गे?”

कल का विशेष दिन और विशेष घटना जस्टिस गवई की तरफ किसी वकील ने जूता फेंका से मुझे कोई हैरानी नही हुई क्योंकि चार दिन पहले हमारे विश्व प्रख्यात दार्शनिक, धाराप्रवाह हिन्दी वाचक, संघ प्रमुख, डाकटर मोहन जी के संघ मुख्यालय नागपुर मे विजयदशमी के वार्षिकोत्सव पर राम नाथ कोविंद भूतपूर्व राष्ट्रपति तथा उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ वकील चीफ गेस्ट थे मगर वहॉ किसी सनातनी ने जूता नहीं फेंका।

यह जूता चीफ जस्टिस गवई पर नहीं पर यह अम्बेडकर पर फेंका गया है, क्योंकि दोनों मे बहुत समानता है।

यह अम्बेडकर की ग़लती थी जब संविधान बना तो उस में घर्म परिवर्तन के बाद भी उन को आरक्षण दिलवा दिया मगर न्यायालय में चीफ जस्टिस, जज, वकील आदि को जूता पहन कर जाने का प्रावधान रखा।

कल से ईलीट क्लास, सिविल सोसाइटी, नेता और इंटेलेक्चुअल्स जो जूता पर ढोंग कर रहे हैं उर्दू नाम वाले आप उसमे हिस्सेदारी न लें, क्योंकि यह जज साहेबान सनातन आस्था पर जजमेंट देते हैं, आप इस के भुगतोभोगी हैं।

#NOTE: अनुरोध है संविधान में संशोधन कर यह पारित किया जाये कि चीफ जस्टिस, जज, वकील सभी न्यायालय में नंगे पैर न्याय करें गे। कोई जूता पहन कर नहीं जाये गा, सब जूता जेब में रख कर जाये गें ताकि सब को न्याय मिले और सब का भविष्य सुरक्षित रहे।