Post on 28 August 2025

Parmod Pahwa साहेब 24-28 जनवरी 2015 के राष्ट्रपति बराक ओबामा के भारत के चार दिन के दौरा के ड्रामा के बाद मेरे लिखे को भारत के बर्बादी का कारण आजतक याद करते हैं।

हम ने हमेशा यह भी लिखा “संघ से मुस्लिम को नुक़सान कम है, फ़ायदा ज़्यादा है और बहुसंख्यक हिन्दु समाज को फ़ायदा कम, नुक़सान ज़्यादा है”, जो आज हम सब को ट्रम्प के द्वारा भारत सरकार पर लगाये 50% टैरिफ़ से नज़र आ रहा है।

#कल The Economist, London ने एक लेख हेडलाइन “Humiliation, vindication, and a giant test for India. Trump has triggered a trade and defence crisis: how should Modi respond? से छापा है।लेख का आरम्भ इन शब्दों से किया है:

“अपमान, दोषसिद्धि और निर्णायक परीक्षा, तीनों एक साथ झेलना असामान्य बात है।लेकिन आज भारत की यही दुर्दशा है।राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मई में भारत के साथ हुए विवाद के बाद पाकिस्तान को गले लगाकर, और अब भारत पर चीन से भी ज़्यादा टैरिफ लगाकर, 25 साल की कूटनीति को बेकार कर दिया है।दुनिया के सबसे ज़्यादा आबादी वाले देश और पाँचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले इस देश के लिए इसके गंभीर परिणाम होंगे।”

*”ट्रम्प द्वारा भारत का अपमान दो रूपों में किया गया है। 27 अगस्त को, रूसी तेल खरीदने के लिए भारत की निंदा करने के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारतीय वस्तुओं पर मौजूदा 25% आयात शुल्क के अतिरिक्त, 25% टैरिफ अधिभार लगा दिया।क्रेमलिन यूरोप को पेट्रोलियम बेचता है और चीन सहित दुनिया का अधिकांश हिस्सा रूसी तेल भी खरीदता है, मगर यह अधिभार ऐसा प्रतीत होता है जैसे भारत को विशेष दंड के लिए चुना गया है।”

*”दूसरा अपमान ट्रम्प का पाकिस्तान के साथ प्रेम-संबंध है। उन्होंने व्हाइट हाउस में फील्ड मार्शल असीम मुनीर के साथ भोजन किया है, जो इसके कट्टरपंथी सैन्य प्रमुख और वास्तविक शासक हैं, जो ट्रम्प को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए प्रस्तावित कर रहे हैं।”

*”भारत के मूल सुरक्षा हितों का समर्थन करने में अमेरिका की विफलता और व्यापार पर उसे दंडित करने के फैसले ने भारतीयों के बीच विश्वास को तोड़ दिया है….”

#NOTE: प्रधानमंत्री के जापान विज़िट पर जापान के टीवी NHK के आज के ख़बर को निचे विडियो में सुनिये।उस का कहना है 2020 मे ट्रम्प के अहमदाबाद यात्रा पर “नमस्ते, नमस्ते” का नारा लगा था, मगर अब टैरिफ़ के वजह कर वह रिश्ता “खट्टा” हो गया है।इसी प्रेशर के कारण प्रधानमंत्री जापान की यात्रा कर रहे हैं।

Please keep comments respectful.
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Some comments on the Post
Parmod Pahwa सर हमने अभी लिखा था की चीन से पहले जापान जाना और रूस की मदद से पहले युकराइन का साथ देना, सोवियत संघ टूटने का जश्न मनाना किसी खुसकुशी जैसा है। आज चीन ने 26 गेस्ट्स का नाम जारी किया है जिसमे पड़ोसी शहवाज़ शरीफ भी है मगर हमारे पूर्व प्रचारक जी नही है ।

  • Mohammed Seemab Zaman, Parmod Pahwa साहेब, 26 गेस्ट 3 September को Military Parade में शामिल हो गें और यह परेड 80 साल पहले चीन के People’s army द्वारा जापान की फौज को खदेड़ने का जश्न मनाया जा रहा है।

Shahnawaz Ansari, सर सही कहते हैं आप लेकिन यह पढ़े लिखे बहुसंख्यक लोग आज तक समझ नहीं पा रहे हैं। जिस देश में रहते हैं जब वो देश बर्बाद होगा तो नुकसान उस देश में रहने वाले सभी लोगों का होगा लेकिन यह इसी सोच में खुश होते रहे है कि अल्पसंख्यको को टाइट किया जा रहा है, मुस्लिमों को दबाया जा रहा है। कभी देश के गिरते हालात को यह पढ़े लिखे बहुसंख्यक भी समझ नहीं पाए।
यह भी इनकी बड़ी मूर्खता है रही की जो पोपुलेशन में ज़्यादा होता है बर्बादी का असर उसी पर ज़्यादा पड़ता है। इन्हें बस मुस्लिमों की बर्बादी का ख़्वाब नजर आता रहा लेकिन अपनी बर्बादी को शुतुरमुर्ग की तरह नजरअंदाज़ करते रहे।
इन्हें मुसलमानों की बर्बादी की पड़ी है लेकिन मुसलमानों की तारीख के बारे में बहुत कम जानते हैं, मुसलमान गाज़ा जैसे हालात में भी ईमान के सहारे जिंदगी गुज़ार लेता है।

“ये ग़ाफ़िल-ए-दुनिया न समझ सके कभी,
कि मौत से खुलता है हयात-ए-जावेदाँ का दर।
दुनिया पे मत रीझ ऐ दिल, ये सराए फ़ानी है,
बाक़ी जहाँ की जन्नत, ही असल कहानी है।”