The Post of 29 November 2025

मक़बूल फ़ेदा हुसैन के आर्टवर्क के लिए لوح و قلم (लौह व क़लम) के नाम से क़तर में एक बने म्यूज़ियम का उद्घाटन कल क़तर के अमीर तमीम की बेगम ने किया।

इस म्यूज़ियम के कई बिल्डिंग हैं, एक पर لو (लौ), दूसरे पर ح(हे) और तीसरे एमारत पर قلم (क़लम) लिखा है। इस म्यूज़ियम का नक़्शा ख़ुद फ़ेदा हुसैन ने अपनी ज़िंदगी मे बनाया था और इस को Qatar Foundation ने बनाया है। यह म्यूज़ियम क़तर के एजुकेशन सिटी में बना है जिस मे एक कैफ़े, एक गिफ़्ट शॉप, एक लाइब्रेरी और क्रिएटिविटी हब भी है।

हुसैन का आर्ट और आर्टिस्टिक विज़न दुनिया हज़ारों साल याद रखे गी। ऐसा आर्टिस्ट किसी मुल्क मे 400-500 साल में एक पैदा होता है। इस म्यूज़ियम में हुसैन के 100 से ज़्यादा काम नुमाइश के लिए रखे गये हैं।

हुसैन हिन्दुस्तान में पैदा हुऐ और यहॉ ही वह मशहूर हुऐ मगर मरते वक़्त उन की नागरिकता क़तर की थी।क़तर के अमीर तमीम की मॉ ने उन को क़तर की नागरिकता दिया और उन को क़तर और लंदन में दो बड़ा स्टूडियो बना कर दिया ताकि वहॉ वह अपने बाक़ी ज़िंदगी आर्ट, पेंटिंग और क़ुरआन की आयत की कैलिग्राफी करें।

हुसैन के क़ुरआन के कैलिग्राफी की मालिक तमीम की मॉ है और बाक़ी आर्ट क़तर फाउंडेशन की सम्पत्ति है। कहा जाता है कि उन के आर्ट से ज़्यादा ख़ूबसूरत उन की “अरबी कैलीग्राफ़ी” है।

ओटोमन एम्पायर की अरबी कैलीग्राफ़ी आज तुर्की के हर बड़े शहर में फ़ोटो कापी कर क़िमती दामों में फ़्रेम मे बिकती है, हम ने भी कई अरबी कैलीग्राफ़ी मौलाना रोम के शहर कौनिया में ख़रीदी है, जो नायाब है।
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Comments on the Post

Dilawar Khan, बेचारे हुसैन,,, मुस्लिम होने की वजह से इतना बड़ा कलाकार भी नफरत का शिकार हो गया ,,, आम नागरिक की क्या औकात है.

Kunwar Abdul Qadir अली सरदार जाफ़री उर्दू साहित्य के एक प्रख्यात शायर, आलोचक, संपादक और प्रगतिशील लेखक थे, जिनकी रचनाएँ सामाजिक न्याय, मानवता, प्रेम और क्रांतिकारी चेतना से गहराई से जुड़ी हुई हैं। प्रगतिशील लेखक आंदोलन के महत्वपूर्ण स्तंभों में शामिल जाफ़री ने उर्दू कविता को नई वैचारिक स्फूर्ति और सामाजिक सरोकार दिए। उनकी नज़्मों और ग़ज़लों में आम आदमी की पीड़ा, संघर्ष और उम्मीदें बेहद प्रभावशाली ढंग से उभरती हैं। आज उनका जन्मदिन है। उन्हें जन्म दिन पर खिराज अक़ीदत पेश करते हैं 🌸

Abdul Bari जब किसी को गोबर से लगाव हो जाए तो उसे कोहिनूर भी गोबर से फीका लगता है । यही भारत की सच्ची तस्वीर.

Kamil Khan भारत के हिंदुत्व ने कोहनूर फेक कर अपने चेहरे पर गोबर मल लिया, अफसोस सख्त अफसोस

Ahmad Samani बेमिसाल.

Murtaza Khan शानदार

Salimuddin Ansari सुकरात ने ज़हर का प्याला पिया। मक़बूल फ़िदा हुसैन को जबरन जिलावतनी मिली। अब यह भी इतिहास का हिस्सा बन गया। अमेरिका के साबिक़ उपराष्ट्रपती कमला हैरिस को गर्व से हमारे अंडाभक्त भारती मूल के कहते हैं ।जिसका बाप क्रिस्चियन था शौहर यहूदी।

Shambhu Singh Le डॉ धाराप्रवाह. हमने भी तड़ीपार को चाणक्य बना रक्खा है 😀.

  • Mohammed Seemab Zaman, देख लिजिये डॉ धाराप्रवाह अपने को सांस्कृतिक संस्था कहते हैं और कैसे दूसरे लोग संस्कृतियों को अपने यहॉ लेजा कर विश्वगुरु बन रहे हैं। 15 लाख आबादी के मुल्क क़तर में यह दूसरा म्यूज़ियम बना है।