Post of 28 September 2025

मलेशिया के पूर्व प्रधानमंत्री महाथिर मोहम्मद 100 साल के हो गये।अल्लाह उन की अच्छी सेहत और लम्बी उम्र दे।

इस मौक़ा पर Al Jazeera ने उन का इंटरव्यू लिया है।यह एक यादगार इंटरव्यू है और सैकड़ों साल दुनिया इस को कोट करती रहे गी।

#महाथिर मोहम्मद, चीन से जुड़ी अपनी यादों और चीन के भविष्य पर अपने राय रखते हुआ कहा है कि “उन का मानना है कि चीन अपने विशाल बाज़ार (large market) और मेहनती आबादी (hard-working population) के वजह कर अमेरिका को पीछे छोड़कर “number one country in the world” (दुनिया का नंबर एक देश) बन जाएगा।

#गाज़ा में नरसंहार को 1990 के दशक में बोस्निया में हुए युद्ध के दौरान मुसलमानों और द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नाज़ी जर्मनी द्वारा यहूदियों की हत्या को एक तरह का कहा।

महाथिर ने ग़ाज़ा के नरसंहार पर कहा, “शायद सदियों तक इसे भुलाया नहीं जा सकेगा”

उन्होने कहा कि वह इस बात से हैरान हैं कि इज़राइल के लोग, जिन्होंने खुद यहूदियों का नाज़ी जर्मनी द्वारा नरसंहार देखा था वह कैसे बदले में अरब लोगों का नरसंहार कर सकते हैं।

महाथिर इंटरव्यू में अफ़सोस कर रहे थे कि “इसराइल ने नाज़ी जर्मनी द्वारा किये गये नरसंहार के अनुभव से कुछ नहीं सिखा”

#NOTE: *इस में हम एक जुमला जोड़ दे, पश्चिमी देश दूसरे जंग अज़ीम (WWII) में जर्मनी और जापान के यूरोप मे नरसंहार बहुत जल्द भूल गया था, जिस को इसराइल और रूस ने यूरोप को 80 साल बाद फिर याद दिला दिया।

*उम्मीद है अरब और चीन भविष्य मे नरसंहार से दुनिया को सैकड़ों साल के लिए नजात देला दे गें।

ہاں ایک حقیقت ہے کے معلوم ہے سب کو
تاریخِ امم جس کو نہیں ہم سے چھپا تی

(اقبال کے “ضرب کلیم” کی نظم تقدیر)
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Some comments on the Post

Mohammed Seemab Zaman

ہاں ایک حقیقت ہے کے معلوم ہے سب کو
تاریخِ امم جس کو نہیں ہم سے چھپا تی(اقبال کے “ضرب کلیم” کی نظم تقدیر)

“हॉ एक हक़ीक़त है के मालूम है सब को
तारीख़ ऊम्म जिस को नही हम से छुपाती”

पोस्ट मे हम ने जो आख़िर में इक़बाल की नज़्म तक़दीर का एक शेर लिखा है, उस का मोहम्मद बदिउज़्ज़मॉ साहेब ने लिखा है कि “ तारीख़ का मुताअला हम को बताता है कि तक़दीर क़ौमों के “अमल” पर भी हमेशा नज़र रखती है। और उस की नज़र इतनी तेज़ है जैसे तलवार की धार। तारीख़ से हमें यह भी मालूम होता है कि जो क़ौमें फ़ितरत के क़ानून की पाबंदी करती हैं वह अपनी तक़दीर बदलती रहती हैं और जो नाफ़रमानी करती हैं ख़ुदा उन्हें मिटा देता है।”
Note: ऊम्म, अमन की जमा है।