Post of 1st April 2025

“अगर फ़िरदौस ब रु ए ज़मीन अस्त
हमीन अस्त ओ हमीन अस्त ओ हमीन अस्त” (नूर जहॉ)

ईद के मौक़े पर Mozaffar Haque साहेब ने एक बहुत ही शांदार पोस्ट मुग़ल बादशाह नूर उद्दीन मोहम्मद सलीम जहांगीर की बेगम “नूर जहॉ” पर किया था। उसी पोस्ट पर हम ने यह जाना की नूर जहॉ कामयाब मलका के साथ साथ एक बहुत पाये की फ़ारसी ज़बान की शायरह भी थीं।

मुग़ल शहज़ादा खुर्रम जिन को हिन्दुस्तान की तारीख़ शाहजहाँ के नाम से जानती और याद रखती है, जब लाहौर की मुहिम से कश्मीर लौटा, उस वक़्त नूर जहाँ भी वहीं थी, जहांगीर का इंतक़ाल हो चुका था और खुर्रम बादशाह भी बन चुका था। कश्मीर में डल झील के किनारे शाहजहाँ के हुक्म पर एक बाग़ बनाया गया था। वहीं नूर जहाँ ने शाहजहाँ के लिए एक दावत का इंतज़ाम किया। इस मौक़ा पर गुलू काराओं ने बादशाह और बाग़ की तारीफ़ में नग़मे गाया वह नूर जहॉ का कलाम था।

मेरा अपना ख़्याल है कि मुग़ल के बनाये ताजमहल की तरह नूर जहॉ का यह “कलाम” भी फ़ारसी में एक नायाब तखलीक़ है:

چہ خوش وقت و خرم سر زمین است

چہ جاۓ امن و کنج دل نشین است

بنفشہ می کند عنبر فشانی

کہ بوۓ جعد زلفِ عنبرین است

نگاہِ نرگس مخمور و حیران

زبان و کامِ سوسن شکرین است

زبادِ خوش خرام و آبِ شیرین

مرا اے ہم نشین عین الیقین است

بیا ساقی بدہ گر مہربانی

دلم فارغ ز فکر کفر و دین است

خوشا کشمیر و گلزارِ دل آرا

زمینِ غیرت صد ملکِ دارا

خوشا باغِ سلیمان ملکِ کشمیر

بہشت دل پذیر و عالم آرا

زہے کشمیر و باغِ شالامارش

ہواۓ سرو و شمشاد و چنارش

خوشا رقصیدن فوارہ از جوش

بہ صحنِ پر سرودِ خوش گوارش

بہارِ جاودانی شالامار است

ہواۓ خلدِ او دلِ زندہ دار است

بہ کوہش ہا روان چو آبِ حیوان

بہ پائش آب ڈلِ آئینہ دار است

اگر فردوس بروۓ زمین است

ہمین است و ہمین است و ہمین است

*हिन्दी मे इस शांदार फारसी कलाम को कौमेंट मे पढें।

#NOTE: मेरी दादी के मुरिस आला (مورث اعلیٰ)शेख मोहम्मद दाऊद बादशाह जहाँगीर के वक़्त मे आमिल बहाल हो कर देहली से सीतामढ़ी, बिहार भेजे गये थे और वह वही बस गये।
====================

अगर फ़िरदौस ब रु ए ज़मीन अस्त
हमीन अस्त ओ हमीन अस्त ओ हमीन अस्त

चे ख़ुश वक़्त ओ ख़ुर्रम सर ज़मीन अस्त
चे जाए अम्न ओ कुंज ए दिल नशीन अस्त

बनफ़्शा मी कुनद अम्बर फ़शानी
के बू ए जाद ज़ुल्फ़ ए अम्बरीन अस्त

निगाह ए नर्गिस मख़मूर ओ हैरान
ज़बान ओ काम ए सौसन शक्रीन अस्त

ज़ बाद ए ख़ुश ख़राम ओ आब ए शीरीन
मरा ऐ हम नशीन, ऐन अल यक़ीन अस्त

ब्या साक़ी ब देह गर मेहरबानी
दिलम फ़ारिग़ ज़ फ़िक्र ए कुफ़्र ओ दीन अस्त

अगर फ़िरदौस ब रु ए ज़मीन अस्त
हमीन अस्त ओ हमीन अस्त ओ हमीन अस्त

ख़ुशा कश्मीर ओ गुलज़ार ए दिल आरा
ज़मीन ए ग़ैरत सद मुल्क ए दारा

ख़ुशा बाग़ ए सुलैमान मुल्क ए कश्मीर
बहिश्त ए दिल पज़ीर ओ आलम ए आरा

अगर फ़िरदौस ब रु ए ज़मीन अस्त
हमीन अस्त ओ हमीन अस्त ओ हमीन अस्त

ज़हे कश्मीर ओ बाग़ ए शालामारश
हवा ए सर्व ओ शमशाद ओ चनारश

ख़ुशा रख़्शीदन रक़सीदन फ़व्वारा अज़ जोश
ब सेहन ए पुर सरोद ए ख़ुश गवारश

अगर फ़िरदौस ब रु ए ज़मीन अस्त
हमीन अस्त ओ हमीन अस्त ओ हमीन अस्त

बहार ए जावेदानी शालामार अस्त
हवा ए ख़ुल्द ए ऊ दिल ए जिंदा दार अस्त

ब कोहश हा र’वान चु आब ए हैवान
ब पायश आब डल ए आईना दार अस्त

अगर फ़िरदौस ब रु ए ज़मीन अस्त
हमीन अस्त ओ हमीन अस्त ओ हमीन अस्त