The Post of 21 September 2025
तलमीज़ अहमद सऊदी अरब में भारत के दो बार राजदूत रहे हैं।इन्होंने सऊदी अरब और पाकिस्तान के स्ट्रैटेजीक पैक्ट पर वही कहा है जो हम ने अपने पिछले पोस्ट में लिखा था:
सऊदी अरब और पाकिस्तान का डिफेंस पैक्ट को “सिंदूर” से कोई ताल्लुक़ नहीं है।तलमीज़ साहेब ने भी पूरे इनट्रविव में यही कहा कि अरब मुल्क हमेशा सिंदूर को पसंद करते हैं।अरब से पिछले पचीस साल से बहुत अच्छा संबंध है।
कर्ण थापर ने बार बार एक ही बात (constantly harping on) कर मुँह में उँगली देकर इन से बोलवाना चाहा कि यह पैक्ट भारत के खिलाफ है।उस पर यह बिगड़ गये और कहा कि “Please shift your lens away from New Delhi and try to see the bigger picture that is right there in front of us.”
फिर कहा तुम बहुत narrow view of the scenario से सोंचते हो।हॉ सही है कि हम लोग को पड़ोस में एक नया मोड़ आया है, हम उस का अध्ययन करें मगर तुम इस को हिन्दुस्तान के नज़रिए से पैक्ट को देख कर वक्त बर्बाद नहीं करो।
#NOTE: *भारत के यही ठेकेदार बुद्धिजीवी लोग सऊदी-पाकिस्तान के सैन्य पैक्ट को भारत के खिलाफ बता कर फिर वही हिन्दु-मुस्लिम राजनीति को बढ़ावा दे रहे हैं, मगर यह दिल के अंधे चीन जो एलओसी को एनएसी बना कर उलंघन कर रहा है, राज्य का नाम पता बदल रहा है, उस का नाम नहीं लेते हैं।
*यह लोग बदली दुनिया को मान्ने से अभी भी इंकार कर रहे हैं। इन को नज़र नहीं आ रहा है कि मध्य पूर्व अब पश्चिमी देशों को भी गर्दान नही रहे हैं।यह लोग भारत का भूगोल भूल कर वही पाकिस्तान-मुसलमान का रट लगा रहे हैं ताकि ध्रुवीकरण होता रहे मगर भारत का भविष्य क्या होगा इस की इन को कोई चिंता नहीं है।
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“PLEASE SHIFT YOUR LENS FROM NEW DELHI…..”: PART-II
हम ने क़तर बमबारी पर “America’s Qatarstrophic Error” के हेडलाइन से एक पोस्ट किया था, जिस में लिखा था, ट्रम्प ने बमबारी की सहमति देकर, अमेरिका के लिए Catastrophic (विनाशकारी) कार्य कर दिया है।
हम ने यह भी लिखा था कि इस बमबारी ने इसराइल को तो कमज़ोर कर ही दिया मगर अमेरिका के भविष्य को खतरे में डाल दिया।ट्रम्प तो इस को भुगते गें ही मगर इस का असर ट्रम्प के बाद भी लम्बे वक़्त तक अमेरिका महसूस करे गा।
तलमीज़ साहेब ने अपने इन्टरविव में कहा इसराइल ने क़तर पर बमबारी कर एक strategic blunder किया है।इस से इसराइल को कोई फ़ायदा नहीं हुआ।
तलमीज़ अहमद कहते हैं कुछ वक़्फे से गल्फ़ में अमेरिका के लिए deep dis-trust देखा जा रहा था। पुरा मध्य पूर्व ख़ास, सऊदी अरब अपने सुरक्षा के लिए वैकल्पिक रणनीतिक साझेदारी खोज रहा है।
इसराइल तो मध्य पूर्व में अमेरिका के साख को ख़त्म कर ही रहा था मगर क़तर पर बमबारी last straw होगा।
आख़िर में हम तलमीज़ साहेब के 29 मिनट के पूरे विडियो को इस्लाम हुसैन साहेब के शेर पर ख़त्म करते हैं कि वह तो हम को मिटा देना चाहते हैं मगर हम उफ़ तक न करे? ऐसा कलेजा कहॉ से लायें?
“वो हमें मिटा देना चाहें और हम उफ़ भी न कर पाएं
बताओ तो सही यारो ऐसा कलेजा हम कहां से लाएं” (इस्लाम शेरी)
