The Post of 26 September 2025
चार दिन पहले Sanjay Nagtilak साहेब ने Panjab R Meshram का लिखा और दो मूर्ती की तस्वीर देकर पोस्ट किया:
“पहली मूर्ती बुद्ध की है। दूसरी मूर्ती किसकी होगी? स्वाभाविक है कि वो भी बुद्ध की है।आर्य ब्राह्मण उसे खजुराहो की विष्णु की बता रहे हैं,जबकि विष्णु की कोई भी प्राचीन मूर्ती कहीं भी नहीं मिली है।भारत में मूर्ती कला की शुरुआत ही बुद्ध से होती है।मुस्लिमों ने बुत (बुद्ध) तोड़ा है, विष्णु नहीं। जो अस्तित्व में होगा वही न तोड़ा जाएगा!”
यह बुद्षिठ लोग भी लिखते हैं कि मुसलमानों ने बुद्ध (बुत) की मूर्ती तोड़ी क्योंकि वह भी उसी न्यायाधीशों के समाज मे पले बढ़े हैं जहॉ न्यायालय की धज्जियाँ उड़ा कर मस्जिद को तोड दिया जाता है और फिर बिना किसी सबूत के मोहर लगा कर मंदिर बना दिया जाता है।
यह जो तस्वीर Meshram साहेब ने दिया है उन को हम बता दें बुद्ध के हज़ार साल पहले मिस्र सभ्यता में जो मूर्ती पहाड़ों और पत्थरों पर कुरेदी गई थी उसी की नक़ल भारत में ग्रीस से आये सिकंदर के नस्ल के सम्राट अशोक और उन के बाद के नस्लों के लोगों ने अफ़ग़ानिस्तान से लेकर खजुराहो तक नक़ल किया है।
इन बुद्दष्ठ बुद्धिजीवियों और कथित न्यायाधीशों से कोई पूछे की आज मिस्र, लेबनान, सीरिया, जोर्डन, इराक़, ईरान में मुस्लिम बहुसंख्यक समाज हैं मगर उन लोगों ने कभी मिस्री और मेसोपोटामिया सभ्यताओं की प्राचीन मूर्ती या प्राचीन शिव या सूर्य मंदिर को नष्ट नहीं किया बल्की आज भी $1 billion का म्यूज़ियम बना कर रख रहे हैं तो भारत में मुसलमान क्यों बुद्ध की मूर्ती को तोड़ें गें या मंदिर को तोड कर मस्जिद बनाये गें।
#NOTE: आज तक भारत में $1 billion का मंदिर नहीं बना मगर मिस्र के वर्तमान मुस्लिम शासक ने अपने प्राचीन बुत के लिए $1 billion का म्यूज़ियम बना दिया। बुद्ध के मानने वालो से अनुरोध है दूसरों की तरह मूर्ती या मंदिर तोड़ने की #झूठी कहानी नहीं गढ़िये।मुसलमानों को मजबूर नहीं किजये के वह सत्य कहने लगें कि बुद्धिष्ठो ने अरब (मिस्र) की मूर्ती #चोरी कर बुद्ध की मूर्ती बनाई है।
नीचे मिस्र के मंदिर के मूर्तियों का एक विडियो है और मेषराम साहेब की दो मूर्ती की तस्वीर है।देखये दोनों में कितना समानता है, मगर विडियो की मूर्ती 3500-4000 साल पुरानी है जबकि बुद्ध की मूर्ती 2000 और खजुराहो की मूर्ती 1300 साल पुरानी है।
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Some comments on the Post
Mohammed Seemab Zaman, Sanjay Nagtilak साहेब से हम ने जाना कि महात्मा बुद्ध की मूर्ती गौतम बुद्ध के मरने के दो सौ साल बन्नी शुरू हुई।
गौतम बुद्ध की मूर्ती जो अफ़ग़ानिस्तान में तोड़ी गई थी वह दुनिया के 8 देशों के तालिबान की हरकत था न कि अफ़ग़ान मुस्लिम तालिबान ने तोड़ी थी।अभी तालिबान हुकूमत ने पहाड़ में टूटी मूर्ती को फिर से बनवा कर लगा दिया है और उस के सुरक्षा का कड़ा प्रबंध किया है ताकि फिर कोई शरारती तत्व यह काम कर उन को बदनाम न करे।
- Mohammed Seemab Zaman, Zuber Mansuri साहेब, जब टूटी थी,उस के बाद ही मूर्ती वहॉ पर बना कर लगवा दी गई थी। तालिबान ने नहीं बनाई। तालिबान ने टूटी मूर्ती का सब जमा कर सुफेद चादर में रख कर विडियो मे देखाया है।
Sanjay Nagtilak, Mohammed Seemab Zaman sir, सबसे पहले बुद्ध मूर्तियों का निर्माण आज के भारत में नहीं बल्की पाकिस्तान गंधार में हुआ था, यह हम नहीं दुनिया के इतिसकार कहते हैं और डॉ अब्दुल समाद ( Archaeological Dipartment Of Pakistan) कह रहे हैं. आज पाकिस्तानात में बौद्ध धर्म को मानने वाले जादा नहीं हैं, फिर भी वो अपनी प्राचीन विरासत को बचाने और उसके संरक्षण पर ध्यान दे रहे हैं, इसके लिए हम पाकिस्तान को धन्यवाद देते हैं.
Sandeep Solanki राम मंदिर की खुदाई में बौद्ध अवशेष मिले थे यह बात पक्की है यूनाइटेड नेशंस से भी भारत सरकार को एक चिट्ठी मिली थी जिसमें डेढ़ महीना खुदाई रुक गई थी परंतु भारत सरकार ने यह कहकर कि यह भारत देश का आंतरिक मामला है मामले को रखा दफा कर दिया अब यह कहना कि बौद्ध विहार को तोड़कर बाबरी मस्जिद बनाई गई यह तो जांच का विषय है परंतु मस्जिद को तोड़कर मंदिर बनाया गया यह सभी ने देखा है जो फैसला दिया गया वह भावनात्मक रूप में दिया गया
भारत देश में आज भी कितने भी बड़े-बड़े मंदिर हैं उन मंदिरों में रखी गई मूर्ति बुद्ध की है जिन्हें विष्णु के नाम बताकर उनकी पूजा की जाती है भारत रामकृष्ण या विष्णु की धरती नहीं है भारत भूमि बौद्ध और जैन की भूमि है
मुसलमानों के भारत में आने से पहले ही भारत के बौद्ध विहारों को तोड़कर मंदिरों में तब्दील कर दिया गया था.
Islam Hussain मैं ये नहीं मानता कि बाबरी मस्जिद किसी मूर्ति/बौद्ध मूर्ति स्थल को तोड़कर बनी थी।
मेरी पत्रकारिता के दौर में यह मामला उठा इसलिए हम सब बहुत प्रभावित थे तो मेरी भी इसमें दिलचस्पी रही। बाबरी राममंदिर वार्ता में हमारे कुछ साथी जुड़े भी रहे। जो अब इस दुनिया में नहीं है।
1984 में पत्रकारों का एक सम्मेलन अयोध्या में आयोजित हुआ था उसके कुछ पत्रकारों को मस्जिद का ताला खुलवाकर अन्दर मूर्ति दिखाई गई थी उन पत्रकारों में मैं भी था। मेरी रूचि बाबरी मस्जिद के आर्किटेक्चर को लेकर थी। तब तक मैं कई राज्यों के मंदिरों को देख चुंकि था।
बाबरी मस्जिद के निर्माण और उसके आर्किटेक्चर को देखकर मेरा और मेरे साथ के हम पत्रकारों का आब्जर्वेशन था कि मस्जिद बनाने में वहां मौजूद जो भी मैटेरियल रहा होगा उसका इस्तेमाल किया गया होगा।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले में यह बात साफ हो गई कि मीरबाकी ने बाबरी मस्जिद तो ज़रूर बनवाई थी लेकिन किसी मंदिर को तोड़कर नहीं बनाई थी।
यहां यह याद दिलाना ज़रूरी है कि मोदी सरकार द्वारा काशी कारीडोर बनाने के वक्त कितने मंदिर तोड़े गए और उनके विग्रह कहां कहां कैसे कैसे पड़े रहे और कहां गए। इस बात के मद्देनजर बाबरी मस्जिद के आर्किटेक्चर को समझना चाहिए।
Mohammed Seemab Zaman, Islam Hussain साहेब, आप और हम या कोई दूसरा मुस्लिम यह माने गा ही नहीं के बाबरी मस्जिद मंदिर तोड कर बनाया गया है। यह तो 1857 में मुस्लिम हकूमत ख़त्म होने के बाद यह षड्यंत्र रचा गया और 150 साल में तोड़ दिया गया।
यह हम आप सब जानते हैं कि किसी मुस्लिम के घर में नेमाज़ के वक्त नेमाज़ पढ़नी हो तो उस की इजाज़त ले कर पढ़ो वरना नेमाज़ नहीं होगी। हज़रत उमर ने भी बेतुलमोक़द्दस हासिल करने के बाद चर्च में नेमाज़ पादरी के कहने पर भी नहीं पढ़ी बल्की दूसरे खुले जगह पढ़ी।
जहॉ तक आर्किटेक्चर का सवाल है तो भारत के हर मस्जिद का 3 गुंबद की मस्जिद मुग़ल आर्किटेक्चर है। तुर्की का एक गुंबंद है।
एक बात आप से पुछनी है कि क्या वह मस्जिद की एमारत दो घंटे में तोड़ी जा सकती थी?
- Sanjay Nagtilak, Islam Hussain सर, बाबरी मशीद के नीचे नहीं बल्की उसके बाजू में खुदाई हुई तब Archaeological Dipartment को जो स्तंभ, वेदिका और मूर्तिया मिली वो राम मंदिर के अवशेष नहीं बल्की बौद्ध विहार के अवशेष थे, इस लिए बाबरी मशीद विवाद से हिंदू कोई लेना देना नहीं था।
Sanjay Nagtilak, Mohammed Seemab Zaman सर,
आप सभी मुस्लिम को न्याय का मसीहा घोषित मत कीजिएगा, अफगाणिस्तान में तालिबान ने भगवान बुद्ध की मूर्ति बॉम्ब से उडा दिया था उसे दुनिया ने देखा हैं.
दुसरा चार साल पहले पाकिस्तान में एक मुस्लिम घर बना रहा था जमीन की खुदाई में उसे बुद्ध की मूर्ति मिली तो उस मूर्ति को Archaeological Dipartment Of Pakistan को देने के बजाए हतोडे से तोड दिया।
रही बात अयोध्या के बाबरी मशीद और राम मंदिर विवाद की वहा पुरातात्विक साक्ष्य बजाए आस्था और जमीन पर कब्जा किसने किया इस पर फैसला सुनाया गया ![]()
खुदाई में मिले स्तंभ, वेदिका और मूर्तियाँ साफ़-साफ़ बता रही थीं कि यह राम मंदिर नहीं, बल्कि बौद्ध विहार के अवशेष हैं। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने बौद्ध याचिकाकर्ताओं से कह दिया “भाई साहब, यह खेल सिर्फ़ हिंदू-मुस्लिम को एंट्री है, आप इसमें घुसने की जुर्रत कैसे कर बैठे?”
इतना ही नहीं, बौद्ध पक्ष ने सबूतों के साथ न्याय मांगा तो उल्टे उन पर ही जुर्माना ठोक दिया गया। वाह रे न्याय! इतिहास और पुरातत्व तो मूक दर्शक बने रह गए, जबकि जज साहब ने अपनी आस्था को सबूतों से ऊपर रखकर फैसला सुना दिया। अब सवाल यह है, की क्या यह अदालत है, या फिर आस्था और राजनीति का केंद्र?
- Mohammed Seemab Zaman, Sanjay Nagtilak साहेब, हाल में अफ़ग़ानी तालिबान ने उसी मूर्ती की तस्वीर दिया है, please उस विडियो को देख लिजये।
- दूसरी बात हम हमेशा लिखते है कि अफ़ग़ानिस्तान मे 8 देशों का आतंकी संगठन तालिबान था, उसी में से एक ने यह काम किया था ताकि अफ़ग़ान तालिबान को बदनाम किया जाये। वही 8 मूल्को का तालिबान मस्जिद में नेताजी को बम से उड़ाता था, वह आप भूल गये।
- ISIS ने भी सीरिया में कुछ साल पहले मूर्ती उड़ाया है, मगर अब लोगों को पता चला कि ISIS क्लिंटन ने बनाया था।आज फाल ऑफ काबुल के बाद 7 मुल्क का तालिबान और ISIS आखरी साँस ले रहा है।

