Post of 3rd October 2025
पुटिन फँस गये हैं, इस वजह कर double game खेल रहे हैं। संघीतकार double game बंद करें, वरना बुरी तरह फँस जायें गें।
हमारे अपने रिश्तेदार, भाई बहन हम से कहते हैं कि अरब मुल्क क्यों चुप है? क्यों नही फल्सतीन पर बोलते हैं और अरब को बुरा कहते हैं।
मगर हम कहते हैं अरब और मुस्लिम मूल्क इस वजह से चुप हैं कि एक “फितना” मे उल्छ कर उस से “बड़ा फितना” न पूरे खित्ते में खड़ा कर दिया जाये। अरब या मुस्लिम मूल्क इस मसला को हज़ारों साल के लिए हल करना चाहते हैं, इस वजह कर चुप हैं।
हम ने 7 October के बाद कहना शुरू किया है कि फ़लस्तीन अब मुसलमानों का मसला नहीं है अब यह यूरोप का मसला हो गया है क्योकि 1945 के बाद रूस ने यूरोप (यूक्रेन) पर जंग थोप दिया है।
पुटिन को तीन साल के यूक्रेन जंग के बाद मुस्लिम दुनिया याद आ रही है। पुटिन को याद है यह वही पाकिस्तान है जिस ने सोवियत संध को अफ़ग़ानिस्तान में उलझा कर 1920 के क्रांति को हमेशा के लिए 1989 मे ख़त्म किया और पॉच मुस्लिम देश सोवियत संघ से आज़ाद हुऐ।
संघ के बहकावे में आकर यह नहीं भूलिये गा कि अगर पाकिस्तान को हमारे पूर्वज (संघीतकार) पश्चिम मे एक “Buffer State” नही बनवाते तो 1979 के बाद सोवियत संघ भारत माता में आ जाता।
आज पुटिन “हुब्बे अली” मे पाकिस्तान को गले नही लगा रहे हैं बल्की वह 1876, 1918, 1920, 1923 के बाद की बदली दुनिया को पहचान गये हैं।
#Note: हम एक दिन में दो पोस्ट नही करते हैं मगर आज दो किया है क्योंकि कपड़ा से पहचाने वालों का संगठन इतिहास-भूगोल पढ़ें।देश भक्ति करें, न की रोज़ नया नारा लगा कर सिंधु घाटी के सभ्यता के प्राचीन भारत को बरबाद करे।
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Some comments on the Post
Abdul Raheem 1876, 1973, 2014…
Dilawar Khan जी बिल्कुल सर,,, भारत का पढ़ा लिखा मुस्लिम भी जियो पॉलिटिक्स में बिल्कुल कोरा है,,, जिसको देखो अरब देशों को कोसता रहता है,,, खैर,,, अरब देश अपनी हिक्मत अमली से कामयाब हो रहे है,,, बेशक अरब देशों ने बहुत बड़ा फीतना ख़त्म कर दिया है,,,, रूस यूक्रेन सानेहा कोई छोटी मोटी चीज़ नहीं ,,, संघितकार ग्रुप भी न्याय की बात नहीं करता, हमेशा झूठा प्रचार करता है, संघितकार ग्रुप भूल गया है कि ये समय 80 और 90 का दौर नही है,,,, हम फिर कहते है देश की तरक्की के लिए संघितकारो को भारतीय मुस्लिम को गले लगाना ही पड़ेगा,,
Talwinder Singh Sahota समझ नहीं आती भारत के मुसलमान कौन से निजाम में आजाद रहने का सपना देखते है अरब जैसे गुलामो के ग़ुलाम या कुछ और भी चल रहा है मन में हैदराबाद जैसा.
Parmod Pahwa सर इन शॉर्ट मे सिर्फ ये कहना है कि अब कई नए बफर स्टेटस की जरूरत बनाई जा रही है और यहाँ पुतिन फ़सा नही है वो भी अपना हिस्सा मांग रहा है ।ऐसा कैसे कि यू एस और चीन दोनो आपस में बांट ले !
Ambuj Gupta Bhartiya सर अफ़सोस से कहना है कि बंटवारा अमेरिका और चीन-रूस में ही होगा और अरब भी गुलामी ही करेंगे। आराम से आ जाएंगे तो ठीक, वरना हथियार की बदौलत आएँगे। एशिया में से धर्म की गुंडागर्दी जबरिया ख़त्म की जानी चाहिए। ये कट्टर धार्मिक दुनिया के लिए एक बड़ा खतरा हैं। ये नहीं माने तो दुनिया को शट डाउन कर देगा कोई। प्रेम से सबको मनाना असंभव है। इलाके बांटकर फिर संभाला जाना चाहिए।
