Post on 30 August 2025
हमारे आदरणीय, विश्व प्रख्यात दार्शनिक, धाराप्रवाह हिन्दी वाचक, इतिहासवेत्ता, भाषाविद, संघ प्रमुख, डॉक्टर, मोहन जी को 75 साल लगा भारतीय संविधान को मानने मे और आज यह RSS@100 मे यह कह गये, “We the people”, we are one people.
#जब चीन 75 साल में “विश्वगुरु” हो गया और विस्तारवादी होकर हमारे राष्ट्र के राज्य और उस के 14 जिला का “नाम-पता” बदल दिया तो आज हमारे आदरणीय यह कहने पर मजबूर हो गये कि शहरों और रास्तों के नाम-पता नहीं बदलना चाहिये।कल तक तो यह अंग्रेज़ों के बनाये मुग़ल गार्डन का नाम बदल कर आनंदमयी और गौरवान्वित हो रहे थे, जब के भारत में मौजूद सब फूल मुग़ल ले कर आये।
#आदरणिय मोहन जी हमेशा दूसरे भारतीय को “आक्रांता” कहते हैं ताकि कोई शोधकर्ता इन को आक्रांता नहीं कहे। मोहन जी को पता है कि यह भारत में आसमान से नहीं टपके बल्कि मिस्र से खदेड़े गये तो भारत में पनाह लिया और वहॉ के भगवान और पुजा पद्धति को भी साथ लेकर आये।
भारत मे जिस की गर्दन छोटी और कमर के निचे चौड़ा वह मिस्र से आये लोग हैं और जिस की गर्दन लम्बी और कद-काठी लम्बा, वह ऊपर (अरब, ईरान) से आये “सिंधु घाटी सभ्यता” में के लोग हैं, यहॉ तक के तामिल नाडू के द्रविडियन लोग भी।
#मोहन जी को याद होगा, मिस्र के राष्ट्रपति नासिर ने यहूदियों को कहा था कि यहॉ से जब यूरोप गये तो काले गये और हज़ार साल के बाद जब लौटे तो गोरे हो कर आये।सिर्फ़ रंग बदला मगर “सोंच-समझ” नहीं बदला, वही “संक्रीण और तंग” रहा। मगर भारत में जो मिस्र से आये वह भारतीय आब-व-हवा के कारण काले ही रहे और सोंच समझ भी तंग ही रहा।
#अफ़सोस यह है कि आदरणीय को सौ साल लगा यह कहने मे “इस्लाम जब भारत में आया, उस दिन से इस्लाम यहॉ है और रहे गा।इस्लाम नहीं रहे गा ये सोचने वाला हिन्दु सोंच का नहीं है।”
अब हमारे मोहन जी को ज्ञान प्राप्त हो गया कि 1400 में इस्लाम का कठिन समय 1876 के डेढ़ सौ साल के बाद ख़त्म हो गया, जब इस्लामी देश विश्वगुरु अमेरिका का $1 trillion-2 trillion में डाक (auction) लगाने लगे।
#NOTE: समस्या यह नही है कि प्राचीन मिस्री, मेसोपोटामिया, सिंधु घाटी या चीन की हुआंग हु सभ्यताओं पर शोध की कमी है बल्कि समस्या यह है कि हॉल में मौजूद हज़ारों शिक्षित लोग भी अनपढ लोगों की तरह ताली बजाते हैं।
मोहन जी से इल्तिजा है कि संघ के मुख्यालय में “प्राचीन सभ्यताओं” के पठन-पाठन के लिए एक शोध संस्था की स्थापना करें ताकि आज के आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (AI) के युग में “आक्रांता” स्वयंसेवक अनपढ की तरह ताली न बजाये क्योंकि भारत में #कमल का फूल भी मिस्र से आये आक्रांताओ के साथ भारत आया और #मंदिर भारत मे इस्लाम आने के बाद 700 AD से बन्ना शुरू हुआ।
