The Post of 16 February 2026
राष्ट्र स्वयंसेवक संघ (RSS) को गुज़रती दुनिया पर शोक मनाना चाहिए, क्योंकि उस की सौ साल की “मुस्लिम तिरस्कार” की सोंच नाकामयाब हो गई।
1876, 1923 या 1945 या 1948 की दुनिया तो 1973 अरब-इसराइल जंग के बाद तेल के 365% बढ़े दाम से बदल ही रही थी मगर जिस तेज़ी से 2014 में भारत में संघ की सरकार बन्ने के 12 साल में बदली है, वह हमारे आदरणीय संघ प्रमुख मोहन जी या उन के वरिष्ठ विचारकों और प्रचारकों ने कभी ख़्वाब में भी नही सोंचा होगा।
कल Munich Security Conference में यूरोप के नेताओं और अमेरिका के विदेश मंत्री रोबियो ने साफ-साफ़ लवज़ो में कह दिया “दुनिया बदल चूकी है, अब पूरानी दुनिया वापिस नहीं आने वाली है” यानि WWII के बाद का पश्चिमी वैश्विक ऑडर खत्म हो गया।
अब मल्टीपोलर वर्ल्ड ऑडर शुरू हो गया जिस में चीन-मिडिल ईस्ट-रूस-तुर्क की entry हो गई है। भारत मुस्लिम तिरस्कार के कारण इस मल्टीपोलर दुनिया में कहीं पर नहीं है।
*मेरा मानना है कि भारत 1992 बाबरी कांड के बाद चीन के तरह ग्लोबलाइज़ेशन का फ़ायदा नही उठा सका, केवल प्रवासी मज़दूर दुनिया में भेजा जो वापिस भारत नहीं लौटा और न वह कोई विदेशी निवेश भारत में लाने में सफल हुआ।
*संघ के सरकार के बारह साल में भारत की मज़बूत बैंकिंग संस्था सरकार को चुनाव जिताने मे क्रेश कर गया, जिस बैंकिंग ने 1969 के nationalisation से भारत में कृषि मे क्रांती लाया था।आज भारत का बैंक विदेशियों को बेचा जा रहा है जिस को “ग्लोबल बैंकिंग” होना चाहिये था।
*संघ के सरकार की दूसरी बड़ी नाकामयाबी उन के विचारक और प्रचारक समझते थे कि इकोनॉमिक ग्रोथ: पेड़ से गिरती है।यह बेवकूफ सौ साल की सोंच से “नफ़रत” फैला कर यूरोप और अमेरिका से निवेश और फैक्ट्री ला कर विकास का पेड़ पैदा करने का ख़्वाब देखते रहे मगर मिडिल ईस्ट, तुर्की, चीन और रूस ने दुनिया बदल दिया।
#NOTE: यह जो दिल्ली मे AI Impact Summit चार दिन का हो रहा है, सरकार भारतीयों के ऑंख में फिर धूल झोंक रही है।जो सरकार बारह (12) साल मे राजधानी में जनता को बिजली नहीं दे सकी, कोई न्यूक्लियर पावर प्लांट नहीं लगाया, 140 करोड़ जनता के लिए कोई Make in India मोबाइल या कम्प्यूटर नहीं बना सकी, वह फ्रांस के राष्ट्रपति मैकरोन जो Made in France का नारा लगा रहे हैं उन को बोला कर AI का सर्वर लगाने का ख़्वाब देख और देखा रही है।
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Some comments on the Post
Mohammed Seemab Zaman लोग कहता होगा कि हम हर बात में संघ को क्यों address करते हैं? तो हम लोगो को बता दें, संघ भारत के हर गली-कूचा-चौराहे, संस्था और बुद्धिजीवियों के दिल मे बसता है और यही लोग भारत के बरबादी का कारण हैं। अगर यह लोग सही मे पढ़े लिखे, दुनिया देखा open minded intellectuals होते तो आज भारत 21वी शताब्दी मे चीन से बडी अर्थव्यवस्था होती और कोई अगडा-पिछडा-दलित आरक्षण के लिए नही रोता।कोई भारतीय विदेश मे मज़दूरी नही करता, सब चीन के लोगो के तरह सुखी सम्पन्न होते।
- Mohammad Shahid, Mohammed Seemab Zaman भारतीय बुद्धिजीवी आज भी संघ को केंद्र में रखकर बात करने को तैयार नहीं हैं।
विद्रोही किसान संघ को अब मैं राक्षसी सुवर संघ बोलता हूं। ये भारतीय समाज का कोढ़ हैं। लेकिन अभी कुछ दिन पहले आपने राहुल गांधी को संघ का साथ लेकर सत्ता में आने की सलाह दी थी। उसकी वजह?
Sandeep Solankiश्रीमान जी अमेरिकी राजदूत का सेना के मुख्यालय में जाने का क्या मतलब है ? उधर साहब भी इजरायल जाने वाले है ? …कुछ तो पक रहा है …एप्स्टाइन वाले वाले बिल्लू बादशाह बिल गेट्स भी भारत आये है …इन सब का क्या मतलब है???
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