POST OF 4 July 2025
तक़रीबन 150 साल बाद, कल दुनिया की बदली तवारीख का यादगार दिन था।रूस दुनिया का पहला मुल्क हुआ जिस ने “अफ़ग़ानिस्तान इस्लामी एमारत” के तालीबानी सरकार को मान्यता दिया। आज मॉस्को में अफ़ग़ानिस्तान का सिफारतखाना 2021 के बाद फिर खुल गया।
यह वही रूस है जिस के राष्ट्रपति ब्रेज़नेव को 1977 के बाद काबुल को क़ब्ज़ा कर #विश्वगुरु बन्ने का भूत सवार हो गया था। कहा जाता है कि ब्रेज़नेव ने 1978 मे पोलिटब्यूरो मे कहा कि हम लोग अफ़ग़ानिस्तान को एक हफ़्ता में क़ब्ज़ा कर लें गें मगर गोरबाचोव और येलस्टीन ने विरोध किया। फिर 1979 मे ब्रेज़नेव ने KGB का झूठा दस्तावेज़ पेश कर पोलिटब्यूरी को गुमराह कर राज़ी कर लिया और वह मार्च 1979 में अफ़ग़ानिस्तान में फ़ौज भेज दिया।
*1979 के बाद दस साल सोवियत यूनियन अफ़ग़ानिस्तान मे अलक़ायदा और तालिबान से लड़ता रहा और आख़िर मे 1988 मे गोरबाचोव ने फ़ौज वापिस बुलाने का फ़ैसला लिया और 1989 मे सोवियत संघ टूटना शुरू हुआ 1992 मे हमेशा के लिए ख़त्म हो गया।
*बाक़ी की कहानी तो सब को मालूम है 15 अगस्त 2021 मे “फॉल ऑफ काबुल” तक, जब अमेरिका की फ़ौज 18 साल बाद बेइज़्ज़त हो कर रात में टॉर्च के रौशनी मे भागी।
*यह वही अफ़ग़ानिस्तान है, जहॉ शहर बदखशॉ से सिकंदर लोटा था। बक़ौल हमारे आदरणीय मोहन जी भारत पर इसी रास्ते आक्रांता आये मगर हमारे मोहन जी भूल गये कि अंग्रेज़ बंगाल से आये और भारत की राजधानी 54 साल कोलकाता रही।
1987 में भारत के प्रधानमंत्री राजीव गॉघी ने कहा था कि मेरे पूर्वज बहुत दूरंदेश थे जो भारत को बॉट कर पाकिस्तान बफर स्टेट बना दिया वरना सोवियत संघ अफ़ग़ानिस्तान के बाद भारत आ जाता। मगर राजीव गांधी ने यह इतिहास नहीं याद रखा कि चंग़ेज़ ख़ान को भारत इसी रास्त से आये लोगों ने आने नही दिया।
#NOTE: खैर अब “the circle is complete” और रूस भी घुटना टेक कर तालीबानी इस्लामी एमारत को मान कर #विश्वगुरु बन्ने का ख़्वाब देखना बंद कर दिया क्योंकि चीन शिंजियांग से लेकर कज़ाखस्तान होते हुऐ अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान तक रेल और रोड बना कर विश्वगुरु बन रहा है।
दुआ है हमारे आदरणीय, शर्मा जी और दूबे जी के दिल में रौशनी आ जाये और सौ साल बाद की बदली दुनिया में अपने सौ साल पुरानी सोंच को बदलें।
