Post of 6th October 2025

* चार दशकों से संघीतकार और उनकी सरकार आसाम मे बंगाली घुसपैठिया नारा लगा कर नॉर्थ ईस्ट के विकास को बरबाद कर अशांति पैदा किया और आज चीन वहॉ के राज्य और ज़िला का नाम-पता बदल रहा है।

* बिहार में नीतीश कुमार ने विकास पैदा किया तो अब संघीतकार वहॉ घुसपैठिया का नारा लगा कर विकास को बर्बाद करना चाहते हैं ताकि वहॉ अशांति पैदा हो।

*बिहार मे घुसपैठिए के नारा से पता चला कि 6000 सुंदर महिलाएँ जो नेपाली घुसपैठियॉ है उन के पति देव बिहारी हैं।

*सब से दुख की बात यह है कि संघ ने जो इमामे हिंद श्री राम के मंदिर का अभियान चला कर कश्मीर से कन्या कुमारी तक अशांति फैला कर देश का जीडीपी जला कर चीन को विश्वगुरु बनाया, उन की पत्नी माता सीता श्री का जन्म जनकपुर नेपाल में हुआ था इसीलिए वह जानकी भी कहलाती थीं।वह नेपाल की रहने वाली थी तो क्या संघीतकार अब उन्हें भी घुसपैठिया बताएंगे।

*संघ के इस घुसपैठ के नारा ने दूसरा बड़ा दुख हम भारतीयों को यह दे दिया कि दशकों से भारत में दशहरा के शुभ अवसर पर संघ के मुख्यालय नागपुर में हिन्दु समाज के लोग धर्मपरिवर्तन कर बुद्ध घर्म अपनाते आये हैं। सिद्धार्थ जिन्हें दुनिया गौतम बुद्ध के नाम से जानती है, उन का गोत्र गौतम था और वह नेपाल के लुम्बिनी में पैदा हुऐ मगर बिहार के “गया जी” में ज्ञान प्राप्त किया। क्या संधीतकार उन को भी घुसपैठिया बताएँ गें?

#NOTE: संघीतकारो और केंचुआ से विनम्र प्रार्थना है कि यह घुसपैठियॉ का नारा बंद करे, ताकि देश में हज़ारों साल से चले आ रहे सामाजिक समरसता बना रहे और देश विकास पैदा कर विश्वगुरु बन जाये और चीन को बॉर्डर पर मुँह तोड़ जवाब दे।
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Some comments on the Post
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Mohammed Seemab Zaman तीसरी दुख की बात यह सूना है कि हमारे नीतीश कुमार जो २० साल से बिहार के मुख्यमंत्री हैं उन की माता श्री भी नेपाल से थीं।

  • Siraj Khan  सर मेरे भाई की सादी 2023 में नेपाल में हुई है.

DrShakil Ahamed Moin ये सभी कर्म नफरत की चाशनी में हिंदुत्व को बढ़ावा देने के लिए है, वैसे ज़रूरत इस बात की है कि सभी समझदार हिन्दू/मुस्लिम भाई अपने मेल जोल के रिवायती इतिहास पर होशियारी के साथ चलते रहें!

Lalit Mohan घुसपैठिए ओर कोई नहीं इन्हीं के भाजपाई संघी है।हर कहीं जब चुनाव होता है वे इनके साथ उस प्रदेश मे निकल पड़ते है। दिल्ली दंगों में दिल्ली के बाहर के घुसपैठिए ज्यादा थे। पुलिस स्वयं अपने नाम पट्टी उतार कर घुसपैठिए बन जाती हैं। नागरिक सुरक्षा, अधिकार जाएं भाड़ में..!