Post of 25th May 2025
सौ साल के बाद बदली दुनिया मे, संघ की सरकार ने झक मार कर मुस्लिम नेताओं का सरकार में बहाली कर तुष्टिकरण शुरू कर दिया।
उर्दु नाम वालो को याद होगा, हम चुनाव के समय कहते थे कि अपना नेता पैदा करो और कांग्रेस, समाजवादी या मायावती के पार्टी में दरी बिछाना बंद करो, क्योंकि दुनिया बदल गई है, अब हर पार्टी तुम को “घर से बोला कर नेता बनाये गी, तुम को मंत्री बनाये गी”
*आज की खबर है कि एमआईएम के फायर ब्रांड नेता विश्व प्रख्यात, दाढ़ी-टोपी धारी, धाराप्रवाह बोलने वाले बैरिस्टर ओवैसी को बहरीन भेजा गया है ताकि वह भारत का पक्ष रखें। नतीजा क्या होगा, इस पर हम टिका-टिप्पणी नहीं करें गें!!
मेरा कहना है, उर्दु नाम वालों आप भारतीय गंदी राजनीति को तीन तलाक़ दिजये और पढ़ाई-लिखाई पर ध्यान दिजये, विदेश जाईये और बदले geopolitical order का लाभ उठाईये, अपना व्यवसाय किजये।
*जिस तरह से संघ की सरकार ने मुस्लिम नेता बहाल करना शुरू किया है, यह आप को व्यवसाय भी अब करने देगें। दंगा-नवमी कर जीडीपी जलाये गें तो 80% बहुसंख्यकों का नुक़सान हो गा। देखा नहीं गाय-गोबर के राज्य उत्तर प्रदेश मे केरल के “LuLu Hypermarket” को व्यवसाय करने के लिए बुला लिया गया।
*अब संघ और उन की सरकार, झक मार कर मुस्लिम व्यावसायिको को पैदा करे गी क्योंकि चीन की कई बड़ी कम्पनियों का मालिक मुस्लिम है, जैसे Alibaba Group, Tencent, Sinopec आदि इत्यादि।
Sinopec सऊदी अरब के Yanbu शहर मे Aramco रिफाइनरी का विस्तार कर रहा है और अरामको चीन के Fujian शहर मे Sinopec के साथ मिल कर रिफाइनरी और गैस मे $3.9 billion का निवेश कर रहा है।
*अमेरिका में छोटे निवेशकों को सलाह दिया जा रहा है कि आप कम से कम $250 में चीन की कम्पनी Tencent का तीन शेयर @$66 ख़रीद कर रख लिजये, बहुत लाभ होगा। अमेरिका में अदानी के शेयर का क्या हाल हुआ वह हम-आप सब जानते हैं।
#NOTE: उर्दु नाम वालों आप अपने को सड़क छाप राजनीति से दूर किजये। पढ़िये-लिखये, अंग्रेज़ी, अरबी, तुर्की या मैंडरिन ज़बान सिखाये। दुनिया तीन-चार सौ साल के लिए बदल रही है, अपना अख़लाक़ अच्छा रखिये, जय हिन्द।
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Some comments on the Post
Mohammed Seemab Zaman लानत है, सौ साल की सोंच पर। भारत का हज़ार साल का इतिहास और भूगोल बदल रहे थे मगर झक मार कर फिर उसी इतिहास और भूगोल को याद करने लगे। सब्र किजये बहुत सुंदर भारत बने गा।
ग्यारह साल से कोई मुस्लिम MP नही बनाया, कोई मंत्री नहीं बनाया मगर आज दूसरे पार्टी के मुस्लिम नेताओं को सरकार बचाव-देश बचाव अभियान पर खोज खोज कर ला रहे हैं।
Salim Khan आपकी सबसे खरी बात यही है कि उर्दू नाम वालों को अपने को शिक्षा क्रांति में तपा डालना चाहिये । जिससे आगे बढ़ने के रास्ते खुलते जाने वाले हैं, यहां नहीं तो बाहर बहुत मौक़े इंतजार कर रहे हैं। बाक़ी दंगा नवमी आपके कहे अनुसार उनका कुआं का मेंढक बने रहने का समय लम्बा चल सकता है क्योंकि ब्रैनवॉश लोगों का मानसिक संतुलन लम्बे समय तक ख़राब रहता है।
Kadar Khan संघी सरकार ला एतबार है। एक तरफ मुस्लिम मुल्कों में डेलिगेशन भेज दिया और दूसरी तरफ मुस्लिम बस्तियों में बुल्डोजर चल रहे हैं मुस्लिम की आज भी लिचिंग की जा रही है। ये सिर्फ लीपापोती कर रहा है। इसकी खुद हिम्मत नहीं है कहीं जाकर अपना पक्ष रखने की इसलिए मुस्लिम नेताओं के कंधे पर बंदूक रखकर चला रहा है। नफ़रत की फसल तैयार हो चुकी है और जो बोया वही काटने का वक्त आ गया है। कहीं किसी भी मुल्क से कोई सम्बन्ध नहीं बनने वाले हैं। ये दिखावा करने का कोई रिजल्ट नही आएगा।
Murtaza Khan Dr ज़मान साहब पिछले एक महीने में बहुत तेजी से घटित घटनाओं ने संघियों के दिमाग़ में छाये हुए शेखी के बादलों को कुछ हद तक डायलूड कर दिया है, तभी इनको मुस्लिम याद आये हैं। और रही सही कसर ट्रम्प के गल्फ देशों के दौरे ने पूरा कर दिया।
Zuber Mansuri देर आए पर दुरुस्त आए – शशि थरूर और ओवैसी जाएंगे विदेश ऑपरेशन सिंदूर के बारे में बताने।
ये BJP की नफ़रत भरी राजनीति की हार है। BJP जो कांग्रेस मुक्त भारत और मुस्लिम मुक्त राजनीति के नाम पर झूठ और नफरत की आग लगाते हुए देश को सालों पीछे करने के बाद।
आज अपनी नफरती राजनीति से U Turn लेते हुए। कांग्रेस नेता शशि थरूर सहाब और मुस्लिमो की आवाज़ ओवेसी सहाब को विदेश जाने वाले डेलिगेशन के साथ भेज कर ये संकेत दे रही है कि उसने झूठ और नफ़रत की जो आग लगाई थी उसे बुझाना ही होगा क्योंकि सरकार को अहसास हो गया है कि *मुस्लिमों को अवसर के बजाए आपदा* मान कर इतिहास की सबसे बड़ी गलती की है।
क्योंकि मुस्लिम के खिलाफ नफरत और लव जिहाद, हिजाब बेन, शरीयत में हस्तक्षेप, waqf बिल और हज़रत मोहम्मद ﷺ की शान में गुस्ताखी के कारण 10 सालों में खाड़ी देशों से कोई इन्वेस्टमेंट नहीं आया जबकि अरब मुल्कों ने अफ्रीका और यूरोप में अपने ख़ज़ाने का मुंह खोल रखा है।
खैर हम सरकार के इस क़दम से खुश हैं और अल्लाह से दुआ है कि इन राजनेताओं को अक़्ल आये जिससे देश समृद्ध हो और आपसी भाईचारा बना रहे।
Abdullah Haroon आपकी कही हुई बात सच हो गई मुस्लिम डेलिगेशन का साथ जाना आपकी बात को सच्चा साबित करता है भले उसका रिजल्ट कुछ भी हो लेकिन जिस तरह से अपने उर्दू नाम वालों को बदले हुए माहौल में अपने आप को आगे बढ़ने का जो रास्ता दिखाया है क्या वह आसान है पहली बात तालीम की कमी दूसरी बात रिज्क की कमी और तीसरी सबसे बड़ी बात लगन नहीं है तालीम के लिए अब सवाल यह बनता है आने वाली नस्ल की तरक्की के लिए एक नस्ल को कुर्बानी देनी होगी अपनी जिंदगी का सब कुछ शरमाया उन पर खर्च करना होगा क्योंकि बिना खर्च के कुछ नहीं होगा और इस बदले हुए माहौल में यह सब करना बहुत मुश्किल है लेकिन नामुमकिन नहीं
