10 December 2025
पिछले हफ़्ता से दुनिया में हल्ला था कि अमेरिकन कम्पनी Netflix हॉलीवुड की मशहूर कम्पनी Warner Brothers Discovery (WBD) को $83 billion कैश देकर ख़रीदने को तैयार हो गया है। यह WBD वही है जिस ने दो मशहूर फ़िल्म Harry Potter और Batman भी बनाया है।
अचानक कल बाज़ार मे खबर आई की Paramount Pictures ने हॉलीवुड के इतिहास में सबसे बड़े $108 billion का बिड्स कर WBD को ख़रीदने की पेशकश किया है।
पैरामाउंट के बिड्स में चौंकाने वाली बड़ी बात यह है कि इस $108 billion मे 60% कैश सऊदी अरब, अबू धाबी और क़तर पैरामाउंट को दे कर हॉलीवुड की इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी में इन्टर कर रहे हैं ताकि भविष्य मे गल्फ़ देशों की इकॉनमी को दुनिया के स्पोर्ट, एंटरटेनमेंट और टूरिज़्म से मज़बूत किया जाये।
गल्फ़ के शासक पिछले दो दशक में पश्चिमी देशों के स्पोर्ट, मिडिया और न्यूज़ आदि में पैसा लगा कर अपने को दुनिया मे सिर्फ़ सॉफ्ट पावर तक महदूद नहीं किया है बल्कि सपोर्ट में अगले साल अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको मे होने वाले FIFA फुटबॉल कप में सऊदी अरब, क़तर, ईरान, जोर्डन, मिस्र, टूनिशिया, अल्जीरिया, मोरक्को, सेनेगल आदि भाग ले रहे हैं।
NOTE: नीचे कल के FT, London के लेख में सऊदी अरब, यूएई और क़तर द्वारा भारी मात्रा मे Media, News, Sport मे निवेश का ज़िक्र है। Aljazeera, CNN, Sky News तो हम जानते थे मगर Euronews देख कर हम को ताज्जुब हुआ।
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Some comments on the Post
Abdul Raheem ऐसे ही नहीं तमाम बड़े मीडिया चैनल अरेबिक में आने लगे. आज CNN (USA), BBC (UK) France 24 (France), DW (Germany), CGTN (China), RT (Russia), ये सब सारी ख़बरें, अरबी में भी देने लगे हैं. लिखने, guide करने वाले कौन लोग होंगे, बताने की ज़रुरत नहीं है.
(और, हमारे यहाँ जो National Educational Policy, NEP-2020 बनाई गई है, उसमें Thai, Korean वगैरह लैंग्वेज का ज़िक्र है, सिखाने के लिए, लेकिन Arabic का नहीं. जबकि अरबी तो UN की भी official language है.)
- Mohammed Seemab Zaman, Abdul Raheem साहेब, अरबी, फ़ारसी ज़बान भारत मे 17 National languages में है, Hindi official language है।
हम तो Euronews देख कर चौंक गये की यहॉ भी पैसा लगाया है। हम अक्सर Euronews TV देखते हैं।अगर News चैनल में पैसा नहीं लगाता तो आँज फ़लस्तीन का मार-काट को Aljazeera documentation कर ICJ में ले जाकर genocide साबित नहीं कर पाता। यह मार-काट तो 1948 से चल रहा है मगर अब इसी सब News चैनल से दुनिया ने देख लिया, दूसरे तो इस को छुपा देते थे।
Shekh Shakil Alam, Mohammed Seemab Zaman सर अब उर्दू नाम वाले रोना धोना शुरू करेंगे कहेंगे देखो देखो सऊदी, दुबई कतर, अब ये लोग फिल्मों में पैसा लगा रहे है उसके बाद कहेंगे ये यहूदी है अय्याश है, अमेरिका का गुलाम है ![]()
इनका कुछ नहीं हो सकता सर कुछ नहीं
- Mohammed Seemab Zaman, Shekh Shakil Alam साहेब, आप ने सही लिखा है कि उर्दू नाम वाले रोना-धोना शुरू करे गें मगर उन कुओं के मेंढक को पता नहीं होगा कि अगर बम्बई में महबूब स्टूडियो, कमाल अमरोही स्टूडियो या K. Asif का studio नहीं होता तो क्या बॉम्बे में मुस्लिम माली तौर पर मज़बूत होते और दिलिप कुमार 63 फ़िल्म में काम कर के अमर हो जाते और बम्बई के “शरीफ” होते?
- क्या कभी भारत मे यादगार तारीख़ों मुग़ल आज़म फ़िल्म बनती, रज़िया सुल्तान बनती, पाकीज़ा वगैरह बनती? क्या इन फ़िल्मों में सेक्स या उर्यानियत नज़र आती है?
- Shekh Shakil Alam Mohammed Seemab Zaman बिल्कुल आती है, जबकि ये खुद शाहरुख सलमान आमिर के फैन है और ईद का नमाज़ खत्म होते ही सिनेमा हॉल के तरफ दौड़ते है ये वही है लोग है जो एक दिन बिना गाना सुने नहीं रह सकते और अगर किसी लड़के लड़की का कोई वीडियो लिक हो जाए तो सोशल मीडिया पर पूरे दिन लिंक मांगे फिरते है लेकिन इनको अपनी कुंठा नहीं दिखती सऊदी की दिखती है क्यों कि इनके पीर मौलवी जो बोल दिए वही हरफे आखिर समझते है इसी लिए आज भारत में ऐसा हाल है। आज हर गांव में अक्सर मस्जिदें खाली मिलती है लेकिन फ़िक्र सऊदियों का है।
- Mohammed Seemab Zaman सही कहा, ईद के नेमाज़ पढ़ कर सिनेमा हॉल जाने वाले ही ज़्यादा रोयें गें। मगर इन लोगों को पता नहीं होगा कि तुर्की ने शांदार एर्तोगाल सिरियल बनाया तो कई ज़बान में दुनिया मे translation होकर लोगों ने खूब देखा और उस को देख कर दुनिया में बहुत से लोग #मुस्लिम हो गये। उस में तो कोई उर्सानियत या ग़लत लिबास नहीं था, अगर हो Hollywood के studio में बनता तो और कूबसूरत और कमाल का बनता।
Malick Shahid ये जितना पैसा यूरोप अमेरिका में लगा ले लेकिन थोड़ा इधर उधर किया तो वो पैसा यूरोप अमेरिका रिटर्न नहीं करता है. वेनेजुएला का हम सुने है इंग्लैंड का सुप्रीम कोर्ट फैसला दिया है कि वेनेजुएला का राष्ट्रपति हमें पसंद नहीं है इसलिए पैसा रिटर्न नहीं करेंगे वैसे ही अफगानिस्तान लीबिया के साथ भी हुआ है
- A.K. Siddiqui, Malick Shahid 9/11 में अमेरिका ने सऊदी प्रिंसों का अरबों डॉलर अमेरिकन बैंको में सीज कर दिया था,,इसके बाद सऊदी प्रिंसों ने पैसा अरब में ही लगाना शुरू किया बड़े बड़े मॉल और शॉपिंग सेंटर बनवाए उन्हें आइडिया नहीं था कि कहां इन्वेस्ट करें अब धीरे धीरे सही उपयोग कर रहे हैं,,फिर भी उन्हें अमेरिका और यूरोप में ज्यादा इन्वेस्ट नहीं करना चाहिए,,अमेरिका तो बहुत बड़ा चोर है,,,
- Anish Akhtar, Malick Shahid मुझे भी यही फील होता है कि अरब को यूरोप अमेरिका में पैसा नही लगाना चाहिये कभी कोई विवाद हो गया तो ये पैसा जप्त कर लेंगे जैसे रूस का किया हुआ है जबकि रूस हार्ड पवार है.
Murtaza Khan आज की तारीख़ में “आर्थिक पावर ” पर फोकस करना ज़रूरी है। मीडिया, सिनेमा और स्पोर्ट्स पर इन्वेस्टमेंट लॉन्ग टर्म में बहुत ही लाभकारी है। आपका आलेख पठनीय और विचारणीय है।
- Mohammed Seemab Zaman
- *अगर मीडिया मे २० साल से invest नहीं करता तो अभी फलस्तीन का मार-काट genocide declare ICJ नही करता या लोग नही बोलते।
- *अगर स्पोर्ट्स में नही करता तो आज 12 मुल्क FIFA में नहीं पहुंचते और क़तर FIFA में मोरक्को Semifinal नहीं खेलता।
- *अगर वर्ल्ड क्लास स्टूडियो मे invest नहीं करे गा तो १०-२० साल बाद भी हम आप वही सेक्स और उर्यानियत देखते रह जायें गें। इस WBD takeover से दुनिया मे फ़िल्म और animation में यह लोग new technology सीख कर अपने कल्चर पर फ़िल्म बनाये गें। हमारे यहॉ तो यह सब बात तो लोग सोंचता ही नही है।
- Murtaza Khan, Mohammed Seemab Zaman साहब absolutely correct
- Noorul Huda Baghban, Mohammed Seemab Zaman सर ये आपने बहुत गज़ब की बात लिखी है। FIFA World Cup हमने देखा तो स्पोर्ट्स से रिलेटेड इन्वेस्टमेंट समझ में आ गया था।
چودھری سخاوت Aston Villa bhi Egyptia Person ka hai. Aur bahut se club hain, Maine ek post dala tha kuchh din pahla.
Salman Siddiqui यह बिल्कुल साफ़ हो गया है कि खाड़ी देश अब सिर्फ़ तेल की ताक़त पर नही बल्कि दुनिया की कहानी और कल्चर पर भी अपना प्रभाव जमाने निकले हैं हॉलीवुड, स्पोर्ट्स और ग्लोबल मीडिया में अरब देशों का इतना बड़ा निवेश बताता है कि आने वाला दशक एनर्जी पावर का नही बल्कि नैरेटिव पावर का होगा. Harry Potter से लेकर Batman और FIFA से लेकर Formula-1 तक गल्फ़ देश सिर्फ़ बिज़नेस नहीं कर रहे, वे भविष्य खरीद रहे हैं
यह निवेश दिखाता है कि सऊदी, यूएई और क़तर अब मीडिया को मनोरंजन नहीं, बल्कि इन्फ्लुएंस, डिप्लोमेसी और ग्लोबल लीडरशिप का सबसे बड़ा हथियार मान चुके हैं. आज की दुनिया में जिसे नैरेटिव का कंट्रोल मिल गया. असल पावर उसी के हाथ में जाएगी
