Post of 20th June 2025

طہران ہو گر عالمِ مشرق کا جینیوا
شاید کرۂ ارض کی تقد یربدل جاۓ

जंग को आज एक हफ्ता हो गया और लोगों की ज़िंदगी 24 घंटा सायरन से सायरन के बीच गुज़र रही है।यह पहली बार हुआ है कि एक हफ़्ता में लोगों की ज़िंदगी 100% बदल गई है।खबर है कि एक हफ़्ता से किसी बड़े शहर में कोई बार नहीं खुला है।

BBC के पत्रकार कह रहे हैं कि 20,000 से ज़्यादा मकान और कार तबाह हो गया है।खबर है कि प्रजातंत्र के देश की सरकार लोगों को “देश छोड़ कर बाहर जाने के अधिकार से वंचित कर दिया है” क्योंकि पहली बार लाखों लोगों की देशभक्ति पर शक हो गया है।

इक़बाल के सौ साल पहले लिखे शेर में “तेहरान से उन की मुराद कोई ख़ास शहर नहीं था बल्कि इस्लामी मुल्क का एक शहर है”, क्योंकि सौ साल पहले League of Nations ने सारे इस्लामी मुल्कों को ग़ुलाम बना रखा था और वह पश्चिमी ताक़तों से नजात की दवा जेनेवा नहीं बल्कि इस्लामिक मुल्कों की एक जुट होने से धरती (कुर्रा-ए-अर्ज़) की तक़दीर बदलने की बात कही थी।

इक़बाल का यह शेर सच होता नज़र आ रहा है क्योंकि जेनेवा में जो बात हो रही है, उस से हल नहीं निकले गा और सौ साल बाद “तेहरान”, आलम-ए-मशरिक़ (METRIC) का वक़्त आ गया है।

“तेहरान हो गर आलम मशरिक़ का जेनेवा
शायद कुर्रा अर्ज़ की तक़दीर बदल जाये” (इक़बाल)

#NOTE: अरब के वाहिद प्रजातंत्र के देश मे मिडिया की आज़ादी ख़त्म हो गई है और वहॉ की कोई खबर बाहर नही आ रही है। हम आप जो देख रहे हैं वह सत्य नहीं है। इस पोस्ट पर विडियो “The Haaretz” अख़बार का है जिस ने क्षतिग्रस्त बिल्डिंग का Sketch दे कर बहुत कुछ कह दिया है।