Post of 16 May 2025

प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी दुनिया का पहला आतंकी संगठन मुक्ति वाहिनी नहीं बनाती तो बांग्लादेश 1971 में नहीं बनता; अगर बांग्लादेश नहीं बनता तो 1972 मे फलस्तीन में आतंकी संगठन PLO नही बनता; अगर PLO नही बनता तो अरब-इसराइल जंग 1973 में नही होती; अगर अरब-इसराइल जंग नही होता तो तेल का दाम नही बढ़ता; अगर तेल का दाम नही बढ़ता तो सोवियत संघ 1979 मे अफ़ग़ानिस्तान क़ब्ज़ा नही करता; अगर सोवियत संघ अफ़ग़ानिस्तान क़ब्ज़ा नही करता तो आतंकी संगठन अलक़ायदा और तालिबान नहीं बनता।

*अगर अलक़ायदा और तालिबान नहीं बनता तो सोवियत संघ 1989 में नहीं टूटता; अगर सोवियत संघ नहीं टूटता तो भारत में राम-मंदिर आंदोलन नहीं खड़ा होता; अगर राम मंदिर आंदोलन नहीं होता तो भारत रत्न नरसिम्हा राव बाबरी मस्जिद 1992 मे बम से नहीं उड़ाते; अगर नरसिम्हा राव बाबरी मस्जिद नहीं उड़ाते तो भारत का नक़्शा एलओसी को एलएसी बना कर नहीं बदलते; अगर एलओसी एलएसी नहीं होता तो चीन में विदेशी निवेश नहीं आता; अगर चीन मे विदेशी निवेश नहीं होता तो चीन विश्व का आर्थिक और सैन्य शक्ति नही बनता।

*अगर भारत रत्न नरसिम्हा राव बाबरी मस्जिद शहीद नहीं करते तो अटल बिहारी वाजपेयी 1998 में भारत के प्रधानमंत्री नहीं बनते; अगर वाजपेयी प्रधानमंत्री नहीं बनते तो 9/11 नहीं होता; अगर 9/11 नहीं होता तो अरब दुनिया अपना निवेश (डॉलर) अमेरिका से नहीं निकालता; अगर अरब दुनिया अपना डॉलर अमेरिका से नहीं निकालता तो दुबई, सऊदी अरब और क़तर मे विकास पैदा नहीं होता।

*अगर मिडिल ईस्ट अपना निवेश अमेरिका से नहीं निकालता तो 2007 मे अमेरिका में आर्थिक संकट नहीं होता; अगर अमेरिका में आर्थिक संकट पैदा नहीं होता तो बराक ओबामा 2008 मे अमेरिका के राष्ट्रपति नहीं बनते; अगर बराक ओबामा अमेरिका के राष्ट्रपति नहीं बनते तो 2011 मे अरब स्प्रिंग नहीं होता; अगर अरब स्प्रिंग नहीं होता तो 2014 मे भारत में संघ की सरकार ओबामा नहीं बनवाते और 2016 मे राष्ट्रपति अरदोगान का सेना तख़्ता पल्ट कर मरवाने का प्रयास नहीं करते; अगर अरदोगान का तख़्ता पल्ट हो जाता तो आज तुर्की दुनिया का “ड्रोन किंग” नहीं बनता; अगर तुर्की ड्रोन किंग नहीं होता तो 2020 मे आज़रबाइजान “नगोरनो काराबाग़” तीस साल बाद आर्मेनिया से नही जीतता।

*अगर भारत में संघ की सरकार 2014 मे नहीं बनती तो मिडिल ईस्ट और चीन यूरोप तथा अमेरिका में निवेश बंद नही करता; अगर अमेरिका में निवेश नहीं बंद होता तो अमेरिका का क़र्ज़ $21 ट्रिलियन जीडीपी से ज़्यादा नहीं होता; अगर अमेरिका का क़र्ज़ जीडीपी से ज़्यादा नहीं होता तो 2017 मे ट्रम्प अमेरिका के राष्ट्रपति नहीं बनते; अगर ट्रम्प राष्ट्रपति नहीं बनते तो 2020 मे अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान से शांति समझौता नहीं होता; अगर ट्रम्प-तालिबान का समझौता नहीं होता तो 2021 मे बाईडेन राष्ट्रपति नहीं बनते।

*अगर बाईडेन राष्ट्रपति नहीं बनते तो इमरान खान 15 अगस्त 2021 को “फ़ॉल आफ़ काबूल” करा कर अमेरिका को नंगा नहीं कर पाते; अगर फॉल आफ काबूल नहीं होता तो रूस फ़रवरी 2022 में यूक्रेन में द्वितीय विश्वयुद्ध के 75 साल बाद जंग फिर शुरू नहीं करता; अगर रूस जंग यूरोप पर नहीं थोपता तो 7 अक्टूबर 2023 नहीं होता; अगर 7 अक्टूबर नहीं होता तो ट्रम्प चार साल बाद दोबारा 2025 में राष्ट्रपति नहीं बनते।

*अगर ट्रम्प 2025 में राष्ट्रपति नहीं बनते तो अमेरिका-यूरोप का 75 साल बाद तीन-तलाक़ नहीं देता; अगर ट्रम्प यूरोप को तलाक़ नहीं देते तो मई 2025 को पाकिस्तान-भारत में चार दिन का जंगी झड़प नहीं होता; अगर भारत-पाकिस्तान का झड़प नहीं होता तो ट्रम्प “Full and immediate ceasefire” नहीं करवाते; अगर ट्रम्प भारत-पाकिस्तान में युद्धविराम नहीं करवाते तो उन का मिडिल ईस्ट का विदेशी दौरा “ऐतिहासिक” नही होता।

*अगर ट्रम्प का सऊदी अरब, क़तर, अबू धाबी का दौरा नहीं होता तो अरब दुनिया अगले दस साल मे अमेरिका मे $10 ट्रिलियन निवेश का वादा नहीं करता; अगर निवेश का वादा अरब नहीं करते तो अमेरिका सोवियत संघ की तरह टूट जाता; अगर अमेरिका सोवियत संघ की तरह टूट जाता तो चीन दूसरा अमेरिका हो जाता; अगर चीन दूसरा अमेरिका हो जाता तो अरब दुनिया अगले दस साल में आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस का दुनिया का केन्द्र नहीं बन पाये गा।

#NOTE: यह है दुनिया के जियोपोलिटिक्स की “टेक्टोनिक बदलाव” की कहानी जो 1971 से शुरू हुआ और ट्रम्प के मिडिल ईस्ट के चार दिन के दौरा के दौरान 16 मई 2025 को ख़त्म हुआ।

अब हम लोग 1886 के बाद “New Geopolitical Order” देखें गें जो “मिडिल ईस्ट-तुर्की-सेंट्रल एशिया-अफ्रिका” का युग सैकड़ों साल होगा (आमीन).
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Some comments on the Post

Mohammed Seemab Zaman अगर भारत-पाकिस्तान का युद्धविराम नहीं होता तो संघ की सौ साल की सोंच धराशायी नहीं होता; अगर संघ की सोंच धराशायी नहीं होती तो भारत के बुद्धिजीवियों के अंधे हो गये दिल में धीरे- धीरे रौशनी नहीं आती; अगर अंधे दिल में रौशनी नहीं आये गी तो भारतीय समाज मे सुख-शांति अगले कई दशक नहीं होगा …….

Mozaffar Haque This analysis is a fascinating and provocative exercise in geopolitical cause-and-effect, tracing the chain reactions of major global events over the last 50 years. By weaving together a complex web of international developments—from the creation of Bangladesh to the emergence of AI hubs in the Middle East—it presents an imaginative and interconnected narrative of how seemingly isolated decisions can trigger global shifts.
It boldly explores the “butterfly effect” of geopolitics, showing how one country’s internal choices can ripple across continents and decades. It succeeds in sparking critical thought about the hidden interdependencies in world affairs. It’s a compelling reminder that history is not just a series of events, but a dynamic system of actions and reactions.
[कभी कभी किसी टॉपिक पर इंग्लिश में ज़्यादा अच्छे एक्सप्रेशंस बनते हैं, इस लिए अपने तआससुरात को इंग्लिश में लिख दिया] मआज़रत के साथ।

Arif Kamal अगर भारत में 2014 में संघ की सरकार नहीं बनती तो चीन मिडिल ईस्ट यूरोप अमेरिका में निवेश बंद नहीं करते ।सर संघ की सरकार बनने से अमेरिका यूरोप में निवेश का क्या तालुक है ।निवेश बंद इसलिए हुआ क्योकि चीन ने तरक़्क़ी की और अपने ही यहाँ अपना पैसा लगाया और गल्फ़ को चीन में पैसा लगाने का मौक़ा मिला और अमरीकी दादागिरी ख़त्म होने की वजह से भी गल्फ़ ने अपना पैसा अपने यहाँ लगाया ।यूरोप की तरक़्क़ी चीन के व्यापार और वैज्ञानिक तरक़्क़ी की वजह से रुक गई क्योकि उनकी जगह उनसे बेहतर टेक्नोलॉजी का माल चीन उनसे सस्ता बनाने लगा ।हारते जहाज़ पर कौन दाव लगाए इसलिए इन्वेस्टमेंट भी यूरोप में नहीं हुआ ।
संघ की सरकार से इसका रिलेशन नहीं समझ आया सर
Mohammed Seemab Zaman संघ की सरकार से इसका रिलेशन जल्द समझ मे आये गा जब यह भी आजान देने लगें गें। मैकरोन इस महीना के आखिर मे इन्डोनेशिया जा रहे हैं ताकि Minerals वहॉ से मिले मगर उस के पहले शी जिंपिंग इन्डोनेशिया जा रहे है। अब यूरोप और चीन मे होड़ होगा कि कौन इन लोगो को अपना allies बना कर रखता है।
कल इंगलैड ने निवेश नही होने की वजह कर media मे foreign investment 25% allowed कर दिया ताकि UAE इंगलैड का सौ साल पूराना अखबार The Telegraph का शेयर धारक बन जाये…
हम यह पोस्ट तीन दिन से लिख कर रखे थे और सोंचा था जब ट्रम्प वापस जायें गें तो कल रात मे पोस्ट करें गें मगर वह आज गये तो सुबह मे पोस्ट किया।

Prem Prakash Gupta अगर 1971 के पाकिस्तान इलेक्शन में अवामी लीग को बहुमत मिलने पर शेख मुजीब को पाकिस्तान का सदर बना देते तो मुक्ति वाहिनी नहीं बनती और ना ही पाकिस्तान टूटता।
और पीछे जाय तो यदि भारत विभाजन नहीं होत तो कश्मीर समस्या नहीं होती।
नोट: जियो पॉलिटिक्स बहु आयामी है। घटनाओं की कड़ी हजारों वर्ष पीछे ले जायी जा सकती है। आपने उसका अत्यधिक सरल सामान्यीकरण कर दिया।
Mohammed Seemab Zaman. Prem Prakash Gupta साहेब, बंगलादेश तो बनता ही। बंगाली कभी पंजाबी के under नहीं रहते। कभी ग़ौर किया है एक हिस्सा पंजाब और दूसरा हज़ारों मील दूर बंगाल में क्यों बना?
*यूरोप में एक दिन मे 60 हज़ार लोग जर्मनी मारता था मगर अब तो जर्मनी पार्टिशन के बाद एक हो गया और European Union का मुल्क बना है और आज जर्मनी की औरत EU Commissioner 7 साल से हैं।
*भारत और पाकिस्तान क्यों नहीं एक हो सकता है? क्यों नहीं EU के तरह सब लोग रह सकते है? कहॉ किस ने अंधे हो कर सोंचा, कभी ग़ौर से सोंचये गा।
*हम को यक़ीन है, अब जब दुनिया 1886 के बाद बदल गई है तो भारत-पाकिस्तान की दुश्मनी भी ख़त्म हो गी।
*कल इंग्लैंड जो Press Freedom & Human Rights का नारा लगाता था उस ने Telegraph Newspaper को विदेशी शेयर होल्डर को 25% बेचने का आदेश पारित किया है। जानते हैं किस के लिए किया है, वह UAE है।

BM Prasad भगत सिंह को अंग्रेजो ने आतंकवादी कहा था!. मुक्ति वाहिनी को आतंकी संगठन तो पाकिस्तानी ही कहते रहे होंगे! आप क्यों ऐसा कहते है?
Mohammed Seemab Zaman. BM Prasad साहेब, हम उस वक्त छोटे थे और गया में थे जिस Army Cantonment से आर्मी को तैयार कर बंगलादेश भेजा गया था। मेरे मोहल्ला से ट्रेनिंग के लिए वह कई बार 1971 मे गये थे। एक आर्मी का आदमी गर्मी की वजह कर बेहोश हो गया था तो हम ने पकड़ कर अपने ओसारा पर रखे चौकी पर बैठाया था।
हम ने गया में हज़ारों हिन्दु शरणार्थी देखा है और खाना भी दिया है। हम ने गया मे Surrendered Army देखा है……….
BM Prasad, Mohammed Seemab Zaman सर हमे अपना पक्ष स्पष्ट रखना होगा!

Md Umar Ashraf किसी के लिए हो न हो, बिहार वालों के लिए मुक्ति बाहनी एक आतंकी संगठन ही है, इनकी वजह कर बिहार के हर मुस्लिम घर में कोई न कोई शहीद ज़रूर है।

May be a black-and-white image of 5 people, child and clothes iron

Mohammed Seemab Zaman, Md Umar Ashraf साहेब, यही तो बहुसंख्यक समाज के लोग नहीं जानते हैं कि इस मुक्ति वाहिने के वजह कर बिहार के हर मुस्लिम ख़ानदान का आदमी मरा और मारा गया था।