Not posted on FB (Posted on FB on 5th Oct.2025)
यह 1947 नहीं है, 1992 नहीं है, यह 2025 है। 21वी शताब्दी का एक चौथाई हिस्सा बाबर और मंदिर का नारा लगाते-लगाते, हिन्दु और मुसलमान करते-करते, चुनाव लड़ते-लड़ाते, जात-पात की राजनीतिक करते-कराते, विश्वगुरु का ख़्वाब देखते-देखाते ख़त्म हो गया।
*आज़ादी के अमृत काल मे, बिहार में स्वच्छ नदी-नाला की व्यवस्था नहीं हुआ; रोड-गली-चौराहा पर कुडा-करकट साफ़ नहीं हुआ; स्वच्छ पीने के पानी की व्यवस्था किसी भी ज़िला या गॉव में नहीं हुआ; गंगा-गंडक-कोसी आदि नदी है, मगर छोटे-मझौले किसानों के कृषि के लिए सिंचाई की व्यवस्था नहीं हुआ।
*12 साल से डब्ल-इंजन की सरकार है मगर कोई फैक्ट्री, कोई अंतरराष्ट्रीय आईटी केंद्र नहीं खुला; हाई स्पीड ट्रेन की व्यवस्था नहीं हुआ; बिहारी कुत्ता-खस्सी के तरह ट्रेन में यात्रा कर पवित्र पर्व छठ मनाने आते-जाते रहे, आदि इत्यादि।
*इस शताब्दी में चीन आर्थिक और तकनीकी विकास कर अपने 140 करोड़ जनता को ग़रीबी से मुक्ति दे दिया और विश्वगुरु बन गया मगर जो 12 साल से विश्वगुरु का सपना देखा रहे थे वह 5 किलो अनाज और 400 रूपया खैनी-बिड़ी का 80 करोड़ जनता को देकर गौरवान्वित हो रहे हैं।
*दुबई जिस की आबादी 40 लाख है वह इस शताब्दी के 25 साल मे एशिया का आर्थिक और लौजिस्टीक हब बन गया।क़तर जिस की आबादी 4 लाख है वह अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल प्रतियोगिता कर विश्वगुरु बन गया मगर मुम्बई जो पिछले शताब्दी में एशिया का आर्थिक केन्द्र था वह अब “लाडली-बहना” को हज़ारों रूपया “भीक” दे कर आनंदित है।
#NOTE: संघ ने सौ साल में समाज में नफरत और मुस्लिम तिरस्कार का जो ज़हर घोला है, अगर संघ ने एकता और प्यार मोहब्ब्त समाज में फैलाया होता तो आज हिन्दुस्तान, चीन से बड़ी अर्थव्यवस्था और सैन्य शक्ति होता,
*बिहार की जंग (Battle of Bihar), बिहार और देश का भविष्य अगले पचास साल के लिए लिखे गा।बिहार के बहुसंख्यक समाज से अपील है कि संघ के हिन्दु-मुस्लिम, घुसपैठिया, और साम्प्रदायिक प्रचार वाली राजनीति से बिहार को हमेशा के लिए मुक्ति देलायई,
*यह चुनाव बिहार वासियों के लिए एक सुनहरा पैग़ाम ले कर आया है।इस चुनाव में गटबंधन और AIMIM के उम्मीदवार को वोट देकर विजय बना कर “बिहार ग्रेट बनाईये” (Make Bihar Great).
==============
Some comments on the Post
Mohammed Seemab Zaman *एक चीज़ बिहार चुनाव में बहुसंख्यक समाज याद रखिये गा, नीतीश कुमार अगर सत्ता संघ की सरकार को सौंप कर जाते हैं तो लोग इतिहास मे नीतीश कुमार को संघीतकार के नाम से याद करे गा और भारत मे समाजवाद और समाजवादियों को लोग धोखे-बाज़, सत्ता का भूखा और फ़्रॉड कहें गें।
*मुस्लिम समाज आप अपने को बड़ा देशभक्त देखाने की कोशिश नहीं किजये। देखा नही दुलारचंद यादव “डेढ़ सयाना” बन रहे थे जान से गये।बिहार और देश बहुसंख्यक समाज का प्रोब्लम है। मुस्लिम समाज जहॉ जहॉ मुस्लिम उम्मीदवार आप के वोट से जीत रहा है आप वहॉ एक जुट हो कर मुस्लिम उम्मीदवार को वोट दिजये, ख़ास कर AIMIM के लोगों को।
*चीन जो मेरा पड़ोसी है वह दुनिया का विश्वगुरु हो गया और हमारे राज्य अरुणाचल का उत्तर प्रदेश के शहजादा सलीम के तरह नाम-पता बदल दिया। अब, बहुसंख्यक समाज को देश की सलामियत बचाने का सोंचना है, अल्पसंख्यक को नही।
- Muhammad Sajid Ali Osman “बिहार और देश” बहुसंख्यक समाज ही की प्रॉब्लम है. ये बात हमें समझकर उस पर अमल करना चाहिए. “बीजेपी को हराना है”, “लोकतंत्र की हत्या” और “सविंधान खतरे में” की सियासत से ख़ुद को मुक्त करके ख़ुद मुख़्तार मिल्ली क़यादत पर ध्यान देना चाहिए.
