Post of 9th June 2025
हमारे आदरणीय विश्व प्रख्यात दार्शनिक, धाराप्रवाह हिन्दी वाचक, इतिहासविद्, पशु चिकित्सक, संघ प्रमुख, डाक्टर, मोहन जी ने संघ के “कार्यकर्ता विकास वर्ग” के समारोह मे भाषण में गाली #दोग़ला अपशब्द कह कर संस्कारी कहे जाने वाली संस्था की क़लई को उधेड़ कर नंगा कर दिया।
आदरणीय मोहन जी के मुँह से “दोग़ला” शब्द सुन कर हम को ताज्जुब नहीं हुआ क्योंकि संघ के यही विकास वर्ग के प्रशिक्षण लिये कार्यकर्ता राजनयिक बन कर प्रजातंत्र के मंदिर मे सांसद बन कर जाते हैं तो अपशब्द #कटुआ बोलते हैं, और दूसरे सांसद ख़ुश हो कर हँसते है जो हमारे उच्चतम प्रजातंत्र को दर्शाते हैं।
*ख़ुशी यह है कि भारत रत्न नरसिम्हा राव, बाबरी ध्वस्त के बाद चीन को ज़मीन देकर एलओसी को एलऐसी बना कर नक़्शा बदल दिया मगर आज तक किसी ने उन के लिए कोई अपशब्द नही कहा।
*ख़ुशी यह है कि आज भारत के आंतरिक द्वेष ने भारत को चीन से हर क्षेत्र मे 20-22 साल पिछे कर दिया और पुन: 2020 मे विस्तारवादी हो गया मगर आज तक किसी ने किसी को अपशब्द नहीं कहा।
*ख़ुशी यह है कि चीन ने हम से नाम-पता बदलना सीख कर अरुणाचल का नाम-पता बदल रहा है मगर आज तक किसी ने कोई अपशब्द नहीं कहा।
*मगर अफ़सोस यह है कि संघ जो अपने को सांस्कृतिक संस्था कहता है और सौ साल से धार्मिक ठेकेदार बना है और भारत को विश्वगुरु बनाने का संपना देख रहा था उस मे सौ साल बाद भी भारतीय सभ्यता की रौशनी नही है।
#Note: Sangh, the light that failed.
