The Post of 14th February 2026

डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेट फ्रेडरिक्सन ने Munich Security Conference में चेतावनी दी है कि अगर यूरोप को बदली दुनिया से बचना है, तो उसे सुरक्षा और बचाव के लिए “आपातकाल सोच”(Emergency mindset) की ज़रूरत है।

फ्रेडरिक्सन, जो ट्रम्प के ग्रीनलैंड संकट से जूझ रही हैं उन्होंने कहा कि “जो यूरोप खुद को बचाने में क़ाबिल और तैयार नहीं है, वह यूरोप किसी न किसी समय खत्म हो जाएगा।”

उन्होंने आगे कहा, “पुरानी दुनिया वापस नहीं आएगी। मुझे इस बारे में पूरा यकीन है।” फ्रेडरिक्सन ने कहा, “बदकिस्मती से, यूरोप के पास हथियारों की ताकत नहीं है जो इस बदली दुनिया का मोक़ाबला कर सके इसलिए यूरोप को काफी मजबूत होना होगा।”

#डेनमार्क की प्रधानमंत्री फ्रेडरिक्सन ने जो कल कहा है यही बात हम कई साल से “मोहन जी, शर्मा जी, स्वामी जी, दूबे जी, सिन्हा जी आदि इत्यादि को समझा रहे थे कि “दुनिया बदल रही है और अब पुरानी दुनिया वापिस नहीं आये गी” दिल मे रौशनी लाइये मगर सब लोग मुस्लिम की चूड़ी टाइट करने और नफ़रत फैलाने मे आनंदित थे।

संघ प्रमुख, डाक्टर, मोहन जी दिल मे रौशनी लाइये और सुनिये डेनमार्क की फ्रेडरिक्सन और फ्रांस के मैकरोन क्या कह रहे हैं? यूरोप बदली दुनिया का मुक़ाबला नहीं कर सकता है क्योंकि geopolitical and geo-economics हालत बदल गया है।

मोहन जी आप भी “आपातकाल सोंच” से हिन्दु को ग़ुलामी से बचाईये क्योंकि अब आप के संघ की सरकार को ट्रम्प चीन के खिलाफ मद्द नही करने वाला है और न सरकार फ्रांस का Rafale fighter jets ख़रीद कर चीन का मुक़ाबला कर सकती है।

#NOTE: आदरणीय विश्व प्रख्यात दार्शनिक मोहन जी “पुरानी दुनिया वापिस नहीं आये गी” और अब समय नहीं है, जल्द दिल मे रौशनी लाईये और आज़ान दिजये क्योकि चीन आप से मुग़ल का नाम-पता बदलना और जन्मभूमि विवाद सिख कर हिन्दुस्तान के राज्य का नाम-पता बदल दिया, विस्तारवादी हो कर जन्मभूमि विवाद पैदा कर दिया।
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Some comments o
n the Post
Mohammed Seemab Zaman उर्दु नाम वालों चिंता न करें, अब यही संघ अपनी सौ साल की सोंच को U-turn देगा क्योंकि मेरा पड़ोसी चीन अमेरिका या यूरोप से बडी आर्थिक और सैन्य शक्ति बन गया है। चीन ने हम से नाम-पता बदलना तो सीख ही लिया था और अब हम से #जन्मभूमि विवाद भी दलाई लामा के जन्म स्थान अरूनाचल को कह कर विवाद खडा कर दिया है।
यह सब अंधे दिल होने के कारण हुआ है क्योंकि 1990 तक हम लोग चीन से हर क्षेत्र मे आगे थे, यह लोग जन्मभूमि विवाद कर दंगा-फसाद कर GDP जलाते रहे, मुस्लिम की चूडी टाईट करते रहे, घुसपैठिया का नारा लगाते रहे और आज चीन अमेरिका से बडी आर्थिक शक्ति बन गया। आगे क्या होगा वह हमारे संघ प्रमुख और उन के स्वामी जी, दूबे जी आदि को मालूम है मगर शर्म से जनता को नही बताते हैं।

  • Ahmad Zameer, Mohammed Seemab Zaman सर हम लोगो को अब सब्र आ गया है
  • BM Prasad, Mohammed Seemab Zaman sir आप नाहक मोहन जी को समझाते चल रहे है! कुछ लोग लात जूते खा कर भी बमुश्किल से समझते है! भारत का हाल, कटी पतंग वाली होना तय है! इससे बचने का उपाय देश की जनता के पास ही होती है, लेकिन वो तो टुन्न हुईं पड़ी है, सो इंतजार करने के अलावा कोई उम्मीद नहीं!
  • Mohammed Seemab Zaman, BM Prasad साहेब मोहन जी सारे तबाही की जड़ हैं, इसी वजह कर हम हमेशा इन्हीं को address करते हैं।हम तो ओबामा के visit के बाद ही कहना शुरू कर दिया था कि भारत का कटी पतंग का हाल होगा, मगर लोग समझ नहीं पा रहा था। बहुत बुरा हाल है यूरोप का। यूरोप या कहिये western world अब दुनिया की सियासत का केन्द्र नहीं रहा जिस पर भारत तकिया लगाये बैठा था। अफ़सोस तो यह है कि हम लोग भारत मे मान्ने को तैयार नही हैं कि चीन अमेरिका से बड़ा economic power हो गया है।जनता क्या करे गी? इस सरकार ने भारत के सारे नेता को खत्म कर दिया, अब कोई नेता socially acceptable all over India नही है, जो देश बचा ले।

Bheem Singh Gill 1945 से कोल्ड वार चली, नाटो का गठन किया गया, बड़े बड़े देशों में सत्ताएं बदली गई लालच से जा ज़बरदस्ती करके, फ़िर ussr टूटा, रूस को फेल्ड स्टेट कहा गया, फिर पुतिन आए, रूस को विश्व शक्ति का संकल्प लेकर, जो उस लीडर और उनकी सरकार ने कर दिखाया, चीन का सुपर पावर बनना, ईरान का डटे रहना, यह सब कुश अधूरा रह जाता, अगर रूस में भारत जैसा नेता होता, और वहाँ की जनता भी गाय गोबर मुगल मंदिर मस्जिद, तब्लीगी जमात, लव जिहाद कर रही होती, रूस को बेचा जा चुका होता, जैसे एशिया में एक देश दुबारा गुलामी का पट्टा पहनकर अमरीका में सरेंडर हो गया है.

Lalit Mohan Singh क्यों बागमत का बचाव कर रहे हैं। कोई पुरानी मित्रता या रिश्तेदारी है? खाई उन्होंने खोदी अब गिरने का आनंद भी उठाने दीजिए। आप भी आनंद लीजिए।

Dilawar Khan जी बिल्कुल,, बहुत सही लिखा आपने सर. ये नही सुधरेंगे,,, ये नही मानेंगे,,, ये नफरत मे अंधे हो कर बर्बाद होना ही पसन्द करेंगे, अब आदरणीय, माननीय, सम्मानीय, सम्मानित बंधुओं के पास टाईम नही बचा अब समय हाथ से निकल चूका है,, बहुत देर हो चुकी है. अब सिर्फ अज़ान देने के अलावा कोई चारा नहीं बचा है. सिर्फ मुसलमान ही बचा सकते है. आदरणीय लोगो को जितनी जल्दी हो सके मुस्लिम दुनिया का हाथ पकड़ लेना चाहिए. एक बहुत बड़े देश और दुनियां की बहुत बड़ी आबादी की 1992 मे बर्बादी और गुलामी की नीव रख दी गई थी जो अब नज़र आने लगी है.

Zuber Mansuri अगर संघ की सोच वसुदेव कुटुंब वाली होती तो जिस तरह यूरोपिय संघ में 27 देश है, उसी तरह अगर एशियाई समूह का लीडर नहीं तो 9 देशों का समूह हिंद यूनियन के नाम से ज़रूर होता जो देश को एक अलग ताकत देता है। लेकिन इनकी विघटनवादी सोच (नाम और जाती पूछ कर तो साथ बैठना) का ही कारण है कि 4 दिन के युद्ध में कोई हमारे साथ नहीं आया।

Burhan Saif मिडिल ईस्ट, साउथ एशिया, अफ्रीका जैसे मुल्कों को बर्बाद करने में इन्हीं वेस्ट का हाथ रहा हे और अमेरिका इजरायल के साथ हर युद्ध कंधे से कंधा मिलाकर लड़े हे अब बात इनकी खुद की ग्राम पंचायत में आकर रुकी हे तब समझ में आ रहा के मार काट क्या होता हे वैसे भी ये वेस्ट के दज्जाल मुल्क आज नहीं तो कल रूस से पेले जाएंगे दूसरी और जिसका साथ दिया हे अब तक वो अमेरिका भी ग्रीनलैंड हथिया कर दूसरी और का डर कायम करेगा सो अलग। वक्त का पहिया घूम कर इन्हीं की तरफ आया हे इसलिए कोई हमदर्दी नहीं।

Kamil Khan सर जब caa nrc के बाद शाहीन बाग के बाद दिल्ली दंगा हो गया, तब आप ने लिखा था के उर्दू नाम वाले शाहीन बाग आंदोलन बंद कर दे दुनिया ने संघियों के लिए सज़ा का फैसला कर लिया है, अब आप लोग सिर्फ़ सब्र करें और अपना इखलाक बेहतर रखें, अब जो होगा वो विदेश से होगा इस देश के अंदर से अब कुछ नहीं होगा, आप की बात धीरे धीरे सच होती जा रही है आज सारी दुनिया में कोई इस संघी सरकार का दोस्त नहीं है, सारी दुनिया संघी लोगों की चूड़ी टाईट करती चली जा रही है, रहे नाम अल्लाह का

  • Mohammed Seemab Zaman, Kamil Khan साहेब, हमारा 90% पोस्ट international politics based रहता है मगर लोग उस को समझ नही पाते हैं कि आलमी सियासत दुनिया के हर दौर मे मुल्कों की सियासत बदली है। आज जो यूरोप रो रहा है वह दुनिया की बदली आलमी सियासत की वजह कर रो रहा है।
  • CAA/NRC के वक्त का ज़हर हम या आप ने नही बल्की दुनिया ने बहुत नज़दीक से देखा था। शाहीन बाग़ आंदोलन भारत का #Arab_Spring था जिस को हिन्दू समाज समझ नही सका और अंधे दिल वालों ने ट्रम्प के सामने 24-28 फरवरी 2020 मे दिल्ली मे दंगा करवा दिया। मेरे analysis से यह हिन्दु संघी समाज ने blunder कर दिया।
  • अब जो वक्त लगे मगर संघ को अपनी मुस्लिम तिरस्कार के सोंच को इस बदली दुनिया मे बदलना होगा वरना 140 करोड आबादी गाय-गोबर से ज़िंदा नही रह सकती है। आप लोगो को अंदाज़ा नही है Europe & America किस churning stage से गुज़र रहा है। भारत के लोग तो अभी अँधेरे मे हैं क्योंकि सारा मिडिया #सड चूका है वह सही बात लोगो तक पहुचा ही नही रहा है।