Post of 6th September 2025

कहा जाता था कि कभी लंदन का हीथ्रो एयरपोर्ट यूरोप का सब से व्यस्त (busy) एयरपोर्ट है, जिस को दो रनवे (runway) है और तीसरे की बनाने की क़वायद कई साल से हो रहा है मगर अभी तक बन्ना शुरू नही हुआ।

*दुबई 2030 तक $35 billion में दुनिया का सब से बड़ा एयरपोर्ट बनाने जा रहा है जिस मे 5 रनवे होगा और 400 गेट (Gates) होगा। दुबई का यह एयरपोर्ट 26 करोड़ पैसेंजर एक साल में हैनडल करे गा, यानि यह हॉंगकांग एयरपोर्ट से बड़ा और ख़ूबसूरत एयरपोर्ट होगा।

*तुर्की ने पिछले महीना इस्तांबुल एयरपोर्ट में तीसरे रनवे का इनओगरेशन किया है जो लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट से बड़ा हो गया है।

कहा जा रहा है कि भविष्य में नये aviation industry का किंग तुर्की और दुबई होगा, जो कभी यूरोप का भाग्य था।इस्तांबुल एयरपोर्ट पर अरब की महिलाएँ सुबह में आती हैं और दिन भर एयरपोर्ट पर ख़रीदारी करती हैं और शाम में वापिस अपने मुल्क चली जातीं हैं।

*Financial Times, London में पिछले महीना एक खबर छपी थी जिस में लिखा था कि दुनिया का फाइनेनशियल राजधानी (Capital of Capital) दुबई बन्ने की कोशिश कर रहा है।अख़बार लिखता है कि वह ज़माना गया जब यूरोप और अमेरिका के investment guru सुबह मे अरब मुल्क आते थे और अरबों डालर का चेक ले कर शाम को हवाई जहाज़ से लंदन और न्यूयॉर्क चले जाते थे।अब अरबी लोग चेक किसी को नहीं दे रहे हैं बल्कि सब investment bankers को मुख्यालय अरब में खोलना को कह रहे हैं, Goldman Sachs और दूसरे रेयाद और दुबई में आफिस खोलने पर मजबूर हो गये हैं।  

*सऊदी अरब में Nvidia और AMD ने AI का सर्वर रेयाद और दम्माम में बनान शुरू कर दिया है जो इस साल के अंत में काम करे गा। इस से सऊदी अरब के तेल कम्पनी Aramco भविष्य में भी विश्वगुरु बना रहे गा।

#Note: आज हम अरब देश इराक़, जो 20 साल में बर्बाद हो गया था, उस पर और उस की राजधानी बग़दाद पर नज़र रखने को कहें गें, बग़दाद कर्बला से सौ किलोमीटर दूर है।इराक़ के प्रधानमंत्री सुडानी एक पढ़े लिखे नेता हैं जो चुप-चाप इराक़ को तरक़्क़ी करा रहे हैं।

इराक़ ने अपने प्राचीन सभ्यता “मेसोपोटामिया” के Faw Port  और 1200 Km रोड की योजना को हज़ारों साल बाद फिर शुरू किया है। यह Iraq Development Road (IDR) रेल और रोड से एशिया को यूरोप से वाया तु्र्की जोड़े गा, जिस को बनाने का पैसा यूएई, क़तर, तुर्की और इराक़ दे रहा है। उम्मीद है कि यह  IDR एक अद्भुत योजना जल्द शुरू होगा और The India-Middle East-Europe Economic Corridor (IMEC) अब नहीं बन पाये गा जबतक फलस्तीन एक कामयाब देश नहीं बनता है।
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पिछले हफ़्ता हम लोग ने South East Asia के नये युग की ताजपोशी देखी, जो दुनिया में बदले निज़ाम की एक झलक सी थी।दुनिया का दूसरा बदला निज़ाम तुर्की से मिडिल ईस्ट और अफ्रिका का हम लोग देखें गें मगर उस की ताजपोशी उस वक़्त तक नहीं होगी जब तक फलस्तीन एक viable मुल्क नहीं बन जाता है। उस के बन्ने की कड़ी द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद सीरिया का बदला निज़ाम है। तुर्की के arms and ammunitions ने लिबिया, सोमालिया, अज़रबाईजान और सीरिया में अपनी कामयाबी दुनिया को देखाया है जिस का नतीजा है कि कुर्द हथियार रखने को तैयार हो गये हैं।

सब्र किजये और दुआ गो होइये कि 1948 से फलस्तीन में मार -काट का सिलसिला ख़त्म हो और अमन क़ायम हो। 

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