Post of 7th July 2025
اُس کی زمین بے حدود، اس کا افق بے ثغور
اُس کے سمندر کی موج، دجلہ و دینوب و نیل
(اقبال کی نظم “مسجد قرطبہ” کا چوتھا بند)
हम कहते और लिखते आ रहे हैं कि 2015 जनवरी, बराक ओबामा के भारत यात्रा के बाद दुनिया तेज़ी से बदलने लगी। यही बात चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा है कि, दुनिया ऐसे बदलाव से गुज़र रही है जो “एक सदी में नहीं देखे गए”।
मेरा मान्ना है कि यह बदलाव सिर्फ़ digital, technological या सस्ते Drones से रूस-यूक्रेन जंग से नहीं हुआ है बल्कि चीन के हजारों वर्ष पुराने रेशम मार्ग जो नील (Nile), दजला (Tigris), फ़रात (Euphrates) और चीन के येलो (Yellow) और यांग्त्ज़ी (Yangtze) नदियों की घाटियों में फैले थे उन को फिर से दोबारा राष्ट्रपति शी जिनपिंग द्वारा 2013 मे बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के नाम से शुरू कर economic integration के वजह कर भी हो रहा है।
चीन का बेल्ट एंड रोड Eurasian, Central Asia और Middle East को जोड़ कर यूरोप, इस्लामाबाद और काबुल तक संपर्क बनाने और मानवता को फ़ायदा पहुँचाने में मददगार साबित हो रहा है जिस के वजह कर पश्चिमी देशों ख़ास कर अमेरिका का भविष्य दाव पर लग गया।
ट्रम्प के इसराइल-प्रतिरोधी ताक़तों के मार काट, रूस-यूक्रेन जंग के रोकने में असफल होने और ईरानी परमाणु प्रतिष्ठानों पर बमबारी ने सौ साल से चले आ रहे पश्चिमी ताक़तों के सत्ता संतुलन को अगले तीन-चार सौ साल के लिए ख़त्म कर दिया।
मेरा मान्ना है कि इसराइल-प्रतिरोधी ताक़तों का मार काट नेतनयाहु के हज़ारों लोगों के मारने और चाहने के बावजूद वैश्विक (Global) जंग नहीं हो सका क्योंकि मिडिल ईस्ट इस में नहीं फँसा। जबकि, रूस-यूक्रेन की जंग वैश्विक-जंग हो गया क्योंकि नार्थ कोरिया रूस को लड़ाई का सामान के अलावा फौज भी सप्लाई कर रहा है, वहीं यूरोप के देश (पोलैंड) साउथ कोरिया से टैंक भारी तादाद में ख़रीद रहा है।
अब रूस-यूक्रेन जंग यूरोप के लिए बड़ा नासूर है जो यूरोप और मिडिल ईस्ट को चीन से क़रीब करता जाये गा और अमेरिका को अपने गर्लफ़्रेंड को छोड़ने पर मजबूर कर दे गा।
#NOTE: हाल ही में राष्ट्रपति शी ने राष्ट्रपति पुटिन से कहा है कि “अब ऐसे बदलाव हो रहे हैं जो 100 सालों में नहीं हुए हैं”
“उस की ज़मीन बे हदुद, उस का अफक़ बे सुग़ूर
उस की समुंदर की मौज, दजला व देन्यूब व नील”
(इक़बाल की नज़्म “मस्जिद क़रतबह” का चौथा बंद)
===========
Some comments on the Post
Mohammed Seemab Zaman मेरा मान्ना है कि अब चीन की आबादी, चीन की Dragon economy & military और रूस-यूक्रेन जंग यूरोप और अमेरिका को मजबूर कर दे गा फलस्तीन के हक़ में फ़ैसला लेने के लिए। वक़्त का इंतज़ार किजये, यह तीसरा काबुल और दमिश्क होगा।