The Post of 14 October 2025

आज़ादी के बाद पहली बार 2014 मे हिन्दुस्तान को एक बहुत ही strong leader मिला था, मगर इस आदमी ने अपने strong will को सिर्फ़ मुस्लिम दुश्मनी और मुस्लिम तिरस्कार में झोंक कर खुद को, देश को और हिन्दुस्तान के दो नस्ल को बर्बाद कर दिया।

यह आदमी मुस्लिम दुश्मनी में अपने दिल में अँधेरा नहीं करते तो यह भारत को सच मे विश्वगुरु बना देता क्योंकि इन को हिन्दुस्तान के बुद्धिजीवी, अर्थशास्त्री, पत्रकार, न्यायाधीशों और प्रत्येक पार्टी का full support तो मिलता रहा, विदेशियों ने भी खूब गले लगाया।

ग़ौर से मेरी बात सोंचये गा:

*इस आदमी ने हिन्दुस्तान के सब Pseudo-secular leaders को चुन चुन कर ख़त्म किया चाहे वह समाजवादी हों या कांग्रेसी या संघी।जयप्रकाश आंदोलन के बाद के पैदा सभी कचरा नेताओं जिस में संघी नेता भी शामिल थे,सब को श्मशान घाट पहुँचा दिया।

*कांग्रेस के “कोख और गोद” वाले खेल का पर्दाफाश कर सौ साल से ज़्यादा पुरानी पार्टी को पद-यात्रा करने पर मजबूर कर दिया।अगले पचास साल के लिए कांग्रेस को रोड-गली-चौराहे की ज़िनत बना दिया।

*शिव सेना जो self-certified हिन्दुत्व का ठिकेदार था, उस के 60 साल की राजनीति को रोड-गली का रास्ता देखा दिया।पंजाब की अकाली दल जो 1970s के दशक से राजनीति करने लगी थी उस को वापिस गुरुद्वारा पहुँचा दिया।

*उत्तर प्रदेश और हरियाणा के जाट जो अपने एलाक़े मे राजनीति और किसानी का ठेकेदार समझते थे, उस को धूल चटा दिया।उन के नेताओं को श्मशान पहुंचाया या घर के चहार दीवारी के अंदर ज़िन्दगी गुज़ारने पर मजबूर कर दिया।

*अम्बेडकर के दलित राजनीति और उन से पैदा नेताओं को अनारकली बना दिया।

*भारत के सभी संविधानिक institutions जिस मे ज़ंग लग चूका था, सब को घुटना पर लाकर ख़त्म कर दिया जिस में Judiciary एक मिसाल बन गया, जूता उछलवा दिया।

*1970s के दशक के बाद, हिन्दुस्तान के Media के ठेकेदार शर्मा जी, वर्मा जी, स्वामी जी, दूबे जी वगैरह वगैरह सब को उन की अवक़ात बता दिया।सभों को यू-टूयूब में अपना मुँह छुपाने पर मजबूर कर दिया।भारत में बीबीसी हिन्दी को एक प्राइवेट कम्पनी बनवा दिया, NDTV बेचवा दिया।

*दस से ज़्यादा सरकारी बैंक को लुप्त कर दिया, आम आदमी के रोज़मर्रा की ज़रूरत पर 18-28% टैक्स लगा दिया, टैक्स पर सेस लगा कर टैक्स आतंकवाद किया मगर किसी अर्थशास्त्री, देशभक्त, भारतीय नोबेल पुरस्कार विजेयताओं की हिम्मत नहीं हुई कि टिका-टिप्पणी करें या अर्थव्यवस्था पर मातम करें।सब रसोइया (Kitchen) की साफ़ी में मुँह छुपा कर देखते रहे।

*आदरणीय संघ प्रमुख जिन को घमंड था कि वह मलेशिया से उत्तर अमेरिका तक संगठन को पहुँचा दिया है, उन को उन के पद पर उन के ज़िंदगी में शाल उढा दिया।आज आदरणीय का हाल यह है कि हर हफ़्ता धाराप्रवाह बोलते हैं मगर कोई उन को seriously नहीं लेता है, खुद को मज़ाक़ बना दिया।

#NOTE: मगर अफ़सोस अमृत काल का इतना strong, loved one leader हिन्दुस्तान और दुनिया को कुछ यादगार नही दे सका।============
Comments on the Post

Mohammed Seemab Zaman यह पोस्ट हम ने कल के शरम अल शेख में हुए समिट में ग़ैर हाज़िरी की वजह पर लोगों के सवाल के जवाब पर लिखा है। The Strongest Leader of Hindustan समझ ही नहीं पाये कि दुनिया बदल रही है या बदल गई, वह अपने सौ साल पुराने सोंच पर ही क़ायम रहे।

  • Saleem Khan, Mohammed Seemab Zaman anti Muslim image bhi to banani thi
  • Aftab Alam, Mohammed Seemab Zaman साहब! आपके और पाहवा साहब के पोस्ट को पढ़ने के लिए ही अक्सर फेसबुक पर आता हूं।आपकी विवेचना सारगर्भित, सटीक और तथ्यात्मक है। 2014 में निस्संदेह बीजेपी का प्रचंड बहुमत संघ की पौन सदी के अथक परिश्रम और महामानव के करिश्माई व्यक्तित्व (meticulously created by media and sangh) का परिणाम था।मगर क्या आपको नहीं लगता कि 2019 और 2024 के लोकसभा का परिणाम ईवीएम की करिश्माई इंजीनियरिंग का कमाल था?2014 से लेकर आज तक महामानव के द्वारा दिए गए वक्तव्यों और प्रवचनों से क्या ऐसा नहीं प्रतीत होता कि जो कुछ था वो मिथ्या प्रचार भर था — एक कृत्रिम Halo Zone का निर्माण कर अतिसाधारण को असाधारण बताने का सफल प्रयोग था।

Dheeraj Mitra आप एक सकारात्मक सोच रखते हैं तभी ये बातें आप ने लीक से हट कर सोची अच्छा है मैं भी सोचता कई बिंदुओं पर सहमत हूं पर ऐसी स्टार्गंनेस किस काम की जहां अमन रोजगार समाजीक सरोकार हिन भावना और भी तमाम पहलुओं का उदय हो जाएं हिन्दू मुस्लिम करना या उस के चक्कर में रहना…..जिस आप बोल्डनेस कह रहे हैं ये बोल्डनेस कहां है विभाजन रेखा हमेशा स्पष्ट होनी चाहिए पर ये तो वह भी नही कर पाए पर एक काम अच्छा किया की लोहे में जो जंग लगी थी उसे छुड़ा दिया सब दल जो एक दायरे में खेलते थे उस से बाहर आ गए ये सभी दलों ने कभी इतनी नफ़रत की राजनीति नही इन का तो कोई पैमाना ही नहीं है जो लोग खुश हो रहें गैर हिन्दू और हिन्दू ( हमें हमारे हक के लिए जागरूक किया दोनों वर्ग) बहुत बड़ी ग़लत फहमी में जी रहे हैं एक सब्र कर रहा ये सोच कर की समय बदलता है इन का भी अंत होगा तब वो दो पहलू सामने होंगे एक जो सिर्फ और सिर्फ नफ़रत ही करेगा और दुसरा जो सोफ्ट हार्टेड होगा उन्हें अपनों से ही खतरा होगा……देश का दुर्भाग्य है कि इतनी बड़ी संख्या आवादी में एक ऐसे व्यक्ति का जन्म होना……आने वाला समय देश का बहुत जटील है सर.

Shambhu Singh
टूट पड़ती थीं घटाएँ जिन की आँखें देख कर
वो भरी बरसात में तरसे हैं पानी के लिए (सज्जाद बाक़र रिज़वी)