The Post of 18 January 2026
लोगों ने ग़ौर किया होगा कि ट्रम्प के दूसरे प्रेसिडेंसी में चीन या रूस से भी ज़्यादा नफ़रत की बात यूरोप से नज़र आ रही है।
ट्रम्प 2.0 मे अमेरिका अब दुनिया मे पुलिसिंग करना ख़त्म कर रहा है।पिछले साल मई में सऊदी अरब के दौरा पर ट्रम्प ने भाषण में कहा था कि “वेस्टर्न वर्ल्ड के लोग” (यूरोपियन यूनियन) मिडिल ईस्ट के लोगों को राज करने के तरीके पर लेक्चर दिया करते थे जो उन के लिए नुक़सानदेह साबित हुआ।
पिछले जुलाई में अमेरिकन विदेश मंत्रालय ने दुनिया भर में अमेरिकी दूतावास को निर्देश दिया कि वे अपने होस्ट देशों में चुनावों की fairness and legitimacy पर कमेंट करना बंद करें और अमेरिका के हितों की बात करें।
अब ट्रम्प यूरोप को अमेरिकी सुरक्षा देना नहीं चाहते हैं।ट्रम्प चाहते हैं यूरोप खुद अपनी सुरक्षा करे क्योंकि चीन उन का एक मज़बूत प्रतिद्वंद्वी पैदा हो गया है और जिस को मुस्लिम दुनिया ख़ास कर मिडिल ईस्ट पसंद कर रहा है।
ट्रम्प यह जानते हैं कि मिडिल ईस्ट अमेरिका से संबंध को बनाये रखते हुऐ चीन के साथ भी अपने संबंध को पिछले 10-15 साल में एक नया मुक़ाम दे दिया है।भारत में लोगों को मिडिल ईस्ट-चीन का संबंध अभी नज़र नहीं आ रहा है मगर अगले चंद सालों में मिडिल ईस्ट और अफ्रिका के मुस्लिम मुल्कों का चीन के साथ संबंध अमेरिका से ज़्यादा अच्छा नज़र आये गा।
इस्लामिक शरीया कम्पलायंट Global Sukuk (Bond) जो वेस्टर्न बैंकिंग सिस्टम का alternate है वह दुनिया में बहुत तेज़ी से बाज़ार में popular हो रहा है।अभी $780 billion का Sukuk बाज़ार में है और पिछले दो साल से हर साल $270 billion issue हो रहा है, इस से पाकिस्तान, बांग्लादेश, मलेशिया, इंडोनेशिया वगैरह को IMF या World Bank से लोन लेने की मजबूरी ख़त्म हो जाये गी।चीन के हांगकांग के बैंक भी जल्द Sukuk issue करें गें।
#NOTE: ट्रम्प 2.0 ने भारत की ओबामा की बनाई दुनिया बदल दिया।पाकिस्तान-सऊदी अरब का strategic partnership एशिया के बदले geopolitics की चौंकाने वाली खबर थी मगर जल्द सऊदी अरब-तुर्की का स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप होगा और फिर पाकिस्तान-बांग्लादेश पार्टनरशिप होगा। वक्त के साथ इस में और मुस्लिम देश जुटे गें और यह यूरोपीयन यूनियन के तरह geo-economic शक्ल ले लेगा। ज़हन में रखिये गा कि यह सब ट्रम्प के आशीर्वाद से हो रहा है।
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Some comments on the Post
Mohammed Seemab Zaman यह इंसानी फ़ितरत है कि लोग यह भी देखते हैं कि कौन किससे जलता है। अब यह कोई राज़ नहीं है कि ट्रम्प चीन के इंडस्ट्रियल पावर से जलते हैं; और दूसरी बात ट्रम्प को दुख देती है कि मुस्लिम दुनिया सोवियत संघ की तरह चीन से दुश्मनी नहीं रखती है बल्कि चीन को गले लगा लिया है।
यही दो बड़ी वजह है कि “ट्रम्प दुनिया को हिला (shake) रहे हैं” और 1886 के बाद का मुस्लिम जगत बदल चूका है और चीन को प्यार करने लगा है।
- Faysal Khan, ट्रम्प ग़नीमत जाने के अरब हुक्मरान ताकत का तवाज़न बनाए रखना चाहते हैं इस वजह से अमेरिका को बड़ा झटका नहीं दे रहे हैं वरना तो जो हरकतें पिछले तीस चालीस सालों में अमेरिका ने की हैं मुसलमानों की नफ़रतों का हकदार चीन नहीं बल्कि ख़ूद अमेरिका है.
Kamil Khan फयूचर को ध्यान में रख कर बहुत अच्छी पोस्ट लिखी, मोटे तोर पर मुझे ये दिख रहा है बड़ी ताक़त जैसे चीन अमेरिका के बीच छोटे देश खास कर मिडिल ईस्ट अफ़्रीक़ा के देश अपनी सामूहिक ताक़त बनाने की कोशिश कर रहे हैं,
- Mohammed Seemab Zaman हम ने 6 खबर (articles) पढ़ कर अपना analysis कर यह पोस्ट लिखा है।सब खबर में पाकिस्तान-सऊदी राब-तुर्की- मिस्र के strategic partnerships की बात लिखी है जिस को लोग समझ रहा है NATO जो ग़लत है। यह European Union की तरह Economic partnerships होगा, फिर बाद में यह लोग Military एक होंगें। पहले economic तरक़्क़ी करना ज़रूरी है ताकि चीन बने वरना USSR वाला हालत होगा।
Tur Khan कोशिश तो वैस्टर्न और उसके चेले युगांडा ने बहुत की थी चीन के मुस्लिमों पर ज़ुल्म दिखा दिखा कर कि मुस्लिम जगत भी सोवियत की तरह चीन से भी नफरत करे। लेकिन पासा उल्टा पड़ गया। फिर वैस्ट ने चाहा कि युगांडा चीन से जंग करके उसको बर्बाद करे। लेकिन युगांडा पलट गया बड़ी इकॉनमी बोलकर पल्ला झाड़ लिया दुनिया समझ गई कि अपनी इकॉनमी को कम ना बताकर चीन की बड़ी बता दी यानि इकॉनमी की बैंड बजी पड़ी है। वैस्ट ने आदेश की नाफरमानी का गुस्सा निकाला प्रवासियों पर सख्त कानून बनाए। टैरिफ लगाए। एप्सटीन फाइल वगैरह। खरीदारी पर शिकंजा। अब गुल्ली अटक चुकी है। दम सूख चुका है वैस्ट को फोबिया फैलाने वाली कम्युनिटी भी मिलती नज़र आ रही है
- Kamil Khan, Tur Khan बहुत बढ़िया लिखा.
Sandeep Solanki साहब अमेरिकी राजदूत जोकि भारत में है वो बड़े साहब से न मिलकर इधर उधर के लोगों से मिल रहे है. क्या नज़रियात है इसके ???
- Mohammed Seemab Zaman, वही तो हम इस पोस्ट में लिखा है कि अमेरीकी विदेश विभाग ने सभी राजदूत को कहा है कि जिस देश में हो वहॉ चुनाव जितवा कर सरकार बनवाने की कोशिश ओबामा के तरह नहीं करो बल्कि अमेरिका के स्टेरटेजिक मुद्दों (हितों) की बात कर अमेरिका को फ़ायदा पहुँचवा न की democracy या चुनाव लड़वाओ।
- M A Khan, Sandeep Solanki इकोनोमी सबसे अहम कड़ी होती है. हमारी पूछताछ अब तक जो हो रही थी वो सिर्फ एक बड़ी आबादी बड़ी मार्किट की वजह से हो रही थी. लेकिन मौजूदा हुकूमत ने बुलडोजर दंगे फसाद आर्थिक बहिष्कार मोबलिंचिन फर्जी मुकदमों नोटबंदी जीएसटी के जरिए लोगों की खरीदने की छमता को कमजोर कर दिया. और पैसा केवल एक दो परसेंट लोगों के पास पहुंचाने का सिस्टम बना दिया. रिजल्ट सामने है. अब आईएमएफ से बूस्टर लोन की मंजूरी मिली है जाहिर है इसके पीछे आईएमएफ की कुछ शर्ते होंगी
Abdul Raheem Saudi Arabia-Pakistan-Türkiye partnership को कुछ लोग ‘Islamic NATO’ कह रहे हैं, जोकि नहीं कहना चाहिए. इससे ग़लत message जाता है. ये चीन, और वेस्ट, दोनों का सिर्फ़ counterweight नहीं, बल्कि अपनी terms & conditions से, बगैर किसी के pro/against हुए बन रहा है.बाक़ी, जो economy, defence वगैरह में cooperation बढ़ रहा है, इसमें Kazakhstan, Malaysia भी शामिल होंगे.

Donald Trump ने दुनिया को हिला दिया है, लेकिन दुनिया China के इश्क मे गिरफ्तार है‚ Muslim जो न कराए.

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