The Post of 27 April 2026

यह हैं, 12 साल से भारत के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर (NSA) अजीत डोभाल, जिन्होंने ने 18 अप्रैल 2026 को दिल्ली में कुछ गुजराती मुस्लिम प्रतिनिधियों के मिटिंग में कहा कि “’भारत में रहने वाले हिंदू और मुसलमान एक ही जहाज के यात्री हैं, हम या तो साथ तैरते हैं या साथ डूबते हैं।”

डोभाल साहेब 12 साल से तो आप मुस्लिम को जहाज़ की सवारी ही नही समझ रहे थे। पिछले 40 साल से तो आप भारतीय मुस्लिम को बाबरी मस्जिद बम से उड़ा कर दरिया के किनारे खडा कर दिया है मगर अब जब दुनिया बदल गई और चीन “विश्वगुरु” बन कर विस्तारवादी हो गया तो आप को भारतीय मुस्लिम याद आ रहें हैं, ज़हे नसीब!

डोभाल साहेब आप लोग 1857 से भारत का इतिहास-भूगोल भूलने लगे थे और यही वजह है कि हम अक्सर लिखते हैं कि “आप लोग कभी पढ़े लिखे, ख़ानदानी मुस्लिम के घर जा कर शाम मे चाय पिया किजये” ताकि जो दिल 1923 के बाद अंधा होना शुरू हुआ था उस में #सियासी_बसिरत (سیاسی بصیرت) लाने की हिकमत सिख लिजये।

डोभाल साहेब हम जानते थे कि आप लोगों के दिल में रौशनी आये गी, यही वजह थी के हम ने 2019 चुनाव में कहा था, “Please once more …….” ताकि जिस ने समाज में मुस्लिम के खिलाफ नफ़रत और ज़हर घोला है, वही भूकते। अब इस बदली दुनिया मे आप लोग भूगत रहे हैं और अभी बहुत भुगतना बाक़ी है।

डोभाल साहेब आप को घमंड था कि जहाज़ में आप आठ हैं और मुस्लिम दो (80:20 का अनुपात) मगर मुस्लिम को पता था हम तो डूबें गें सनम मगर तुम को भी लेकर डूबे गें, और वही हुआ।

डोभाल साहेब आप ने साथ डूबने और तैरने की बात कहने में बहुत देर कर दिया। 2035-2040 तक मुसलमान तो दुनिया बदल ही देता मगर आप लोगों के अंधे दिल की सरकार के वजह कर पिछले 12 साल मे दुनिया को तेज़ी से बदल दिया और इस बदली दुनिया में भारत के जहाज़ को कोई किनारा नहीं मिला।

#NOTE: अजीत डोभाल आप भारतीय मुस्लिम पर विश्वास किजये और अगर आप को हिन्दुस्तान से प्यार है तो जो समाज में ज़हर और नफरत का बीज बोया है उस को जड़ से खत्म किजये वरना कई दशकों तक आप लोगों की आत्मा भटकती रहे गी।
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पोस्ट: HINDU AND MUSLIMS ARE PASSENGERS OF THE SAME SHIP, WE EITHER SWIM TOGETHER OR SINK TOGETHER: AJIT DHOBAL (NSA) को निचे मेरे दो साल पुराने 28 April 2024 के पोस्ट को मिला कर पढ़िये और अजीत डोभाल के #सियासी_बसिरत और #देशभक्ति पर मातम किजये।
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“APPEASEMENT AND SANGH POLITICS”: तुष्टिकरण और संघ राजनीति (The Post of 28 April 2024)

#जब से होश संभाला संघ की पार्टी “जन संघ” का नारा सूना “कांग्रेस मुस्लिम का तुष्टिकरण करती है” मगर संघ के लोगों को यह कहते कभी नहीं सूना “कांग्रेस ने 3% आबादी को देश का 30% पद दे दिया”. संघ के लोग कांग्रेस के 3% आबादी के तुष्टिकरण को छुपाने के लिए कांग्रेस पर मुस्लिम तुष्टिकरण का इलज़ाम लगाते हैं।

#कांग्रेस पर मुस्लिम तुष्टिकरण के नाम पर भारत के हर शहर में बड़ा बड़ा दंगा कराया गया और देश का जीडीपी जला जला कर भारत को ग़रीब बनाया जाता रहा। गौर तलब बात यह है कि सब बड़ा-बड़ा दंगा कांग्रेस शासित राज्यों में हुआ। यह तो निष्पक्ष शोध का विषय है कि दंगा कौन पार्टी कराती थी? क्योंकि यह जग ज़ाहिर है कि किसी भी सरकार में एक पत्ता भी बिना सराकर के सहमती के नहीं हिल सकता है।

#जनसंघ के बाद 1980 मे जब बीजेपी बनी तो वह भी कांग्रेस पर मुस्लिम तुष्टिकरण का इलज़ाम लगाना जारी रखा, और कांग्रेस शासित राज्यों में बड़ा बड़ा दंगा होता रहा। हद तो यह हो गया कि 6 दिसंबर 1992 के बाद भारत रत्न नरसिम्हा राव की सरकार पूरे देश में दंगा करा कर जीडीपी जला दिया जबकि 1991 मे प्रधानमंत्री चंद्रशेखर सिंह के समय भारत ने अर्थव्यवस्था को collapse करने से बचाने के लिए विदेश मे “सोना गिरवी” रखा था।

#मुस्लिम देशों ने 1992 के बाद भारत को सस्ता तेल देना बंद कर दिया जो 1971 में पाकिस्तान के टूटने या बांग्लादेश भारत द्वारा बनाने के समय भी यह कदम मुस्लिम देशों ने नही उठाया था। भारत रत्न नरसिम्हा राव डर गये और चीन सीमा पर शांति बनाने रखने के लिए हज़ारों वर्ग किलोमीटर का सौदा कर LOC को LAC बना कर भारत का नक़्शा बदल दिया, मगर उस समय किसी के दिल-व-दिमाग़ मे देशभक्ति या राष्ट्रवाद नहीं पैदा हुआ।

#यही बीजेपी जो कांग्रेस पर 42 साल से मुस्लिम तुष्टिकरण का इलज़ाम लगाती रही वह 2011 से चीन का तुष्टिकरण करन लगी और 2014 में सत्ता में आने पर व्यापार $25 billion से बढ़ा कर $125 billion कर दिया, अहमदाबाद में राष्ट्रपति शी को झूला झूलाया, मद्रास में नारियल पानी पिलाया मगर कोरोना काल में चीन फिर विस्तारवादी हो गया। अब तो हद हो गया चीन अरूनाचल को #घुसपैठिया दलाई लामा के तिब्बत का अटूट अंग कहने लगा और 2022 मे अरूनाचल का नाम-पता बदल कर Zangnan कर दिया।

#नोट: ख़ुशी की बात है कि कांग्रेस के मुस्लिम तुष्टिकरण ने 1971 मे पाकिस्तान को तोड़ दिया मगर दुख:द यह है कि बीजेपी के मुस्लिम तिरस्कार और चीनी तुष्टिकरण ने चीन को पुन: विस्तारवादी बना दिया, और अब सरकार ने एक नया नारा भी लगा दिया “अरूनाचल भारत का अटूट अंग है”

दुआ है संघ की पार्टी बीजेपी अब कांग्रेस पर मुस्लिम तुष्टिकरण का झूठा नारा बंद करे और देशभक्त तथा राष्ट्रवादी बने।

May God save and make India prosperous.
Some comments on the Post

Sanjeev Dutt Sharma सर सब ड्रामेबाजी 2017 में यूपी ओर 2019 में केंद्र की सत्ता बरकरार करने हेतु को ड्रामेबाजी के सिवाय कुछ नहीं है।जो लोग सत्ता के लिए उन सभी को अपनी पार्टी में शामिल कर सकते,सत्ता में भागीदार बना सकते है,जिन्हें ये दिन रात कोसते थे, गरियाते थे,(कपिल मिश्रा,राघव चड्ढा,अजीत पंवार,मुकुल राय, सुविंदु अधिकारी,हेमंत बीसवीं शर्मा आदि आदि)इनका एकमात्र मकसद, येन केन प्रकरेन,जैसे भी हो अपने बूते संसद के दोनों सदनों में सिर्फ अपना बहुमत हासिल करना है,ओर राज्यो मै सिर्फ अपनी सरकार।ताकि संविधान संशोधन द्वारा अपने मनसूबे पूरे कर सके।सहयोगी दलों के रुख की टेस्टिंग इन्होंने लोकसभा सीटों के परिसीमन संबंधी बिल के द्वारा जांच ली।मनसूबे पूरे होते ही इन सभी नेताओं को ओर सहयोगी दलों को उनकी औकात दिखा दी जाएगी।ये इन्हें 2029 तक आने वाले विधान सभा के चुनावो ओर उस वर्ष होने वाले लोकसभा चुनावों में विजय पाकर हासिल करना है।चुनाव से संबंधित संस्था,न्यायपालिका,प्रशासन,मीडिया को अपनी गिरफ्त में लेकर इन्होंने इसकी पूरी तैयारी भी कर ली गई है।मुस्लिमों के प्रतियों उद्गार भी इसी कड़ी में है।

Parmod Pahwa सर इस्लाम में नाउम्मीदी कुफ्र होती है और जो इंसान डूबने का भी जिक्र करने लगे तो इसका मतलब है कि आधा तो वो हिम्मत हार चुका है।। सिख, तुर्क और दीगर लड़ाका कौमें अपनी कहानियों या वार एपिक्स में हमेशा जीतने की बात करते थे जबकि हमारे महान युद्ध वीरगति प्राप्त होने की।इतना महीन सा फर्क इनकी सोच में बाबर ने पकड़ा था और सल्तनत कायम कर ली थी।।

  • Mohammed Seemab Zaman, Parmod Pahwa साहेब 1886 से बर्बादी शुरू हुई और 1923 में सब खत्म हो गया था। यह समझे अब यह नहीं उठें गें और हुआ भी वही मगर इसराइल जंग (1973) ने फिर ज़िंदा कर दिया। अभी के अमेरिका जंग ने सब बदल दिया। Middle East बहुत तेज़ी से करवट बदले गा क्योंकि ट्रम्प की कमज़ोरी दुनिया ने नंगा कर दिया। सही कहा डूबने का ज़िक्र करने का यही मतलब है कि डूबने का एहसास हो गया मगर हम को 2015 से यक़ीन था कि यह डूबें गें।

Zuber Mansuri अभी कुछ समय पहले ये कह रहे थे कि , इतिहास का बदला लेना है।। और साथी सवारी बोलने लगे।

Khursheeid Ahmad शानदार पोस्ट, भारत में मुसलमान अल्पसंख्यक होने के बावजूद 25 करोड़ हैं जो पूरे विश्व में सबसे बड़ी तादाद है मुसलमानों को पीछे छोड़ कर या इग्नोर करके देश आगे नहीं बढ़ सकता. इस बात को समझने में देर भले लग रही हो लेकिन समझना पडेगा.

Adv Sayyed Abbas Haider जमीन पर जितनी नफरत की खेती की गई है उस नफरती फसल को इनका बाप दादा भी नहीं काट सकते वर्ना इनकी बोई फ़सल इन्हें निगल जायगी।

Danish Qureshi जनाब इनकी कथनी ओर करनी में बोहत फर्क रहता है ऊपरी दिल से कहते है दिल में अभी बोहत ज़हर भरा है… अभी ओर भुगतेंगे तब भी नही आएगी अक्ल बिगड़ने में वक़्त नही लगता सुधारने में जमाना लग जाता है.

Kamil Khan असल में हमारी लड़ाई कभी हिंदू से न थी न है, मुस्लिम की सारी लड़ाई यहूद नसारा और ये नये पैदा हुए कम्युनिस्ट से थी, ये हिंदू बे वजह इस लड़ाई में खुद को घुसा दिये, और खुद को ही बर्बादी की राह पर खड़ा कर लिया, अभी जब अजीत डोभाल gcc के देशों में गए और वहाँ बड़े लीडर से मुलाक़ात की तस्वीरें हम ने देखीं तब ही हम समझ गए थे, वहाँ अरब में कुछ शर्तें तो रखी गई होंगी, तब यहाँ आ कर अजीत डोभाल हिंदू मुस्लिम भाई भाई कर रहे हैं,

  • Shambhu Singh, Kamil Khan ये बेस मांगने गए हैं यूएई और कुवैत से ऐसा पाकिस्तानी बोल रहें हैं.

Kamal Siddiqui सर इनके कर्मो को देखकर 12 साल का वनवास ही था अब जाकर रिजल्ट आया है, अब ये सदियों शांत रहेंगे

  • Mohammed Seemab Zaman इन को यक़ीन हो गया है कि निश्चित वह घटना घटनी है जिस का हम को इंतज़ार है। फिर यह सदियों शांत रहें गें।

Malick Shahid हम चाहते हैं ये लोग चालीस पचास साल ऐसे ही करते रहे. सिर्फ हिंदू मुस्लिम नफ़रत और बढ़ना चाहिए

  • Mohammed Seemab Zaman 12 साल में ही डूब कर तैरने लगे। अब तो दुनिया बदल गई है, गर्व से कहें गे “मेरा पड़ोसी विश्वगुरु है” और 40-50 साल शांत रहे गें।

BM Prasad शैतानो से क्या और क्यों गुज़ारिश करना?

Choudhary Sajid Ali भारत का सेक्युलर बहुसंख्यक सर माथे 🙏. किन्तु मुस्लिमो पर जुल्मो के पहाड़ तोड़ने वाला सांप्रदायिक कोई भी व्यक्ति, संगठन अब पूरी तरह नजरों से गिर चूका है, इसलिए उनसे किसी भी तरह की कोई सहानुभूति नहीं, ना ही इनकी कोई विश्वनीयता चाहे लाल तवे पर धर के कसम खाए ले.. धनियाबाद.

Syed Shaad सर फादरलैंड की पिटाई खाने के बाद आँखें खुली है। इन्हें अब समझ आ गया कि ये कौम कभी डूब नहीं सकती है, इनको डुबोना दुनिया में किसी सरकार, किसी तंत्र के बस की बात नहीं है। बस वक्तिया परेशान किया जा सकता है।

Reyaz Ahmad Khan हमें तो अभी तक समझ में नहीं आ रहा है कि सत्ता कभी इनके पास तो कभी उनके पास हस्तांतरित होती रही है, फिर भारत के शान्तिप्रिय समाज में इतना जहर घोलने की क्या आवश्यकता थी! क्या उन्हें संदेह था कि समाज में बिना नफरत फैलाए वो एक दिन भी हुकूमत नहीं कर सकते थे! ऐसा उन्होंने कौन सा इतिहास पढ़कर सबक हासिल किया था, अंग्रेजों का, मुगलों का, तुर्कों का, यहूदियों का… किसका इतिहास पढ़ कर ऐसी हुकूमत का सपना पाला था, जो अपने ही समाज में नफरत फैला कर लम्बे समय तक हुकूमत करने में कामयाब रही है‌?
Mohammad Ahsan मेरे विचार से विश्व इतिहास में ऐसी घटिया कोई मिसाल ही नहीं, ये अपने आप में एक अलग ही मिसाल है! जिसने अपने ही समाज और आसपास रहने वाले जहरीले विषाणुओं की पहचान करा दिया