The Post of 26 February 2026

हमारे आदरणीय विश्व प्रख्यात दार्शनिक, धाराप्रवाह हिन्दी वाचक, इतिहास वेत्ता, संघ प्रमुख, डाक्टर, पंडित मोहन भागवत भारतीय मुस्लिम को “हिन्दू धर्म” में घर वापसी की बात करते हैं मगर कल रात प्रधानमंत्री ने इसराइल के संसद (नेसेट) में अपने धाराप्रवाह अंग्रेज़ी भाषण मे हिन्दू और जूडइज़म (यहूदी घर्म) की समानता बताने में कहा कि Judaism और “Hindu Philosophy” मिलती जुलती है, आप लोग हनूका (candle light) मनाते हैं और हम लोग दिवाली मनाते हैं……, यानि दिवाली, होली भी मिस्र प्राचीन सभ्यता से भारत आया।

इसराइली नेसेट मे प्रधानमंत्री ने “हिन्दु घर्म” नहीं कहा बल्कि “हिन्दू फ़िलासफ़ी” (दर्शनशास्त्र) कहा, मगर हमारे विश्व प्रख्यात दार्शनिक पंडित मोहन जी हमेशा मुसलमानों को “हिन्दू धर्म” में घर वापसी की बात करते हैं।आज संघ के प्रचारक और विचारक ने “हिन्दू धर्म” की सच्चाई इसराइल मे ब्यान कर दिया।

यह लोग हिन्दुस्तान में “हिन्दू-घर्म” बोलते हैं और जब इसराइल जाते हैं तो “हिन्दू-दर्शन” बोलते हैं।इन को पता है कि यहूदियों को प्राचीन मिसरी सभ्यता के भगवान, देवी, देवता अच्छी तरह आज भी याद है क्योंकि बनी इसराइल अपने पैग़म्बर मुसा एलैहिस्सलाम की नाफ़रमानी कर सोना का गाय का “बछड़ा” बना कर पूजा शुरू कर दिया था जब वह दरिया पार कर फेरऔन को ग़र्क कर दिया और कुछ दिन के लिय पहाड़ पर चले गये थे।

प्रधानमंत्री से पहले नेसेट में भाषण देते हुए बेंजामिन नेतन्याहू ने भारत और इसराइल के गहरे रिश्तों और मिली-जुली संस्कृति के बारे में बताने के लिए प्राचीन इतिहास का भी ज़िक्र किया जिस में उन्होंने सिंधु घाटी और जॉर्डन घाटी (प्राचीन मिसरी सभ्यता) के बीच समानताएं बताईं।

देखये यह लोग “हिन्दू धर्म” को भारत में साम्प्रदायिकता फैलाने में इस्तेमाल करते हैं मगर इस धर्म की सच्चाई जानते हैं कि यह मिस्र और अरब सभ्यता से आया है जिस के कारण कल रात प्रधानमंत्री अपने इसराइल के ऐतिहासिक दौरा पर प्राचीन मिस्र (इसराइल) में “हिन्दू धर्म” बोलने की हिम्मत नही कर पाये।

#NOTE: मेरा पिछले सात साल के मिस्री, मेसोपोटामिया और सिंधु घाटी सभ्यता और वहॉ के भगवान, देवी, देवताओं के शोध को फिर से एक बार पढ़ लिजये जिस का सत्यापन प्रधानमंत्री ने इसराइल के संसद में कर दिया कि हिन्दू कोई धर्म नहीं है बल्कि एक दर्शनशास्त्र है।

https://youtube.com/watch?v=p8UBeTOvuKg