The Post of 1st June 2026

द्वितीय विश्वयुद्ध (WWII) के बाद भारतीयों को आज़ादी मिलने की उम्मीद हुई तो हिन्दु इकोसिस्टम (Hindu Ecosystem) मुसलमानों के खिलाफ गोल बंद होना शुरू हुआ जिस का नतीजा मुल्क का बँटवारा करवा दिया।

बँटवारा करने के बाद मुल्क के बहुसंख्यक समाज के कट्टरपंथियों ने हर क़स्बा और हर शहर मे दंगा फ़साद करा कर मुस्लिम के बिज़नेस और पेशा को बर्बाद कर उन को आर्थिक दंड देते रहे। बहुसंख्यक समाज के किसी बुद्धिजीवी, नेता या पत्रकार को यह समझ में नहीं आया कि इस दंगा-फ़साद से देश की GDP जल कर बर्बाद होती है।

बहुसंख्यक समाज के पढ़े लिखे लोग इसी में ख़ुश थे कि मुसलमानों के व्यवसाय को हम बर्बाद कर उन को समाज में सब से नीचे पायेदान पर ला दें गें और फिर Hindu Hierarchy सुरक्षित हो जाये गा।

इसी आपा-धापी में भारत में संघ की सरकार केन्द्र में बन गई और सरकार की एडमिनिस्ट्रेटिव एनर्जी मुसलमानों को आर्थिक के साथ साथ राजनीतिक तौर पर भी किनारे लगा दिया।पिछले 10-15 साल में मुस्लिम पूरे उत्तर भारत में राजनीतिक अछूत बना दिया गया।

यह कहना बिल्कुल ग़लत है कि EVM या बेईमानी से संघ की सरकार बनती गई बल्कि #हिन्दू_वोट से महाराष्ट्र से बिहार, बंगाल तक संघ की सरकार राज्यों में बनी।बिहार में लालू प्रसाद जिस ने मुसलमानों से मिल कर यादवों को उच्च जाति बनाया वह भी अब संघ की सरकार को वोट देने लगे।

यह सच है कि संघ की सरकार ने मुसलमानों को आर्थिक और राजनीतिक अछूत बना तो दिया मगर यह भी सच है कि सरकार के ख़राब जियोपॉलिटिकल और जियोएकोनौमिकल फ़ैसलों ने अपनी चमक खो दिया।

मुस्लिम तिरस्कार के कारण हिन्दुस्तान “विश्वगुरु” नही बन सका और अब अमेरिका-इसराइल-ईरान जंग से पैदा तेल संकट संघ के सरकार के “अच्छे दिन” के सपना को भी साकार करने में असफल रहे गी।

अब बहुसंख्यक समाज के लोग चाहें गें भी तो देशहित मे कोई अच्छा परिवर्तन नही होने वाला है, क्योंकि अब मुस्लिम समाज भारतीय राजनीति मे खुल कर participate नहीं करे गा।

#NOTE 1: अब समय आ गया है कि देशहित में हिंदुत्व और संघ के सीनियर नेता मुसलमानों के खिलाफ #नफ़रती_त्योहार छोड़ दें और तैयार होकर फ्रंट-फुट पर आकर समाज में फैलाये नफ़रती ऐजंडा मे बडे बदलाव का संकल्प लें वरना यक़ीन मानये इस बदली दुनिया में दशकों भारत की आत्मा भटकती रहे गी।

#NOTE 2: अरब दुनिया में एक बहुत मशहूर कहावत है कि “आदमी वक़्त से डरता है मगर वक़्त पिरामिड से डरता है।” भारतीय बहुसंख्यक समाज के बुद्धिजीवी AI से बने निचे 7000-8000 साल पहले “मिसरी_सभ्यता” मे भगवान की पूजा पद्धति का स्मरण करें और शोध करें कौन कहॉ से आया और क्या लाया?