The Post of 25 August 2026
एंटोनियो गुटेरेस जो 2017 से UNO के General Secretary हैं उन का कार्यकाल इस साल 31 दिसंबर को खत्म हो रहा है।गुटेरेस 1995-2002 तक पुर्तगाल के बहुत कामयाब प्रधानमंत्री रहे हैं।
कल न्यूयॉर्क में UN हेडक्वार्टर की 38वीं मंज़िल पर अपने ऑफ़िस में गुटेरेस ने Financial Times, London के पत्रकार को एक लम्बे साक्षात्कार में कहा कि “अब समय आ गया है कि महाशक्तियाँ अपनी ताक़त की सीमाएँ समझें।अगर आप हाल के समय की घटनाओं पर नज़र डालें, तो कई स्थितियों में महाशक्तियों की अपनी मर्ज़ी या ताक़त थोपने की क्षमता काफ़ी सीमित हो गई है।”
उन्होंने कहा, “2022 फ़रवरी में हुऐ रूस और यूक्रेन के जंग के मामले को ही देख लीजिए, मॉस्को को उम्मीद थी कि यह कुछ ही दिनों में खत्म हो जाएगा, मगर आज तक जंग चल रही है।
गुटेरेस ने ईरान के ख़िलाफ़ अमेरिका और इज़राइल की लड़ाई का भी ज़िक्र किया और कहा अमेरिका को उम्मीद थी कि 28 फ़रवरी 2026 में हमले के बाद तेहरान घुटने टेक देगा, लेकिन छह महीने बाद भी ईरान की सरकार डटी हुई है और उसने दुनिया के सबसे अहम एनर्जी वॉटरवे, Strait of Hormuz को बंद कर दिया है।
गुटेरेस ने कहा, “महाशक्तियों को यह समझने की ज़रूरत है कि हालात बदल गए हैं और अलग-अलग देशों का महत्व भी बदल गया है।”
#NOTE: मेरा कहना है कि पिछले पचास साल (1973-2026) मे फ़लस्तीन और अफ़ग़ानिस्तान के मार काट ने अमेरिका और सोवियत संघ के superpowers status को ख़त्म कर दिया और पाकिस्तान-तुर्की-सऊदी अरब का “मक्का समझौता” उस का नतीजा है।
Post America-Iran-Israel जंग के बाद, सऊदी अरब अपने विशाल oil reserves, strategic location और भारी economics investment in Nuclear Energy और AI के वजह कर वैश्विक स्तर पर एक प्रमुख देश होगा।
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Some comments on the Post
Mohammed Seemab Zaman, इस पोस्ट के आख़िर में हम ने सऊदी अरब के बारे में जो लिखा है उस को उर्दु नाम वाले भारत में हिन्दी मिडिया और बुद्धीजीवियो का विडियो देख कर ग़लत न समझें।
In the Middle East, Saudi Arabia is too big to ignore by multipolar world.
Raja King, Mohammed Seemab Zaman आपने बिल्कुल सही कहा अरबियों की ज़बान छोटी है , सोच और लाठी बड़ी है इसीलिए वो सभी काम सोच समझकर करते हैं नतीजा मक्का समझौता करके.
Tanveer Hkm, Mohammed Seemab Zaman सर लेकिन उसके लिए सऊदी को अपने लोगों को काबिल बनाना होगा (केवल वेस्ट की कॉपी, अमेरिका से आये हुए कर्मी & तकनीशियन को ही सर्वश्रेष्ठ समझना एवं मुँह मांगा पैसा देना – इससे बाज़ आना होगा) – वे मेहनत तो कर रहे हैं मगर उतना नहीं की दुनिया से कंपीट कर सके [भाड़े (बाहरी) के लोग और हथियार धोखा देने में तनिक भी देर नहीं लगाते] – इस रफ्तार से कई दशक लगेंगे !
सौबान रजा, एंटोनियो गुटरेस ने एकदम सटीक बयान दिया है। हमें खुद जानकारी है सर कि एक जमाना था कि जब अमेरिका किसी देश पर हमलावर होता था तो एक ही घुड़की में ज्यादातर देश उसके प्लेटफार्म पर जा करके सभी प्रकार की सहायता करते थे लेकिन आज अमेरिका का धौंस खत्म हो गया
Mohammed Seemab Zaman, गुटेरेस अब रिटायर कर रहे हैं और जाते जाते सच उगल दिया। गुटेरेस ने ट्रम्प को बहुत बर्दाश्त किया। यह इंटरव्यू 40 मिनट का है मगर बहुत informative है।
Kamil Khan, मुस्लिम दुनिया और खास कर अरब और तुर्की ने, बड़ी हिकमत से, दुनिया की सुपर पावर के सामने एक मजबूत फ्रंट खड़ा कर दिया, बोसिनिया से ले कर अफ़ग़ान तक लाखों मुसलमानो की कुर्बानी है इसमें,
Faysal Khan, अगर रूस यूक्रेन जंग न चल रही होती तो नाटो भी ईरान के ख़िलाफ़ खुल कर आ चुका होता तो शायद गुटरेस आज ये बयान न देते, दूसरा ये कि ईरान के ख़िलाफ़ जंग नैयतनयाहू ने शुरू करवाई थी जिसका मक़सद ईरान को निबटाने से ज़्यादा अरबों को लपेटना था लेहाज़ा अरब ने भी दूरी बना ली, सब परिस्थितियों का खेल है,
देर भले ही लग सकती है मगर नतीजा वही आएगा,,

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